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गुप्त नवरात्र-City
Updated Mon, 09 Jul 2018 10:48 PM IST
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पुष्य नक्षत्र में शुरू होंगे गुप्त नवरात्र
13 से 21 जुलाई तक तंत्र साधक करेंगे देवी मां की आराधना
सूर्य ग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव, मंदिरों के पट खुले रहेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस बार गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र में शुरू होंगे। 13 से शुरू होकर 21 जुलाई तक चलने वाले गुप्त नवरात्र तंत्र साधक देवी मां की आराधना करेंगे। 13 जुलाई को सूर्य ग्रहण भी रहेगा। लेकिन, ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। ऐसे में मंदिरों में सूतक नहीं रहेगा और पूजा पाठ विधिवत रूप से होंगे।
सनातन धर्म में शारदीय और चैत्र क ी नवरात्र के अलावा दो गुप्त नवरात्र भी मनाई जाती है। जो साधकों को आराधना के लिए अहम है। गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना भी होती है। इसके अलावा मंदिरों में अनुष्ठान भी होते है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक 13 जुलाई के दिन गुप्त नवरात्र सुबह 8:15 बजे से शुरू होगा। जबकि इससे पहले सुबह 8 बजे तक आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या रहेगी। नवरात्र पूरे नौ दिन यानि 21 जुलाई तक रहेंगे। इधर, आचार्य शांतनू पांडेय ने बताया कि इस बार गुप्त नवरात्र पुख्य नक्षत्र में शुरू होगी। इसमें देवी मां के गुप्त स्वरूप महाकाली, बंगलामुखी, धूमावती, मातंगी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी की पूजा व आराधना होती है। इनकी पूजा व घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 7:49 बजे से सुबह 10:01 बजे तक, इसके बाद दूसरा मुहूर्त दोपहर 2:44 बजे से शाम 4:22 बजे तक और तीसरा मुहूर्त रात 8:36 से रात 10:10 बजे तक रहेगा। उनके मुताबिक दूसरा गुप्त नवरात्र माघ के महीने में यानी अगले वर्ष पांच फरवरी से शुरू होगी।
चातुर्मास 23 से
सनातन धर्म में चातुर्मास 23 जुलाई से शुरू हो जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम को जाते है। इसके साथ ही समस्त मांगलिक कार्यक्रम देवोत्थान एकादशी तक थमें रहेंगे। इधर दिगंबर जैन पंचायत के महामंत्री प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म में चातुर्मास 27 जुलाई से शुरू होंगे। बरसात में उत्पन्न जीवों को क्षति न हो, इसके लिए साधू संत चार्तुमास के चार माह एक स्थान पर ठहर कर तप, साधना, स्वाध्याय करते है। जैन समाज में चातुर्मास का समापन दीपावली पर होता है।
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13 से 21 जुलाई तक तंत्र साधक करेंगे देवी मां की आराधना
सूर्य ग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव, मंदिरों के पट खुले रहेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस बार गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र में शुरू होंगे। 13 से शुरू होकर 21 जुलाई तक चलने वाले गुप्त नवरात्र तंत्र साधक देवी मां की आराधना करेंगे। 13 जुलाई को सूर्य ग्रहण भी रहेगा। लेकिन, ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। ऐसे में मंदिरों में सूतक नहीं रहेगा और पूजा पाठ विधिवत रूप से होंगे।
सनातन धर्म में शारदीय और चैत्र क ी नवरात्र के अलावा दो गुप्त नवरात्र भी मनाई जाती है। जो साधकों को आराधना के लिए अहम है। गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना भी होती है। इसके अलावा मंदिरों में अनुष्ठान भी होते है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक 13 जुलाई के दिन गुप्त नवरात्र सुबह 8:15 बजे से शुरू होगा। जबकि इससे पहले सुबह 8 बजे तक आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या रहेगी। नवरात्र पूरे नौ दिन यानि 21 जुलाई तक रहेंगे। इधर, आचार्य शांतनू पांडेय ने बताया कि इस बार गुप्त नवरात्र पुख्य नक्षत्र में शुरू होगी। इसमें देवी मां के गुप्त स्वरूप महाकाली, बंगलामुखी, धूमावती, मातंगी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी की पूजा व आराधना होती है। इनकी पूजा व घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 7:49 बजे से सुबह 10:01 बजे तक, इसके बाद दूसरा मुहूर्त दोपहर 2:44 बजे से शाम 4:22 बजे तक और तीसरा मुहूर्त रात 8:36 से रात 10:10 बजे तक रहेगा। उनके मुताबिक दूसरा गुप्त नवरात्र माघ के महीने में यानी अगले वर्ष पांच फरवरी से शुरू होगी।
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चातुर्मास 23 से
सनातन धर्म में चातुर्मास 23 जुलाई से शुरू हो जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम को जाते है। इसके साथ ही समस्त मांगलिक कार्यक्रम देवोत्थान एकादशी तक थमें रहेंगे। इधर दिगंबर जैन पंचायत के महामंत्री प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म में चातुर्मास 27 जुलाई से शुरू होंगे। बरसात में उत्पन्न जीवों को क्षति न हो, इसके लिए साधू संत चार्तुमास के चार माह एक स्थान पर ठहर कर तप, साधना, स्वाध्याय करते है। जैन समाज में चातुर्मास का समापन दीपावली पर होता है।
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