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अराजकता को अब सहन नहीं करेंगे: ह्रदयनारायण-Dehat
Updated Sun, 18 Jun 2017 07:31 PM IST
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अब अराजकता सहन नहीं करेंगे: ह्रदयनारायण
सब हेड: महारानी के बलिदान दिवस पर बोले, अब ग्रह, नक्षत्र बदल गए हैं
- सांसद शिव प्रताप बोले, वीरांगना के गीत सुनाते नहीं, जगाते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि देश के इतिहास बोध पर तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं। अब ग्रह और रक्षत्र बदल गए हैं, इसलिए यदि कोई तर्क के साथ बहस करेगा, तो उसका स्वागत है। अराजकता के साथ आएगा, तो सहन नहीं किया जाएगा। अगर यह असहिष्णुवाद है, तो मुझे परेशानी नहीं है।
विधानसभा अध्यक्ष ने जहां गुदगुदाने वाले संस्मरण सुनाए, वहीं देश की अखंडता को क्षति पहुंचाने वालों को आगाह किया। कहा कि इतिहास में 1857 अहम स्थान रखता है, जो कि आगे तक स्मरणीय है। जिस कौम, सभ्यता, संस्कृति के पास परिपूर्ण इतिहास नहीं होता, वह राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता है। बोले कि यूरोप के विद्वानों ने भारत को कभी राष्ट्र नहीं माना। भारत पर आरोप लगाते हैं कि यहां इतिहास संजोया नहीं जाता। बल्कि, पुराणों से काम चलाते हैं और पुराणों में इतिहास नहीं है। उदाहरण देते हुए कहा कि पॉजीटर ने माना है कि पुराणों में इतिहास है। वीरांगना लक्ष्मीबाई पर बोले कि जब उदास बैठे होते हैं, तो रानी से खुद को जोड़ने पर पराक्रम आ जाता है। विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वीरांगना के गीत सुनाते नहीं, जगाते हैं। उत्तर प्रदेश बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने बुंदेली गीत से अतिथियों का स्वागत किया। मेयर किरण वर्मा ने कहा कि रानी ने ही नारी शक्ति की स्थापना की थी। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि आज इतिहास बोध दूषित हो गया है। समाज में भारतीय संस्कृति को ले जाने का प्रयास विश्वविद्यालय करेंगे। विधायक सिद्धार्थनगर ने कहा कि ऐसी अवधारणा थी कि हममें अन्याय के प्रति प्रतिकार की शक्ति नहीं है। 1857 के युद्ध ने इस अवधारणा को तोड़ दिया। कवि पन्नालाल असर ने बुंदेली गीत प्रस्तुत किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामदीन शर्मा, सत्यदेव तिवारी और किशनलाल खन्ना को शॉल, श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर भाजपा विधायक बिहारी लाल आर्य, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, मूलचंद्र निरंजन, गौरी शंकर वर्मा, रामरतन कुशवाहा, कुलसचिव वीएन सिंह, आचार्य हरिओम पाठक, बिशप पीटर परापुलिल, ज्ञानी महेंद्र सिंह, प्रो. रोचना श्रीवास्तव, प्रो. सुनील काबिया, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. बाबूलाल तिवारी, डॉ. यशोधरा शर्मा, डॉ. प्रतीक अग्रवाल मौजूद रहे।
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ह्रदयनारायण का सम्मान
बुंदेलखंड स्ववित्त पोषित कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रवण द्विवेदी के नेतृत्व में महाविद्यालय के प्रबंधकों ने विधानसभा अध्यक्ष ह्रदयनारायण दीक्षित का सम्मान किया।
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अब अराजकता सहन नहीं करेंगे: ह्रदयनारायण
सब हेड: महारानी के बलिदान दिवस पर बोले, अब ग्रह, नक्षत्र बदल गए हैं
- सांसद शिव प्रताप बोले, वीरांगना के गीत सुनाते नहीं, जगाते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि देश के इतिहास बोध पर तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं। अब ग्रह और रक्षत्र बदल गए हैं, इसलिए यदि कोई तर्क के साथ बहस करेगा, तो उसका स्वागत है। अराजकता के साथ आएगा, तो सहन नहीं किया जाएगा। अगर यह असहिष्णुवाद है, तो मुझे परेशानी नहीं है।
विधानसभा अध्यक्ष ने जहां गुदगुदाने वाले संस्मरण सुनाए, वहीं देश की अखंडता को क्षति पहुंचाने वालों को आगाह किया। कहा कि इतिहास में 1857 अहम स्थान रखता है, जो कि आगे तक स्मरणीय है। जिस कौम, सभ्यता, संस्कृति के पास परिपूर्ण इतिहास नहीं होता, वह राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता है। बोले कि यूरोप के विद्वानों ने भारत को कभी राष्ट्र नहीं माना। भारत पर आरोप लगाते हैं कि यहां इतिहास संजोया नहीं जाता। बल्कि, पुराणों से काम चलाते हैं और पुराणों में इतिहास नहीं है। उदाहरण देते हुए कहा कि पॉजीटर ने माना है कि पुराणों में इतिहास है। वीरांगना लक्ष्मीबाई पर बोले कि जब उदास बैठे होते हैं, तो रानी से खुद को जोड़ने पर पराक्रम आ जाता है। विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वीरांगना के गीत सुनाते नहीं, जगाते हैं। उत्तर प्रदेश बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने बुंदेली गीत से अतिथियों का स्वागत किया। मेयर किरण वर्मा ने कहा कि रानी ने ही नारी शक्ति की स्थापना की थी। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि आज इतिहास बोध दूषित हो गया है। समाज में भारतीय संस्कृति को ले जाने का प्रयास विश्वविद्यालय करेंगे। विधायक सिद्धार्थनगर ने कहा कि ऐसी अवधारणा थी कि हममें अन्याय के प्रति प्रतिकार की शक्ति नहीं है। 1857 के युद्ध ने इस अवधारणा को तोड़ दिया। कवि पन्नालाल असर ने बुंदेली गीत प्रस्तुत किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामदीन शर्मा, सत्यदेव तिवारी और किशनलाल खन्ना को शॉल, श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर भाजपा विधायक बिहारी लाल आर्य, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, मूलचंद्र निरंजन, गौरी शंकर वर्मा, रामरतन कुशवाहा, कुलसचिव वीएन सिंह, आचार्य हरिओम पाठक, बिशप पीटर परापुलिल, ज्ञानी महेंद्र सिंह, प्रो. रोचना श्रीवास्तव, प्रो. सुनील काबिया, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. बाबूलाल तिवारी, डॉ. यशोधरा शर्मा, डॉ. प्रतीक अग्रवाल मौजूद रहे।
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ह्रदयनारायण का सम्मान
बुंदेलखंड स्ववित्त पोषित कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रवण द्विवेदी के नेतृत्व में महाविद्यालय के प्रबंधकों ने विधानसभा अध्यक्ष ह्रदयनारायण दीक्षित का सम्मान किया।
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