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अदाकारा सुष्मिता मुखर्जी ने नाट्य मंचन को बताया सशक्त माध्यम
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Tue, 17 Oct 2017 12:45 AM IST
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entertainment news
- फोटो : amar ujala
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फिल्म और टीवी अदाकारा सुष्मिता मुखर्जी का मानना है कि शानदार अभिनय से नाटक को जीवंत बनाया जा सकता है। बुंदेली सिनेमा और राजकीय संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नाट्य कार्यशाला में हिस्सा लेने आईं मुखर्जी अमर उजाला से बातचीत कर रही थीं।
फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में 34 वर्षों से अपने सशक्त अभिनय का लोहा मनवाने वाली सुष्मिता मुखर्जी का कहना है कि नाट्य मंचन वह सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा कलाकार अपनी बात रख सकता है। नाटक द्वारा सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार हमेशा होता रहा है। कलाकारों को चाहिए कि वे अपना इस्तेमाल राजनेताओें के हाथों न होने दें। कलाकार का काम समाज को स्वस्थ रखना है। कलाकार अपने अभिनय से नाटक में जान डाल दें। वरिष्ठ कलाकारों को चाहिए कि वह नए कलाकारों को नाटक और फिल्मों के निर्माण के बारे में टिप्स दें और उन्हें अवसर प्रदान कराएं।
सुष्मिता ने कहा कि बुंदेलखंड की जमीन से जुडे़ कलाकार फिल्मों और टेलीविजन में अपनी प्रतिभा को लगातार साबित कर रहे हैं। उनके अनुसार उनका पहला नाटक 16 वर्ष की उम्र में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। सीरियल करमचंद जासूस में किटी के रोल ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलाई। उन्होंने कहा कि कलाकार अपनी क्षमता पहचानें। मुख्य किरदार नाटक अथवा फिल्मों में इसके लिए निरंतर अभ्यास करना चाहिए, निश्चित ही उनको लक्ष्य प्राप्त होगा।
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सुष्मिता ने दिए टिप्स
राजकीय संग्रहालय के सभागार में आयोजित नाट्य कार्यशाला में सुष्मिता मुखर्जी ने प्रशिक्षण ले रहे नए कलाकारोें को कई टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि लंबे डायलॉग याद करने के लिए निरंतर अभ्यास और ध्यान की जरूरत है। रंगमंच एक सामूहिक कर्म है, जिसमें सभी कलाकारों की भूमिका रहती है। शरीर एक एक्टर है, जिससे जो काम कराएं, वह करता है। प्रतिभागियों के सवाल पर उन्होंने बताया कि आज का दौर टेक्नोलॉजी का है, जिसके माध्यम से कलाकार अपना लक्ष्य और प्रतिभा साबित कर सकते हैं। छोटी-छोटी फिल्में बनाएं, जिन्हें देखने के लिए दर्शक बहुत हैं। मुुंबई में ऑडीशन के वक्त सावधानी से फिल्म निर्माण कंपनी का बैकग्राउंड जानें और उसके बारे में जानकारी लें। कार्यशाला में एनएसडी के प्रोफेसर मनोहर कौशलानी ने भी नए कलाकारों को टिप्स दिए। इस अवसर पर बुंदेली सिनेमा के वरिष्ठ कलाकारों में देवदत्त बुधौलिया, आरिफ शहडोली, समीर खान, दिनेश जैन, भूपेश यादव, शिवम यादव मौजूद रहे।
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फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में 34 वर्षों से अपने सशक्त अभिनय का लोहा मनवाने वाली सुष्मिता मुखर्जी का कहना है कि नाट्य मंचन वह सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा कलाकार अपनी बात रख सकता है। नाटक द्वारा सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार हमेशा होता रहा है। कलाकारों को चाहिए कि वे अपना इस्तेमाल राजनेताओें के हाथों न होने दें। कलाकार का काम समाज को स्वस्थ रखना है। कलाकार अपने अभिनय से नाटक में जान डाल दें। वरिष्ठ कलाकारों को चाहिए कि वह नए कलाकारों को नाटक और फिल्मों के निर्माण के बारे में टिप्स दें और उन्हें अवसर प्रदान कराएं।
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सुष्मिता ने कहा कि बुंदेलखंड की जमीन से जुडे़ कलाकार फिल्मों और टेलीविजन में अपनी प्रतिभा को लगातार साबित कर रहे हैं। उनके अनुसार उनका पहला नाटक 16 वर्ष की उम्र में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। सीरियल करमचंद जासूस में किटी के रोल ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलाई। उन्होंने कहा कि कलाकार अपनी क्षमता पहचानें। मुख्य किरदार नाटक अथवा फिल्मों में इसके लिए निरंतर अभ्यास करना चाहिए, निश्चित ही उनको लक्ष्य प्राप्त होगा।
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सुष्मिता ने दिए टिप्स
राजकीय संग्रहालय के सभागार में आयोजित नाट्य कार्यशाला में सुष्मिता मुखर्जी ने प्रशिक्षण ले रहे नए कलाकारोें को कई टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि लंबे डायलॉग याद करने के लिए निरंतर अभ्यास और ध्यान की जरूरत है। रंगमंच एक सामूहिक कर्म है, जिसमें सभी कलाकारों की भूमिका रहती है। शरीर एक एक्टर है, जिससे जो काम कराएं, वह करता है। प्रतिभागियों के सवाल पर उन्होंने बताया कि आज का दौर टेक्नोलॉजी का है, जिसके माध्यम से कलाकार अपना लक्ष्य और प्रतिभा साबित कर सकते हैं। छोटी-छोटी फिल्में बनाएं, जिन्हें देखने के लिए दर्शक बहुत हैं। मुुंबई में ऑडीशन के वक्त सावधानी से फिल्म निर्माण कंपनी का बैकग्राउंड जानें और उसके बारे में जानकारी लें। कार्यशाला में एनएसडी के प्रोफेसर मनोहर कौशलानी ने भी नए कलाकारों को टिप्स दिए। इस अवसर पर बुंदेली सिनेमा के वरिष्ठ कलाकारों में देवदत्त बुधौलिया, आरिफ शहडोली, समीर खान, दिनेश जैन, भूपेश यादव, शिवम यादव मौजूद रहे।