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Jhansi News: गैर इरादतन हत्या में तीन साल जेल काटने के बाद हुआ दोषमुक्त

Wed, 24 Sep 2025 02:10 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Sep 2025 02:10 AM IST
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Acquitted after serving three years in jail for culpable homicide
झांसी। गैर इरादतन हत्या के मामले में तीन साल जेल काटने के बाद न्यायालय ने आरोपों से बरी कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलेश कच्छल की अदालत ने उपलब्ध कराए गए साक्ष्य को अविश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपी राजू गरीबी के कारण अपनी पैरवी में असमर्थ था। अपर न्यायाधीश शरद चौधरी ने उसके बचाव के लिए जिला मुख्य बचाव अधिवक्ता प्रतीक समाधिया को नियुक्त किया था।
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तीन वर्ष पहले मऊरानीपुर के गोपालगंज मोहल्ला निवासी किशनलाल ने अपने सगे भाई राजू पर मां पार्वती की हत्या करने का आरोप लगाया था। राजू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। किशनलाल ने बताया था कि वह और उसका भाई राजू मां के साथ एक ही मकान में रहते थे। राजू शराब पीने के लिए मां से पैसे मांगता था। 28 अगस्त 2022 को पैसे देने से मना करने पर लात घूसों से पीटकर राजू ने मां की हत्या कर दी। आरोप साबित करने के लिए किशनलाल ने खुद को और पत्नी चंपा व मोहल्ले के विक्की खटीक को गवाह के रूप में पेश किया था।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि किशनलाल ने राजू के ऊपर रंजिश के चलते मुकदमा लिखाया था। पत्रावली पर मौजूद सबूत से साबित हुआ कि पार्वती के शव का पंचनामा भरते समय उसकी मृत्यु की सूचना अस्पताल के वार्ड ब्वॉय ने दी थी और राजू व किशनलाल दोनों ही अस्पताल में मौजूद थे। उस समय किशनलाल ने मां की मौत का कारण ब्रेन हैमरेज से होना बताया था।
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मृत्यु के दो दिन बाद थाने में जाकर मौत का कारण मारपीट बताते हुए राजू के खिलाफ मुकदमा लिखाया था। जिरह के दौरान किशनलाल ने यह बात स्वीकार की थी कि राजू से पेंशन के पैसों को लेकर उसका विवाद था। किशनलाल की पत्नी चंपा ने घटना का विवरण अलग बताया था, जबकि विक्की खटीक ने किसी भी प्रकार की मारपीट की घटना से इन्कार कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी चोट या फ्रैक्चर नहीं पाया गया था।

न्यायालय ने यह भी पाया कि गवाहों ने स्वयं को घटना के समय मौजूद होना बताया, फिर भी सगी मां को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। जबकि, अभियुक्त के पास कोई घातक हथियार भी नहीं था। पुलिस ने भी ठीक से जांच नहीं की और झूठे साक्ष्य के आधार पर आरोपपत्र भेज दिया। इन्हीं सब आधार पर न्यायालय ने गवाहों को अविश्वसनीय मानते हुए अभियुक्त राजू को बरी कर दिया।
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