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कोरोना जैसा ही है बर्ड फ्लू, दवा नहीं, सतर्कता ही बचाव
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झांसी। इन दिनों बर्ड फ्लू को लेकर देशभर में अलर्ट है। पक्षियों के जरिए मनुष्यों का संक्रमित करने वाला यह रोग कोरोना वायरस जैसा ही है। इसके उपचार की भी कोई दवा नहीं है। सतर्कता ही इससे बचा सकती है। संक्रामक रोग होने के कारण यदि कोई मनुष्य बर्ड फ्लू का शिकार हो जाता है तो वह दूसरों को भी संक्रमित करता जाता है।
यह इंफ्लूएंजा ए वायरस का ही एक प्रकार है। वायरस में 16 एच और नौ एन प्रकार के प्रोटीन होते हैं, जो आपस में मिलकर कई स्ट्रेन बना सकते हैं। मुख्यत: बर्ड फ्लू के दो स्ट्रेन होते हैं। एच5एन1 और एच7एन9। अभी का स्ट्रेन एच5एन1 है। यह स्ट्रेन पूर्व में आए स्वाइन फ्लू स्ट्रेन से अलग है।
ज्यादातर जलीय व समुद्रीय पक्षियों में यह संक्रमण होता है। इसलिए माइग्रेट्री बर्ड्स से यह संक्रमण एक से दूसरे देश और अन्य राज्यों में फैलने का खतरा रहता है। पोल्ट्री, कच्चे मांस, अंडे का व्यवसाय करने वाले लोगों में इसका संक्रमण का खतरा रहता है। पक्षियों से पालतू जानवरों में होने और उनसे मनुष्य में फैलता है। इसे अन्य फ़्लू से अलग से पहचान करना मुश्किल होता है। यह संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है।
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मनुष्यों में ये लक्षण आते
- खांसी
- जुकाम
- बुखार
मांस को अच्छे से पकाकर और अंडे को उबालने से यह संक्रमण खत्म हो जाता है। कच्चे मांस, अंडे को छूने के बाद अच्छे से गर्म पानी व साबुन से हाथों को धोना चाहिए। पकाने के लिए उपयोग में लाए गए बर्तन को गर्म पानी व साबुन से धोना चाहिए। बर्ड फ्लू की भी कोई दवा नहीं है। इसलिए सतर्कता से ही इससे बचा जा सकता है।
- डॉ. आराधना कनकने, मेडिकल कॉलेज।
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यह इंफ्लूएंजा ए वायरस का ही एक प्रकार है। वायरस में 16 एच और नौ एन प्रकार के प्रोटीन होते हैं, जो आपस में मिलकर कई स्ट्रेन बना सकते हैं। मुख्यत: बर्ड फ्लू के दो स्ट्रेन होते हैं। एच5एन1 और एच7एन9। अभी का स्ट्रेन एच5एन1 है। यह स्ट्रेन पूर्व में आए स्वाइन फ्लू स्ट्रेन से अलग है।
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ज्यादातर जलीय व समुद्रीय पक्षियों में यह संक्रमण होता है। इसलिए माइग्रेट्री बर्ड्स से यह संक्रमण एक से दूसरे देश और अन्य राज्यों में फैलने का खतरा रहता है। पोल्ट्री, कच्चे मांस, अंडे का व्यवसाय करने वाले लोगों में इसका संक्रमण का खतरा रहता है। पक्षियों से पालतू जानवरों में होने और उनसे मनुष्य में फैलता है। इसे अन्य फ़्लू से अलग से पहचान करना मुश्किल होता है। यह संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है।
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मनुष्यों में ये लक्षण आते
- खांसी
- जुकाम
- बुखार
मांस को अच्छे से पकाकर और अंडे को उबालने से यह संक्रमण खत्म हो जाता है। कच्चे मांस, अंडे को छूने के बाद अच्छे से गर्म पानी व साबुन से हाथों को धोना चाहिए। पकाने के लिए उपयोग में लाए गए बर्तन को गर्म पानी व साबुन से धोना चाहिए। बर्ड फ्लू की भी कोई दवा नहीं है। इसलिए सतर्कता से ही इससे बचा जा सकता है।
- डॉ. आराधना कनकने, मेडिकल कॉलेज।