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पुरातत्व विभाग ने नहीं दिए कब्र के दस्तावेज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:36 AM IST
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police, jhansi news
- फोटो : demo
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ब्रिटिश कमिश्नर एफ डब्ल्यू पिंकने की कब्र से जुड़े दस्तावेज पुरातत्व विभाग की ओर से प्रशासन को नहीं सौंपे गए। जबकि, बीते रोज कब्र क्षतिग्रस्त किए जाने पर पुरातत्व विभाग ने सोमवार को दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही थी। एसडीएम ने बताया कि दस्तावेज मिलने पर ही आगे की जांच होगी।
उल्लेखनीय है कि बीते रोज इलाहाबाद बैंक के सामने स्थित उक्त कब्र को क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना पर प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर काम बंद करा दिया था। इस दौरान पूर्व मंत्री स्व. रमेश कुमार शर्मा के परिवार की ओर से जमीन पर मालिकाना हक के दस्तावेज व उनके पक्ष में 2016 में हुए हाईकोर्ट के निर्णय की कापी एसडीएम को दी गई थी। लेकिन, पुरातत्व विभाग की ओर से दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे। दस्तावेज सोमवार को उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन, विभाग की ओर से यह दस्तावेज अब तक प्रशासन को नहीं मिले हैं।
उप जिलाधिकारी चंदन कुमार पटेल ने बताया कि पुरातत्व विभाग की ओर से दस्तावेज नहीं मिले हैं। जबकि, शर्मा परिवार कागजात उपलब्ध करा चुका है। उन्होंने बताया कि राजस्व अभिलेखों में जमीन पर शर्मा परिवार का नाम दर्ज है। साथ ही हाईकोर्ट के एक फैसले की कापी भी आई है, जो शर्मा परिवार के पक्ष में है। पुरातत्व विभाग द्वारा कब्र को स्मारक तो बताया जा रहा है, परंतु इससे जुड़े दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। इससे जांच में देरी हो रही है।
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इसलिए है मेजर पिंकने से नफरत
सन 1857 के गदर के बाद ब्रिटिश सरकार ने झांसी में मेजर एफ डब्ल्यू पिंकने को बतौर कमिश्नर तैनात किया था। मेजर पिंकने ने महारानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजों के बीच हुई लड़ाई की जांच कर रिपोर्ट ब्रिटिश सरकार को भेजी थी, जिसमें पिंकने ने स्वतंत्रता के लिए लड़े गए इस संग्राम को अपराध बताया था। रानी व उनके सहयोगियों को अपराधी घोषित किया था। अपनी रिपोर्ट में पिंकने ने रानी की चल- अचल संपत्ति को जब्त करने की सिफारिश भी की थी। यही वजह है कि पिंकने से झांसी के लोग आज भी नफरत करते हैं। गौरतलब है कि आम लोगों में इस कब्र की ख्याति कुत्ते की कब्र के नाम से है।
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उल्लेखनीय है कि बीते रोज इलाहाबाद बैंक के सामने स्थित उक्त कब्र को क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना पर प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर काम बंद करा दिया था। इस दौरान पूर्व मंत्री स्व. रमेश कुमार शर्मा के परिवार की ओर से जमीन पर मालिकाना हक के दस्तावेज व उनके पक्ष में 2016 में हुए हाईकोर्ट के निर्णय की कापी एसडीएम को दी गई थी। लेकिन, पुरातत्व विभाग की ओर से दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे। दस्तावेज सोमवार को उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन, विभाग की ओर से यह दस्तावेज अब तक प्रशासन को नहीं मिले हैं।
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उप जिलाधिकारी चंदन कुमार पटेल ने बताया कि पुरातत्व विभाग की ओर से दस्तावेज नहीं मिले हैं। जबकि, शर्मा परिवार कागजात उपलब्ध करा चुका है। उन्होंने बताया कि राजस्व अभिलेखों में जमीन पर शर्मा परिवार का नाम दर्ज है। साथ ही हाईकोर्ट के एक फैसले की कापी भी आई है, जो शर्मा परिवार के पक्ष में है। पुरातत्व विभाग द्वारा कब्र को स्मारक तो बताया जा रहा है, परंतु इससे जुड़े दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। इससे जांच में देरी हो रही है।
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इसलिए है मेजर पिंकने से नफरत
सन 1857 के गदर के बाद ब्रिटिश सरकार ने झांसी में मेजर एफ डब्ल्यू पिंकने को बतौर कमिश्नर तैनात किया था। मेजर पिंकने ने महारानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजों के बीच हुई लड़ाई की जांच कर रिपोर्ट ब्रिटिश सरकार को भेजी थी, जिसमें पिंकने ने स्वतंत्रता के लिए लड़े गए इस संग्राम को अपराध बताया था। रानी व उनके सहयोगियों को अपराधी घोषित किया था। अपनी रिपोर्ट में पिंकने ने रानी की चल- अचल संपत्ति को जब्त करने की सिफारिश भी की थी। यही वजह है कि पिंकने से झांसी के लोग आज भी नफरत करते हैं। गौरतलब है कि आम लोगों में इस कब्र की ख्याति कुत्ते की कब्र के नाम से है।