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बड़े संकट के लिए तैयार रहिए, नहीं चलेंगी नहरें, बांधों में सिर्फ पीने लायक पानी

Thu, 15 Jul 2021 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:36 AM IST
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Be ready for big trouble, canals will not run, only potable water in dams
झांसी। बारिश नहीं होने के चलते बांध से अब नहरों का संचालन नहीं होगा। केवल पीने के पानी की आपूर्ति की जाएगी। माताटीला और पहूंज बांध में सिर्फ पीने भर का पानी बचा है। यदि जल्द बरसात नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पानी की मांग बढ़ेगी, जिसे पूरा कर पाना संभव नहीं होगा।
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महानगर की आबादी 5.90 लाख है। करीब डेढ़ लाख मकान हैं और घरेलू नल कनेक्शनों की संख्या 45 हजार से अधिक है। पेयजल के लिए 83.82 एमएलडी पानी की जरूरत पड़ती है लेकिन आपूर्ति 70.45 एमएलडी की हो रही है। बाकी पानी का इंतजाम हैंडपंपों के सहारे होता है। यानी पानी की कुल मांग की 70 प्रतिशत आपूर्ति सरफे स वाटर (बांध का पानी) से होती है। बाकी मांग भूजल के माध्यम से पूरी होती है। सरफे स वाटर माताटीला बांध और पहूंज बांध से आता है। महानगर के पुराने क्षेत्र में पहूंज बांध से छह एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है।
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माताटीला बांध से इस बार फरवरी-मार्च तक नहर चलने से काफी पानी खर्च हो गया। गर्मियों में जानवरों को पीने के पानी के लिए आसपास के बड़े तालाबाें को भरने में भी बांध के पानी का इस्तेमाल किया गया। नहरों से भी पानी का संचालन किया गया, ताकि जानवरों को पीने के पानी की समस्या न हो।
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जुलाई के करीब पंद्रह दिन बीतने को हैं और अब तक बरसात नहीं हुई है। अब बांध में 80 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) पानी की सुरक्षित बचा है। शहर में माताटीला से 110 (एमएलडी) पानी की आपूर्ति होती है। इसी तरह पहूंज बांध से महानगर को 10.60 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी आता है। बांध में 6.57 मिलियन घन मीटर पानी रिजर्व है। पहूंज नदी पर बने इस बांध में पानी अंतिम स्टेज पर पहुंच गया है। यदि जल्द ही बरसात नहीं हुई तो आने वाले समय में समस्या आ सकती है और पानी का संकट गहरा सकता है।
यह होती है दिक्कत
नहरों का संचालन होने से उस क्षेत्र के प्यासे जानवरों को आराम रहता है। उन्हें पीने के पानी के लिए इधर- उधर नहीं भटकना पड़ता है। लेकिन नहरों का संचालन नहीं होने के कारण जानवरों को पीने के पानी की समस्या हो जाती है। क्योंकि, गर्मियों में तालाब और पोखर सूख जाते हैं। पानी का कोई स्रोत नहीं बचता है। इस कारण जानवर प्यासे भटकते रहते हैं। प्यास से उनकी मौत भी हो जाती है।
मोटर चलाकर प्रेशर बनाया जा रहा
कुछ दिनों से पानी के प्रेशर में कमी आ गई है। इस कारण पानी आपूर्ति में दिक्कत हो रही है। दूर वाले और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंचने के कारण मोटर चलाकर प्रेशर बनाया जा रहा है, ताकि सभी स्थानों तक पानी पहुंच जाए।
पेयजल के लिए मिलता है दो मिलियन घन मीटर पानी
माताटीला बांध से महानगर में पेयजल के लिए करीब 110 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। साल भर में पेयजल पर करीब 2 टीएमसी (मिलियन घन मीटर) पानी खर्च होता है। मौजूदा समय में 50 मिलियन घन मीटर पानी बचा है।
पेयजल के निदान लिए माताटीला बांध में पानी का अलग से बफर स्टॉक सुरक्षित है। यदि बरसात नहीं हुई तो पानी की कमी होने पर कृषि कार्यों समेत नहरों के संचालन पर रोक लगा दी जाएगी।
- मोहम्मद फरीद, अधिशासी अभियंता, माताटीला बांध
बांध में पानी बहुत कम है। यदि पानी नहीं बरसता तो इसी महीने के बाद समस्या आ सकती है। लोगों को चाहिए कि जरूरत के अनुसार कम से कम पानी का इस्तेमाल करें। - कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

इन क्षेत्रों में होती है पहूंज बांध से पानी की आपूर्ति
दतिया गेट, थापक बाग, नकटा चौपड़ा, छुट्टू का बगीचा, पंचवटी कॉलोनी, बाहर उनाव गेट, मेवातीपुरा, सरांय, अलीगोल, नई बस्ती, मुकरयाना, नरसिंहराव टौरिया, झारखड़िया आदि मोहल्लों में पहूंज बांध से पानी की आपूर्ति होती है।
नहरों की लंबाई 1236 किमी
कुल सिंचित क्षेत्रफल - 309.500 हेक्टेयर
नहरों से - 121.078
तालाब एवं झील से 33.188
प्रमुख नहर प्रणाली
- बेतवा नहर प्रणाली
- पहूज नहर प्रणाली
- गढ़मऊ नहर प्रणाली
- गुरसराय नगर प्रणाली
- बढ़वार नहर प्रणाली
- रानीपुर नहर प्रणाली
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