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ई-वे बिल प्रणाली शुरू, कार्रवाई में अभी राहत
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:28 AM IST
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ई-वे बिल प्रणाली शुरू, कार्रवाई में अभी राहत
ललितपुर। वाणिज्य कर विभाग द्वारा प्रदेश या प्रदेश से बाहर माल परिवहन के लिए ई-वे बिल प्रणाली लागू कर दी गई है। बृहस्पतिवार से उक्त व्यवस्था के लिए कारोबारियों द्वारा परिवहन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, साथ ही विभाग में भी इसका पंजीकरण कराया जा सकेगा। आगामी समय में ई-वे बिल दिखाने पर ही माल का परिवहन किया जा सकेगा। ई-वे बिल नहीं दिखाने पर जुर्माना और सीज का प्रावधान किया गया है। इस प्रक्रिया में ई-वे बिल 01, ई-वे बिल 02, व ई-वे बिल 03 एवं टीडीएफ-01 रखना आवश्यक कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अनुरूप करापवंचन के उद्देश्य से बिना उचित या निर्धारित प्रपत्रों के माल परिवहन किए जाने की स्थिति में माल एवं वाहन को सीज किए जाने की व्यवस्था धारा-129 के तहत कर दी गई है। जीएसटी एक नई व्यवस्था है। इस प्रक्रिया में बहती को पूर्व की तरह ही यथावत रखा गया है। फिलहाल यह व्यवस्था पूर्व में जारी व्यवस्था का सुधरा हुआ रूप है। इसके लागू होने में फिलहाल कुछ समय लगना संभावित है। इस संबंध में वाणिज्य कर के कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने निर्देश दिया है कि सचल दल इकाइयों द्वारा रुटीन जांच कार्य नहीं किया जाएगा, लेकिन सूचना आधारित जांच नियंत्रक ज्वाइंट कमिश्नर के निर्देश पर की जाएगी। पचास हजार रुपये से कम के माल के परिवहन की कोई जांच नहीं जाएगी और पचास हजार से कम मूल्य के माल का परिवहन यदि बिना ई-वे बिल के किया जाएगा, तो भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। पचास हजार रुपए से अधिक के माल परिवहन के लिए ई-वे बिल-01 दिखाना आवश्यक होगा। यदि ई-वे बिल नहीं होगा, तो शुरुआत में इसे डाउनलोड कराया जाएगा और ई-वे बिल डाउन लोड होने पर अग्रिम कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रदेश में मैंथा, सुपारी, आयरन और स्टील व ईटेबिल ऑयल का परिवहन करने के लिए ई-वे बिल-02 लगाना होगा। प्रदेश में ई-कॉमर्स ऑपरेटरों या उनके द्वारा अधिकृत कॉरियर अभिकर्ताओं से माल परिवहन कराने पर ई-वे बिल-03 लगाना होगा। प्रदेश की सीमा से पचास हजार या इससे अधिक का माल परिवहन करने पर टीडीएफ-1 फार्म जेनरेट करना होगा। किसी के द्वारा पचास हजार रुपए से कम मूल्य के निजी सामान का परिवहन करने पर ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन उसे इसके खरीद संबंधी कागजात दिखाने होंगे।
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पंजीकरण प्रक्रिया
माल परिवहन के लिए ई-वे बिल प्रणाली के लिए व्यापारियों को ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा, जो तीन पैरा में होगा। इसमें जीएसटी गुड्स, नॉन जीएसटी गुड्स और बिना पंजीकृत डीलर को शामिल किया गया है। इसमें आईडी और पासवर्ड मोबाइल या ईमेल पर उपलब्ध हो जाएगा। फिर लॉग इन करने पर यह ई-वे बिल डाउन हो जाएगा। ई-वे बिल के लिए व्यापारी चाहें तो विभाग में भी पंजीकरण करा सकेगा, जिसके लिए उसे जीएसटीएन नंबर के साथ मोबाइल नंबर और मेल आईडी बतानी होगी।
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जुर्माना व सीज का प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति सेवाकर अधिनियम या नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन कर माल का परिवहन या परिवहन के दौरान माल का भंडारण करते पाया गया तो ऐसे माल व ऐसे माल के परिवहन के लिए प्रयुक्त परिवहन का साधन यानि वह वाहन एवं माल से संबंधित प्रपत्रों का सीज कर दिया जाएगा। साथ ही माल एवं वाहन के डिटेंशन या अभिग्रहण के पश्चात देयकर एवं देयकर के सौ प्रतिशत के बराबर अर्थदंड की धनराशि जमा कराकर अवमुक्त की जाएगी। माल स्वामी के सामने न आने पर देयकर एवं माल के मूल्य के पचास प्रतिशत के बराबर अर्थदंड की राशि जमा कराकर अवमुक्त किया जाएगा।
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ललितपुर। वाणिज्य कर विभाग द्वारा प्रदेश या प्रदेश से बाहर माल परिवहन के लिए ई-वे बिल प्रणाली लागू कर दी गई है। बृहस्पतिवार से उक्त व्यवस्था के लिए कारोबारियों द्वारा परिवहन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, साथ ही विभाग में भी इसका पंजीकरण कराया जा सकेगा। आगामी समय में ई-वे बिल दिखाने पर ही माल का परिवहन किया जा सकेगा। ई-वे बिल नहीं दिखाने पर जुर्माना और सीज का प्रावधान किया गया है। इस प्रक्रिया में ई-वे बिल 01, ई-वे बिल 02, व ई-वे बिल 03 एवं टीडीएफ-01 रखना आवश्यक कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अनुरूप करापवंचन के उद्देश्य से बिना उचित या निर्धारित प्रपत्रों के माल परिवहन किए जाने की स्थिति में माल एवं वाहन को सीज किए जाने की व्यवस्था धारा-129 के तहत कर दी गई है। जीएसटी एक नई व्यवस्था है। इस प्रक्रिया में बहती को पूर्व की तरह ही यथावत रखा गया है। फिलहाल यह व्यवस्था पूर्व में जारी व्यवस्था का सुधरा हुआ रूप है। इसके लागू होने में फिलहाल कुछ समय लगना संभावित है। इस संबंध में वाणिज्य कर के कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने निर्देश दिया है कि सचल दल इकाइयों द्वारा रुटीन जांच कार्य नहीं किया जाएगा, लेकिन सूचना आधारित जांच नियंत्रक ज्वाइंट कमिश्नर के निर्देश पर की जाएगी। पचास हजार रुपये से कम के माल के परिवहन की कोई जांच नहीं जाएगी और पचास हजार से कम मूल्य के माल का परिवहन यदि बिना ई-वे बिल के किया जाएगा, तो भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। पचास हजार रुपए से अधिक के माल परिवहन के लिए ई-वे बिल-01 दिखाना आवश्यक होगा। यदि ई-वे बिल नहीं होगा, तो शुरुआत में इसे डाउनलोड कराया जाएगा और ई-वे बिल डाउन लोड होने पर अग्रिम कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रदेश में मैंथा, सुपारी, आयरन और स्टील व ईटेबिल ऑयल का परिवहन करने के लिए ई-वे बिल-02 लगाना होगा। प्रदेश में ई-कॉमर्स ऑपरेटरों या उनके द्वारा अधिकृत कॉरियर अभिकर्ताओं से माल परिवहन कराने पर ई-वे बिल-03 लगाना होगा। प्रदेश की सीमा से पचास हजार या इससे अधिक का माल परिवहन करने पर टीडीएफ-1 फार्म जेनरेट करना होगा। किसी के द्वारा पचास हजार रुपए से कम मूल्य के निजी सामान का परिवहन करने पर ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन उसे इसके खरीद संबंधी कागजात दिखाने होंगे।
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पंजीकरण प्रक्रिया
माल परिवहन के लिए ई-वे बिल प्रणाली के लिए व्यापारियों को ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा, जो तीन पैरा में होगा। इसमें जीएसटी गुड्स, नॉन जीएसटी गुड्स और बिना पंजीकृत डीलर को शामिल किया गया है। इसमें आईडी और पासवर्ड मोबाइल या ईमेल पर उपलब्ध हो जाएगा। फिर लॉग इन करने पर यह ई-वे बिल डाउन हो जाएगा। ई-वे बिल के लिए व्यापारी चाहें तो विभाग में भी पंजीकरण करा सकेगा, जिसके लिए उसे जीएसटीएन नंबर के साथ मोबाइल नंबर और मेल आईडी बतानी होगी।
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यदि कोई व्यक्ति सेवाकर अधिनियम या नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन कर माल का परिवहन या परिवहन के दौरान माल का भंडारण करते पाया गया तो ऐसे माल व ऐसे माल के परिवहन के लिए प्रयुक्त परिवहन का साधन यानि वह वाहन एवं माल से संबंधित प्रपत्रों का सीज कर दिया जाएगा। साथ ही माल एवं वाहन के डिटेंशन या अभिग्रहण के पश्चात देयकर एवं देयकर के सौ प्रतिशत के बराबर अर्थदंड की धनराशि जमा कराकर अवमुक्त की जाएगी। माल स्वामी के सामने न आने पर देयकर एवं माल के मूल्य के पचास प्रतिशत के बराबर अर्थदंड की राशि जमा कराकर अवमुक्त किया जाएगा।