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ललितपुर बजाज पावर प्लांट की 660 मेगावाट की एक इकाई बंद, गहराया संकट
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झांसी। तकनीकी खराबी के कारण ललितपुर के बजाज पावर प्लांट की एक यूनिट बंद हो गई है, जिससे 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। वहीं, पारीछा पावर प्लांट में भी कोयले की कमी चल रही है, जिससे कारण प्लांट से प्रतिदिन 920 मेगावाट की जगह सिर्फ 520 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। प्लांट के स्टॉक में सिर्फ एक दिन का 10 से 15 हजार ही मीट्रिक टन कोयला बचा हुआ है। जल्द कोयले की आपूर्ति नहीं हुई, तो बिजली का संकट गहरा सकता है।
ललितपुर बजाज पावर प्लांट के वाइस प्रेसीडेंट राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि प्लांट की 660-660 मेगावाट की तीन इकाइयों से 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। बृहस्पतिवार को 660 मेगावाट की एक इकाई में तकनीकी खराबी आ गई जिसके कारण इसको बंद कर दिया गया है। इससे प्लांट में अब सिर्फ 1320 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। बताया कि प्लांट में स्टॉक में सिर्फ डेढ़ दिन का कोयला बचा हुआ है। वहीं, पारीछा थर्मल पावर प्लांट में भी कोयले की कमी चल रही है, जिसके कारण पारीछा थर्मल पावर प्लांट की चारों इकाइयों को कम क्षमता के साथ चलाकर सिर्फ 520 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। पिछले कई दिनों से पारीछा पावर प्लांट में 400 मेगावाट बिजली का कम उत्पादन किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि स्टॉक में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा हुआ है। प्रतिदिन दो रैक कोयले की मिलती हैं, जिनसे कम क्षमता में सभी यूनिटों को चलाकर बिजली का उत्पादन किया जाता है।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी के कारण चारों यूनिटों के बिजली उत्पादन में कमी आ गई है, इन सभी यूनिटों को कम क्षमता के साथ चलाकर इनसे 520 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। स्टॉक में भी कोयला सिर्फ 10 से 15 हजार मीट्रिक टन है, प्रतिदिन दो रैक मिलती है, उनकी खपत हो जाती है। - एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक पारीछा थर्मल पावर प्लांट
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ललितपुर बजाज पावर प्लांट के वाइस प्रेसीडेंट राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि प्लांट की 660-660 मेगावाट की तीन इकाइयों से 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। बृहस्पतिवार को 660 मेगावाट की एक इकाई में तकनीकी खराबी आ गई जिसके कारण इसको बंद कर दिया गया है। इससे प्लांट में अब सिर्फ 1320 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। बताया कि प्लांट में स्टॉक में सिर्फ डेढ़ दिन का कोयला बचा हुआ है। वहीं, पारीछा थर्मल पावर प्लांट में भी कोयले की कमी चल रही है, जिसके कारण पारीछा थर्मल पावर प्लांट की चारों इकाइयों को कम क्षमता के साथ चलाकर सिर्फ 520 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। पिछले कई दिनों से पारीछा पावर प्लांट में 400 मेगावाट बिजली का कम उत्पादन किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि स्टॉक में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा हुआ है। प्रतिदिन दो रैक कोयले की मिलती हैं, जिनसे कम क्षमता में सभी यूनिटों को चलाकर बिजली का उत्पादन किया जाता है।
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी के कारण चारों यूनिटों के बिजली उत्पादन में कमी आ गई है, इन सभी यूनिटों को कम क्षमता के साथ चलाकर इनसे 520 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। स्टॉक में भी कोयला सिर्फ 10 से 15 हजार मीट्रिक टन है, प्रतिदिन दो रैक मिलती है, उनकी खपत हो जाती है। - एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक पारीछा थर्मल पावर प्लांट
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