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सालों बाद झांसी ने तैराकी में जीता स्वर्ण
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जिया ने कई सालों बाद झांसी को दिलाया स्वर्ण पदक
झांसी। कई सालों बाद तैराकी में झांसी की बेटी जिया ने जनपद को पहले दिन दो स्वर्ण पदक दिलाकर राम रोशन किया। महज 11 साल की उम्र में राज्य स्तर पर मुकाम पाने वाली जिया का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की तरफ से खेलकर परिवार का नाम रोशन करें।
हंसारी के ग्वालटोली में रहने वाली जिया ने बरेली में होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पहले ही दिन अपना दबदबा कायम रखकर झांसी को दो स्वर्ण पदक दिलाए। तैराकी में सब जूनियर बालिका वर्ग अंडर-11 से प्रतिभाग करते हुए उन्होंने 50 मीटर बैक स्ट्रोक और 50 मीटर बटर फ्लाई में स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। जिया ने जिन दो कलाओं में स्वर्ण पाया है वह खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होती तथा उसके लिए लगातार प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
जिया ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें तैराकी का शौक है तथा तीन साल पहले समर कैंप वह प्रशिक्षण लेने पहुंची और तभी से इस क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने की ठान ली। उनका कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहतीं हैं। इसलिए, उनका प्रयास लगातार जारी रहेगा। वहीं, जिया के पिता विजय यादव ने बताया कि उनका मध्यम वर्ग का परिवार है। बेटी के अंदर छुपी इस प्रतिभा को और निखारने के लिए प्रयास शुरू कर दिए और हंसारी में एक प्राइवेट पूल पर वह कड़कड़ाती सर्दियों में भी प्रशिक्षण लेने पहुंचती है। ढाई साल से लगातार वह प्रशिक्षण ले रही है लेकिन, गर्मियों में अकसर स्टेडियम में स्थित तरणताल पर ही प्रशिक्षण लेना पसंद है। पिता ने बताया कि उनकी बेटी तैराकी में ही नहीं बल्कि पढ़ने में भी अव्वल है और हाल ही में कक्षा चार में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। जिया की इस उपलब्धि पर प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर ने खिलाड़ी को बधाई दी। बताया कि कई सालों बाद जनपद को यह उपलब्धि मिली है।
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झांसी। कई सालों बाद तैराकी में झांसी की बेटी जिया ने जनपद को पहले दिन दो स्वर्ण पदक दिलाकर राम रोशन किया। महज 11 साल की उम्र में राज्य स्तर पर मुकाम पाने वाली जिया का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की तरफ से खेलकर परिवार का नाम रोशन करें।
हंसारी के ग्वालटोली में रहने वाली जिया ने बरेली में होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पहले ही दिन अपना दबदबा कायम रखकर झांसी को दो स्वर्ण पदक दिलाए। तैराकी में सब जूनियर बालिका वर्ग अंडर-11 से प्रतिभाग करते हुए उन्होंने 50 मीटर बैक स्ट्रोक और 50 मीटर बटर फ्लाई में स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। जिया ने जिन दो कलाओं में स्वर्ण पाया है वह खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होती तथा उसके लिए लगातार प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
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जिया ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें तैराकी का शौक है तथा तीन साल पहले समर कैंप वह प्रशिक्षण लेने पहुंची और तभी से इस क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने की ठान ली। उनका कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहतीं हैं। इसलिए, उनका प्रयास लगातार जारी रहेगा। वहीं, जिया के पिता विजय यादव ने बताया कि उनका मध्यम वर्ग का परिवार है। बेटी के अंदर छुपी इस प्रतिभा को और निखारने के लिए प्रयास शुरू कर दिए और हंसारी में एक प्राइवेट पूल पर वह कड़कड़ाती सर्दियों में भी प्रशिक्षण लेने पहुंचती है। ढाई साल से लगातार वह प्रशिक्षण ले रही है लेकिन, गर्मियों में अकसर स्टेडियम में स्थित तरणताल पर ही प्रशिक्षण लेना पसंद है। पिता ने बताया कि उनकी बेटी तैराकी में ही नहीं बल्कि पढ़ने में भी अव्वल है और हाल ही में कक्षा चार में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। जिया की इस उपलब्धि पर प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर ने खिलाड़ी को बधाई दी। बताया कि कई सालों बाद जनपद को यह उपलब्धि मिली है।
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