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Jhansi News: छोटी सी बात से शुरू हुई अदावत ने छह साल में ले ली दो जान
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। दिन-21 नवंबर 2019। भोजला गांव में प्रधान रिंकू यादव की ओर से गांव में नई सीसी रोड डलवाई जा रही थी। प्रधान के पड़ोस में ही बेताली यादव अपने बेटे जमुना, गंगा, देशराज एवं भगवती के साथ रहते थे। उनका पोता अर्जुन नई सीसी सड़क पर पैदल चला गया। नई सड़क पर उसके पांव के निशान बन गए। यह बात ग्राम प्रधान रिंकू को बुरी लगी। उनके पक्ष के लोगों ने अर्जुन को गालियां बकते हुए चार-छह थप्पड़ रसीद दिए। इसका पता चलने पर अर्जुन के परिजन शिकायत लेकर प्रधान के घर जा पहुंचे। इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। गाली गलौज के साथ मारपीट हुई। इसी दौरान गोली चल जाने से प्रधान रिंकू के चाचा मुन्ना की मौत हो गई। इस मामले में अर्जुन, रज्जन, विशाल, अवधेश, अरविंद, नरेश, रामकुमार, नवल, अम्मो उर्फ आनंद, संदीप व रवि को जेल भेज दिया गया।
इस घटना के बाद से दोनों परिवार में अदावत छिड़ गई। अक्सर दोनों पक्ष में विवाद होने लगा। मुन्ना की हत्या के कुछ माह बाद भगवती का बड़ा बेटा नरेश रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गया। उसे लापता करने का आरोप ग्राम प्रधान पक्ष पर लगा। बेताली पक्ष ने रिंकू पर हत्या करके लाश फेंक देने का आरोप लगाया। पुसिल में शिकायत दर्ज कराई। छह साल बाद भी उसका पता नहीं चल सका हालांकि उसका मोबाइल रक्सा के परासरी गांव के जंगल से बरामद हो गया था।
अब उसके बाद नरेश के छोटे भाई अरविंद की भी हत्या हो गई। अरविंद का 14 साल का एक बेटा दिलीप है। वो पढ़ता है। मुन्ना की हत्या के बाद से ही अरविंद गांव के बाहर भरारी फार्म हाउस के पास रहने लगा था वहीं, अरविंद की हत्या के बाद उसके परिवार के लोगों के पलटवार करने की आशंका पुलिस को भी सता रही है।
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नसेट
... पुलिस जेल भेज देती तब बच जाती अरविंद की जान
जानलेवा हमले में वांछित था अरविंद, गिरफ्तार नहीं कर सकी पुलिस, डेढ़ माह पहले दोनों पक्षों में हो चुका विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। करीब डेढ़ माह पहले भी दोनों पक्षों के बीच भिड़ंत हो चुकी। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने अरविंद समेत उसके छह परिजनों के खिलाफ जानलेवा हमले के आरोप में रिपोर्ट भी दर्ज की थी। पुलिस अगर अरविंद को गिरफ्तार करके जेल भेज देती, तब शायद उसकी जान आज बच जाती।
27 जुलाई को कोतवाली में विपक्षी बान सिंह के पुत्र अजीत ने जानलेवा हमला करने के आरोप में अरविंद समेत उसके चचेरे भाई अर्जुन यादव, विशाल, आकाश, रवि एवं अवधेश के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों पक्षों के बीच पंचवटी इलाके में मारपीट हुई थी। अजीत एवं मिथुन का कहना था कि वह अपने चाचा मुन्ना की हत्या के गवाह हैं। अरविंद अपने परिजनों के साथ उसकी हत्या करना चाहता है। अजीत की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करके पुलिस अरविंद को तलाश रही थी। कोतवाली पुलिस ने गांव में दबिश भी दी लेकिन, वहां से अरविंद भाग गया। इसके बाद से वह पुलिस के हाथ नहीं आया। उसे राजनैतिक संरक्षण भी हासिल था। इस वजह से भी पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। अगर पुलिस अरविंद को गिरफ्तार करके जेल भेज देती, तब शायद उसकी जान बच जाती।
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झांसी। दिन-21 नवंबर 2019। भोजला गांव में प्रधान रिंकू यादव की ओर से गांव में नई सीसी रोड डलवाई जा रही थी। प्रधान के पड़ोस में ही बेताली यादव अपने बेटे जमुना, गंगा, देशराज एवं भगवती के साथ रहते थे। उनका पोता अर्जुन नई सीसी सड़क पर पैदल चला गया। नई सड़क पर उसके पांव के निशान बन गए। यह बात ग्राम प्रधान रिंकू को बुरी लगी। उनके पक्ष के लोगों ने अर्जुन को गालियां बकते हुए चार-छह थप्पड़ रसीद दिए। इसका पता चलने पर अर्जुन के परिजन शिकायत लेकर प्रधान के घर जा पहुंचे। इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। गाली गलौज के साथ मारपीट हुई। इसी दौरान गोली चल जाने से प्रधान रिंकू के चाचा मुन्ना की मौत हो गई। इस मामले में अर्जुन, रज्जन, विशाल, अवधेश, अरविंद, नरेश, रामकुमार, नवल, अम्मो उर्फ आनंद, संदीप व रवि को जेल भेज दिया गया।
इस घटना के बाद से दोनों परिवार में अदावत छिड़ गई। अक्सर दोनों पक्ष में विवाद होने लगा। मुन्ना की हत्या के कुछ माह बाद भगवती का बड़ा बेटा नरेश रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गया। उसे लापता करने का आरोप ग्राम प्रधान पक्ष पर लगा। बेताली पक्ष ने रिंकू पर हत्या करके लाश फेंक देने का आरोप लगाया। पुसिल में शिकायत दर्ज कराई। छह साल बाद भी उसका पता नहीं चल सका हालांकि उसका मोबाइल रक्सा के परासरी गांव के जंगल से बरामद हो गया था।
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अब उसके बाद नरेश के छोटे भाई अरविंद की भी हत्या हो गई। अरविंद का 14 साल का एक बेटा दिलीप है। वो पढ़ता है। मुन्ना की हत्या के बाद से ही अरविंद गांव के बाहर भरारी फार्म हाउस के पास रहने लगा था वहीं, अरविंद की हत्या के बाद उसके परिवार के लोगों के पलटवार करने की आशंका पुलिस को भी सता रही है।
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... पुलिस जेल भेज देती तब बच जाती अरविंद की जान
जानलेवा हमले में वांछित था अरविंद, गिरफ्तार नहीं कर सकी पुलिस, डेढ़ माह पहले दोनों पक्षों में हो चुका विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। करीब डेढ़ माह पहले भी दोनों पक्षों के बीच भिड़ंत हो चुकी। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने अरविंद समेत उसके छह परिजनों के खिलाफ जानलेवा हमले के आरोप में रिपोर्ट भी दर्ज की थी। पुलिस अगर अरविंद को गिरफ्तार करके जेल भेज देती, तब शायद उसकी जान आज बच जाती।
27 जुलाई को कोतवाली में विपक्षी बान सिंह के पुत्र अजीत ने जानलेवा हमला करने के आरोप में अरविंद समेत उसके चचेरे भाई अर्जुन यादव, विशाल, आकाश, रवि एवं अवधेश के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों पक्षों के बीच पंचवटी इलाके में मारपीट हुई थी। अजीत एवं मिथुन का कहना था कि वह अपने चाचा मुन्ना की हत्या के गवाह हैं। अरविंद अपने परिजनों के साथ उसकी हत्या करना चाहता है। अजीत की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करके पुलिस अरविंद को तलाश रही थी। कोतवाली पुलिस ने गांव में दबिश भी दी लेकिन, वहां से अरविंद भाग गया। इसके बाद से वह पुलिस के हाथ नहीं आया। उसे राजनैतिक संरक्षण भी हासिल था। इस वजह से भी पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। अगर पुलिस अरविंद को गिरफ्तार करके जेल भेज देती, तब शायद उसकी जान बच जाती।