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Jhansi News: ''''''''अमृत'''''''' तर करेगी कंठ, गर्मियों में 40 हजार घरों तक पहुंचेगा नल से जल
Wed, 07 Feb 2024 01:46 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Wed, 07 Feb 2024 01:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। गर्मियों में पानी के लिए परेशान रहने वाली महानगर की 40 हजार की आबादी को बड़ी राहत मिलने जा रही है। पिछले साढ़े चार साल से चल रही अमृत योजना गर्मियों में लोगों का गला तर करेगी। इस योजना से महानगर के पेयजल संकट ग्रस्त क्षेत्रों में नल से जल पहुंचने लगेगा। इन क्षेत्रों में पाइपलाइन डाल दी गई है। कनेक्शन दे दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि अमृत योजना का काम अंतिम चरण में है। मई में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
महानगर में करीब 20 से ज्यादा इलाके ऐसे हैं, जहां पानी का संकट रहता है। गर्मियों में तो लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। शहर में कई इलाके तो ऐसे हैं जहां सुबह ही लोग साइकिल और बाइक पर डिब्बों को टांगकर पानी की तलाश के लिए निकल पड़ते हैं। कहीं दो किलोमीटर तो कहीं तीन किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में जलसंस्थान टैंकर पहुंचाने की व्यवस्था करता है, लेकिन बड़ी और घनी आबादी होने से टैंकर भी यहां पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति नहीं कर पाते। आलम यह होता है कि टैंकर क्षेत्र में पहुंचते ही उस पर भीड़ टूट पड़ती है। टैंकर से पानी भरने के लिए जंग सी होती है। जल निगम ने सर्वे किया तो सामने आया कि 40 हजार घर ऐसे हैं, जहां पानी नहीं पहुंचता।
लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए साल 2019 में केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत 600 करोड़ रुपये से महानगर के संकटग्रस्त इलाकों में पानी की पाइपलाइन बिछाने और नई टंकियों का निर्माण शुरू कराया गया। संकटग्रस्त क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए 530 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। 41 टंकियां बनाई गईं। माताटीला बांध पर इंटेकवेल और बबीना में 195 एमएलडी क्षमता वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। योजना के तहत बबीना से झांसी तक आ रही पाइपलाइन के बीच में आ रही पहाड़ी को काटने और इलाइट चौराहे के पास मुख्य पाइपलाइन का चैंबर बनाने का काम बाकी है। अफसरों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक यह काम पूरा हो जाएगा और मई के पहले सप्ताह में संकट ग्रस्त इलाकों के 40 हजार घरों में नल से जल पहुंचने लगेगा।
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इन क्षेत्र के लोगों को मिलेगी सहूलियत
लहरगिर्द, बड़ागांव गेट बाहर, सागर गेट, तालपुरा, खातीबाबा, शिवाजी नगर, गुमनावारा, मेडिकल कॉलेज, कोछाभांवर, नंदनपुरा, नगरा, सीपरी बाजार, सिविल लाइन, हंसारी, बिजौली, सिमरधा, अयोध्यापुरी, महेंद्रपुरी, मेवातीपुरा, दरीगरान, भगवंतपुरा और सिल्वर्टगंज।
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गर्मियों में 55 हजार चक्कर लगाते हैं 50 टैंकर
महानगर में गर्मियों मेें जलसंकट को दूर करने के लिए जलसंस्थान टैंकरों का संचालन करता है। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि गर्मियों में महानगर में 50 टैंकर 55 हजार चक्कर लगाकर पानी पहुंचाते हैं। इस बार भी जलसंस्थान ने टैंकर संचालन की तैयारी की है। अफसरों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन से पानी कम पहुंचेगा, वहां अप्रैल-मई से टैंकरों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए सर्वे चल रहा है। अधिशासी अभियंता संजीव कुमार के मुताबिक टैंकर संचालन के लिए तैयारी की जा रही है।
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हैंडपंपों की मरम्मत भी कराई जा रही
गर्मियों में पेयजल संकट दूर करने के लिए हैंडपंपों की मरम्मत कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। महानगर में 3000 हैंडपंप हैं। इसमें करीब 300 हैंडपंप खराब हैं। वहीं जलसंस्थान हैंडपंपों की स्थिति जानने के लिए सर्वे करा रहा है।
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कहते हैं आंकड़े
530 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई
41 टंकियां बनाई गई हैं महानगर में
20 इलाकों में सबसे ज्यादा है संकट
04 साल बाद पूरी हो रही अमृत योजना
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वर्जन
अमृत परियोजना का काम अंतिम चरण में है। महज पांच से दस फीसदी काम ही शेष है। इसको कार्यदायी संस्था गर्मियां शुरू होने तक पूरा कर लेगी। इसके बाद पेयजल आपूर्ति की जाएगी। - मुकेश पाल सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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झांसी। गर्मियों में पानी के लिए परेशान रहने वाली महानगर की 40 हजार की आबादी को बड़ी राहत मिलने जा रही है। पिछले साढ़े चार साल से चल रही अमृत योजना गर्मियों में लोगों का गला तर करेगी। इस योजना से महानगर के पेयजल संकट ग्रस्त क्षेत्रों में नल से जल पहुंचने लगेगा। इन क्षेत्रों में पाइपलाइन डाल दी गई है। कनेक्शन दे दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि अमृत योजना का काम अंतिम चरण में है। मई में पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
महानगर में करीब 20 से ज्यादा इलाके ऐसे हैं, जहां पानी का संकट रहता है। गर्मियों में तो लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। शहर में कई इलाके तो ऐसे हैं जहां सुबह ही लोग साइकिल और बाइक पर डिब्बों को टांगकर पानी की तलाश के लिए निकल पड़ते हैं। कहीं दो किलोमीटर तो कहीं तीन किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में जलसंस्थान टैंकर पहुंचाने की व्यवस्था करता है, लेकिन बड़ी और घनी आबादी होने से टैंकर भी यहां पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति नहीं कर पाते। आलम यह होता है कि टैंकर क्षेत्र में पहुंचते ही उस पर भीड़ टूट पड़ती है। टैंकर से पानी भरने के लिए जंग सी होती है। जल निगम ने सर्वे किया तो सामने आया कि 40 हजार घर ऐसे हैं, जहां पानी नहीं पहुंचता।
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लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए साल 2019 में केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत 600 करोड़ रुपये से महानगर के संकटग्रस्त इलाकों में पानी की पाइपलाइन बिछाने और नई टंकियों का निर्माण शुरू कराया गया। संकटग्रस्त क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए 530 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। 41 टंकियां बनाई गईं। माताटीला बांध पर इंटेकवेल और बबीना में 195 एमएलडी क्षमता वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। योजना के तहत बबीना से झांसी तक आ रही पाइपलाइन के बीच में आ रही पहाड़ी को काटने और इलाइट चौराहे के पास मुख्य पाइपलाइन का चैंबर बनाने का काम बाकी है। अफसरों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक यह काम पूरा हो जाएगा और मई के पहले सप्ताह में संकट ग्रस्त इलाकों के 40 हजार घरों में नल से जल पहुंचने लगेगा।
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इन क्षेत्र के लोगों को मिलेगी सहूलियत
लहरगिर्द, बड़ागांव गेट बाहर, सागर गेट, तालपुरा, खातीबाबा, शिवाजी नगर, गुमनावारा, मेडिकल कॉलेज, कोछाभांवर, नंदनपुरा, नगरा, सीपरी बाजार, सिविल लाइन, हंसारी, बिजौली, सिमरधा, अयोध्यापुरी, महेंद्रपुरी, मेवातीपुरा, दरीगरान, भगवंतपुरा और सिल्वर्टगंज।
गर्मियों में 55 हजार चक्कर लगाते हैं 50 टैंकर
महानगर में गर्मियों मेें जलसंकट को दूर करने के लिए जलसंस्थान टैंकरों का संचालन करता है। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि गर्मियों में महानगर में 50 टैंकर 55 हजार चक्कर लगाकर पानी पहुंचाते हैं। इस बार भी जलसंस्थान ने टैंकर संचालन की तैयारी की है। अफसरों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन से पानी कम पहुंचेगा, वहां अप्रैल-मई से टैंकरों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए सर्वे चल रहा है। अधिशासी अभियंता संजीव कुमार के मुताबिक टैंकर संचालन के लिए तैयारी की जा रही है।
हैंडपंपों की मरम्मत भी कराई जा रही
गर्मियों में पेयजल संकट दूर करने के लिए हैंडपंपों की मरम्मत कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। महानगर में 3000 हैंडपंप हैं। इसमें करीब 300 हैंडपंप खराब हैं। वहीं जलसंस्थान हैंडपंपों की स्थिति जानने के लिए सर्वे करा रहा है।
कहते हैं आंकड़े
530 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई
41 टंकियां बनाई गई हैं महानगर में
20 इलाकों में सबसे ज्यादा है संकट
04 साल बाद पूरी हो रही अमृत योजना
वर्जन
अमृत परियोजना का काम अंतिम चरण में है। महज पांच से दस फीसदी काम ही शेष है। इसको कार्यदायी संस्था गर्मियां शुरू होने तक पूरा कर लेगी। इसके बाद पेयजल आपूर्ति की जाएगी। - मुकेश पाल सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम