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Jhansi News: मिनटों में टीबी संदिग्धों की पहचान कर रहा एआई

Tue, 29 Sep 2026 02:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 02:54 AM IST
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AI is identifying TB suspects in minutes.
एआई से लेस पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से एक-रे कराटे करते लोग
झांसी। जिला क्षय रोग विभाग में टीबी की स्क्रीनिंग प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। शासन से मिली एआई से लैस पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन से दूरस्थ गांवों में लगाए जा रहे शिविरों में लोगों की मौके पर ही एक्सरे जांच की जा रही है। एक्सरे के तत्काल एआई विश्लेषण से टीबी के संदिग्ध मामलों की पहचान की जा रही है। संदिग्ध मिलने पर मौके से ही बलगम का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है, जिससे उपचार शुरू करने में लगने वाला समय कम हुआ है।
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पहले टीबी स्क्रीनिंग के दौरान लक्षण वाले लोगों को एक्सरे के लिए सीएचसी या जिला अस्पताल भेजना पड़ता था। वहां एक्सरे कराने और रिपोर्ट मिलने के बाद संदिग्ध पाए जाने पर बलगम की जांच कराई जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में कई दिन लग जाते थे। अब पोर्टेबल मशीन की मदद से गांव में ही एक्सरे होने से मरीज को जांच के लिए अस्पताल तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
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ब्रीफकेस में रखकर गांव तक ले जा रहे मशीन
पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। विभाग की टीम इसे लेकर ककरबई, मऊरानीपुर, गुरसराय, मोंठ, बामौर के दूरस्थ क्षेत्रों में शिविर लगा रही है। शिविर में आने वाले लोगों का मौके पर ही एक्सरे किया जाता है। मशीन को लैपटॉप से जोड़ा जाता है और एक्सरे के बाद एआई तकनीक से उसका विश्लेषण किया जाता है। एक्सरे में टीबी के संभावित संकेत मिलने पर व्यक्ति को संदिग्ध श्रेणी में रखा जाता है। संदिग्ध व्यक्ति का बलगम सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजा जाता है। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर विभाग की ओर से उसका उपचार शुरू कराया जाता है।
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तीन घंटे में 120 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. यूएन सिंह ने बताया कि एआई आधारित एक्सरे मशीन से टीबी के संभावित मरीजों की पहचान करना आसान हो गया है। लोगों को अब एक्सरे कराने के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि मशीन से करीब तीन घंटे में 120 से अधिक लोगों की एक्सरे स्क्रीनिंग की जा सकती है। एक्सरे में संदिग्ध पाए जाने वाले लोगों का बलगम सैंपल मौके पर ही लिया जाता है और जांच के बाद टीबी की पुष्टि होने पर उपचार शुरू कराया जाता है। उल्लेखनीय है कि एक से 28 सितंबर तक एआई बेस्ड मशीन से हुई स्क्रीनिंग के जरिये 470 टीबी मरीजों की पहचान की गई है।

ऐसे बदल गई जांच की प्रक्रिया
पहले : लक्षणों की पहचान → सीएचसी/अस्पताल भेजना → एक्सरे → रिपोर्ट का इंतजार → संदिग्ध मिलने पर बलगम जांच → पुष्टि के बाद उपचार

अब : शिविर में स्क्रीनिंग → मौके पर पोर्टेबल एक्सरे → एआई से तत्काल विश्लेषण → संदिग्ध की पहचान → बलगम सैंपल → जांच के बाद उपचार
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