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घूमने निकली युवतियां बनीं बंधक
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घूमने निकली युवतियां बनीं बंधक
झांसी। डेढ़ साल पहले घर से घूमने के लिए निकलीं दो युवतियों को जम्मूतवी में एक व्यक्ति ने झांसे में रखकर बंधक बना लिया। दो दिन पहले वह मौका पाकर चंगुल से भाग निकलीं। ट्रेन में सफर के दौरान परिजनों को मोबाइल पर वापस आने की जानकारी दी। परिजनों की सूचना पर जीआरपी ने उनको झांसी में उतार लिया।
बृहस्पतिवार को दुर्ग जम्मूतवी एक्सप्रेस से झांसी में उतारी गईं छत्तीसगढ़ के धमता टिकरापाता निवासी युवतियों ने जीआरपी को बताया कि वह दोनों सहेलियां हैं। डेढ़ साल पहले वह घर से घूमने के लिए निकली थीं। वह जम्मूतवी कैसे पहुंच गईं, पता ही नहीं चला। पैसे खत्म होने पर वह मोबाइल की लीड बनाने वाली एक फैक्ट्री में काम करने लगीं। वहां उनकी मुलाकात छत्तीसगढ़ निवासी प्रहलाद से हो गई। उसने बताया कि वह दोनों उसके साथ बड़ी ब्रह्मा चलें। वहां पर और अच्छा काम दिला देगा। वह खुद राजमिस्त्री का काम करता है। मगर प्रहलाद ने उनको काम दिलाने की जगह बंधक बनाकर उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया। वह घर का सब काम करवाता था। दो दिन पहले मौका पाकर वह उसके घर से भाग निकलीं। जम्मूतवी दुर्ग एक्सप्रेस से वह अपने घर जा रही थीं। देर रात तक दोनों के परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा था।
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झांसी। डेढ़ साल पहले घर से घूमने के लिए निकलीं दो युवतियों को जम्मूतवी में एक व्यक्ति ने झांसे में रखकर बंधक बना लिया। दो दिन पहले वह मौका पाकर चंगुल से भाग निकलीं। ट्रेन में सफर के दौरान परिजनों को मोबाइल पर वापस आने की जानकारी दी। परिजनों की सूचना पर जीआरपी ने उनको झांसी में उतार लिया।
बृहस्पतिवार को दुर्ग जम्मूतवी एक्सप्रेस से झांसी में उतारी गईं छत्तीसगढ़ के धमता टिकरापाता निवासी युवतियों ने जीआरपी को बताया कि वह दोनों सहेलियां हैं। डेढ़ साल पहले वह घर से घूमने के लिए निकली थीं। वह जम्मूतवी कैसे पहुंच गईं, पता ही नहीं चला। पैसे खत्म होने पर वह मोबाइल की लीड बनाने वाली एक फैक्ट्री में काम करने लगीं। वहां उनकी मुलाकात छत्तीसगढ़ निवासी प्रहलाद से हो गई। उसने बताया कि वह दोनों उसके साथ बड़ी ब्रह्मा चलें। वहां पर और अच्छा काम दिला देगा। वह खुद राजमिस्त्री का काम करता है। मगर प्रहलाद ने उनको काम दिलाने की जगह बंधक बनाकर उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया। वह घर का सब काम करवाता था। दो दिन पहले मौका पाकर वह उसके घर से भाग निकलीं। जम्मूतवी दुर्ग एक्सप्रेस से वह अपने घर जा रही थीं। देर रात तक दोनों के परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा था।
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