फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   ‘भगवान’ के ‘मंदिर’ में भी सुरक्षित नहीं जान -City

‘भगवान’ के ‘मंदिर’ में भी सुरक्षित नहीं जान -City

Sun, 16 Jul 2017 09:03 PM IST
Updated Sun, 16 Jul 2017 09:03 PM IST
विज्ञापन
‘भगवान’ के ‘मंदिर’ में भी सुरक्षित नहीं जान -City
फोटो..
विज्ञापन

धरती के ‘भगवान’ के ‘मंदिर’ में सुरक्षित नहीं जान
- झांसी मेडिकल कॉलेज नहीं आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम
- जिला अस्पताल की व्यवस्था ठीक पर बिल्डिंग में नहीं हैं रैंप
- केजीएमयू की घटना के बाद ‘अमर उजाला’ ने की पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
लखनऊ के केजीएमयू ट्रामा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद ‘अमर उजाला’ ने शहर के सरकारी अस्पतालों की पड़ताल की। एक ओर जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं तो काफी हद तक दुरुस्त मिलीं लेकिन महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखे। इससे स्पष्ट है कि अस्पताल में भी मरीजों की जान सुरक्षित नहीं है।
केजीएमयू में शनिवार देर रात शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद कई लोगों की मौत हो गई थी। घटना से अस्पताल के सुरक्षा इंतजामों की कलई खुल गई। मरीजों के जान की सुरक्षा के मद्देनजर जब जिला अस्पताल की पड़ताल की गई, तो यहां मानक के अनुसार 90 प्रतिशत अग्निशमन यंत्र लगे मिले। हालांकि, पुरुष वार्ड और बर्न यूनिट की नई बिल्डिंग से नीचे उतरने के लिए सिर्फ सीढ़ियां ही बनी हैं। इससे यदि दुर्भाग्यवश आग लग जाती है, तो स्ट्रेचर पर भर्ती मरीज को नहीं उतारा जा सकेगा। इसके लिए रैंप की आवश्यकता पड़ेगी। लगे हुए अग्निशमन यंत्रों की समाप्ति तिथि भी आगामी सितंबर है। मेडिकल कॉलेज की स्थिति तो बेहद चिंताजनक है। इमरजेंसी में ही 12 जगहों पर अग्निशमन यंत्र लगने का स्थान रिक्त है लेकिन केजीएमयू की घटना के बाद रविवार को सुबह ही पर्चा काउंटर के पास दो लगाए गए। जबकि, चार सिस्टर रूम में रखवाए गए। इसके अलावा इमरजेंसी की ओटी में एक लगा हुआ है। हर वार्ड में दो अग्निशमन यंत्र लगने चाहिए लेकिन कुछ वार्ड में एक तो कुछ में लगे भी नहीं हैं। इससे मरीजों की जान आग के हवाले है। यदि केजीएमयू जैसी घटना मेडिकल कॉलेज में होती है, तो कई जानें आफत में पड़ सकती हैं।
विज्ञापन


लगे हुए यंत्र कालातीत
एक अनुमान के अनुसार मेडिकल कॉलेज में 70 के आसपास अग्निशमन यंत्र लगे होने चाहिए। मौजूदा समय में सिर्फ 40 लगे हुए हैं। इसमें में लगभग सभी एक्सपायरी हो चुके हैं। इससे यंत्रों के लगे होने का कोई फायदा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


40 फीसदी तैयार फायर फाइटिंग सिस्टम
मेडिकल कॉलेज में फायर फाइटिंग सिस्टम लगने का काम चल रहा है। इसके जरिए वार्ड, ओटी, इमरजेंसी, ओपीडी व अन्य जगहों पर पतली पाइप लाइन डाली जा रही है। इसको ऑटोमेटिक सिस्टम से जोड़ा जाएगा, इसलिए यदि कोई आग लगने की घटना होगी तो तुरंत ही लाइनों से पानी गिरने लगेगा। इससे आग जल्द ही बुझ जाएगी। हालांकि, यह कम अभी 40 फीसदी ही पूरा हुआ है। लेबर रूम, ओपीडी, नेफ्रोलॉजी विभाग, वार्ड के बाहरी हिस्सा में पाइप लाइन लग चुकी है। ओटी, इमरजेंसी, वार्ड के अंदर लगनी है।

सिर्फ जिला अस्पताल में हुई मॉक ड्रिल
आग लगने की घटना के बाद इसको बुझाने के लिए स्टाफ व लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए फायर विभाग की मदद से मॉक ड्रिल कराना जरूरी होता है। ताकि, अग्निशमन यंत्र को चलाने संबंधी जानकारी मिल सके। जिला अस्पताल में डेढ़ माह पहले मॉक ड्रिल हुई थी लेकिन मेडिकल कॉलेज द्वारा अब तक नहीं कराई गई है।

सीएमएस बोले
.....................
पहले ही दे दिया ऑर्डर
अग्निशमन यंत्र कालातीत हो जाएं, इससे पहले ही इनको बदलने के लिए ऑर्डर दे रखा है। जिन बिल्डिंगों में मरीजों को निकलने के लिए रैंप नहीं हैं, उनका परीक्षण किया जा रहा है। जल्द ही इनका समाधान निकलवार रैंप बनवाए जाएंगे। - डॉ. बीके गुप्ता, सीएमएस, जिला अस्पताल।


शासन से मांगेंगे बजट
पिछले साल से अग्निशमन यंत्र के लिए बजट नहीं मिला है। सोमवार को ही शासन को पत्र लिखकर बजट मांगा जाएगा। अधिकांश जगहों पर अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। फायर फाइटिंग मशीन की जून में समीक्षा हुई है। सितंबर तक पूरी हो जाएगी। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed