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टेंडर में गड़बड़ी का आरोप, ठेकेदारों का हंगामा
झांसी / ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2015 11:55 PM IST
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लोहिया गांवों में सीसी रोड व आंतरिक नाली निर्माण के टेंडर चहेतों को दिए जाने समेत अन्य आरोप लगाते हुए ठेकेदारों ने विकास भवन में हंगामा किया। उन्होंने सीडीओ को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। सीडीओ ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।
मालूम हो कि विगत दिनों ग्रामीण अभियंत्रण सेवा(आरईएस) द्वारा लोहिया गांवों में सीसी रोड और आंतरिक नाली निर्माण के लिए चार करोड़ 59 लाख का टेंडर निकाले थे। ओपन टेंडर डालने के लिए तीन स्थान चिह्नित किए गए थे, जिसमें कलेक्ट्रेट, अधीक्षण अभियंता कार्यालय व अधिशासी अभियंता कार्यालय शामिल थे। उक्त कार्य के लिए 73 लोगों ने टेंडर डाला था। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह नियम है कि जिन ठेकेदारों ने टेंडर डाला हो, उन्हें टेंडर खुलने की जानकारी दी जाए। ठेकेदारों का कहना है कि ऐसा नहीं किया गया। इस पर कुछ ठेकेदारों ने विकास भवन में हंगामा किया।
इस संबंध में ठेकेदार राम कुमार यादव ने सीडीओ को ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोप लगाया कि आरईएस अधिकारियों ने कुछ चहेते ठेकेदारों को टेंडर स्वीकृत कर दिए हैं। टेंडर खुलने की जानकारी भी नहीं दी गई है। इस बाबत जब विभागीय अभियंताओं से जानकारी हासिल की गई तो कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। यह भी जानकारी नहीं उपलब्ध कराई जा रही है कि कितने लोगों के टेंडर फाइनल हुए हैं। सूची चस्पा नहीं कराई गई है।
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मालूम हो कि विगत दिनों ग्रामीण अभियंत्रण सेवा(आरईएस) द्वारा लोहिया गांवों में सीसी रोड और आंतरिक नाली निर्माण के लिए चार करोड़ 59 लाख का टेंडर निकाले थे। ओपन टेंडर डालने के लिए तीन स्थान चिह्नित किए गए थे, जिसमें कलेक्ट्रेट, अधीक्षण अभियंता कार्यालय व अधिशासी अभियंता कार्यालय शामिल थे। उक्त कार्य के लिए 73 लोगों ने टेंडर डाला था। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह नियम है कि जिन ठेकेदारों ने टेंडर डाला हो, उन्हें टेंडर खुलने की जानकारी दी जाए। ठेकेदारों का कहना है कि ऐसा नहीं किया गया। इस पर कुछ ठेकेदारों ने विकास भवन में हंगामा किया।
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इस संबंध में ठेकेदार राम कुमार यादव ने सीडीओ को ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोप लगाया कि आरईएस अधिकारियों ने कुछ चहेते ठेकेदारों को टेंडर स्वीकृत कर दिए हैं। टेंडर खुलने की जानकारी भी नहीं दी गई है। इस बाबत जब विभागीय अभियंताओं से जानकारी हासिल की गई तो कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। यह भी जानकारी नहीं उपलब्ध कराई जा रही है कि कितने लोगों के टेंडर फाइनल हुए हैं। सूची चस्पा नहीं कराई गई है।
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