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जमानत पर बाहर आने के बाद लापता हो गए 438 बदमाश लापता
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झांसी। पिछले दो साल के दौरान जमानत पर बाहर आए अपराधियों की तलाश में पुलिस को पसीना बहाना पड़ रहा है लेकिन, मंडल में 395 बदमाश ऐसे हैं, जो बाहर आने के बाद से लापता हो गए। थानेदार इनकी तलाश कर रहे हैं लेकिन, पुलिस इनकी लोकेशन ही नहीं तलाश पा रही है।
पिछले कुछ माह से मंडल में चोरी की घटनाओं में इजाफा हुआ। इसे देखते हुए डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने पिछले दो साल से आर्थिक मामलों में जेल गए अपराधियों के जमानत पर बाहर आने के बाद उनकी खोज-खबर के निर्देश तीनों जनपदों के कप्तानों को दिए थे। इसके बाद इनकी तलाश शुरू हुई। झांसी में सर्वाधिक 593 बदमाश जमानत पर छूटकर बाहर आए। पिछले करीब एक माह से पुलिस इनकी तलाश में पसीने बहा रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद बाद पुलिस 412 बदमाशों की तलाश कर सकी। बाकी के 181 बदमाशों के बारे में कुछ भी नहीं पता चल रहा।
नियमों की बात करें तब जेल से जमानत पर छूटने वाले अपराधियों के रिकॉर्ड उनके निवास वाले थानों में रखना अनिवार्य है। इसके लिए थाने पर बकायदा अलग से रजिस्टर बनाया जाता है लेकिन, हकीकत में अधिकांश थानों में यह रजिस्टर ही नहीं है। इसी वजह से अब पुलिस को यह बदमाश ढूंढे नहीं मिल रहे। ललितपुर में 171 बदमाशों ने पिछले दो साल के दौरान अपनी जमानत कराई। यहां तलाश करने पर 112 बदमाश ही पुलिस तलाश सकी। यहां भी 59 बदमाशों को पुलिस अब तक तलाश नहीं सकी। इनके बारे में उनके परिजन भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। इनमें कई हिस्ट्रीशीटर बदमाश भी हैं। जालौन में कुल 290 बदमाश जमानत कराकर बाहर आए लेकिन, सिर्फ पुलिस 135 बदमाशों की ही तलाश कर सकी। बाकी 155 बदमाशों के बारे में कुछ भी नहीं मालूम चल सका।
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इन सभी की तलाश कराई जा रही है। जमानत पर बाहर आने वाले सभी अपराधियों का रिकॉर्ड अनिवार्य तौर पर थाने पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पंद्रह दिन की डेडलाइन बढ़ाई गई है। उसके बाद सत्यापित किए गए अपराधियों की सूची भी परखी जाएगी। इसमें लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जोगेंद्र कुमार, डीआईजी
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पिछले कुछ माह से मंडल में चोरी की घटनाओं में इजाफा हुआ। इसे देखते हुए डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने पिछले दो साल से आर्थिक मामलों में जेल गए अपराधियों के जमानत पर बाहर आने के बाद उनकी खोज-खबर के निर्देश तीनों जनपदों के कप्तानों को दिए थे। इसके बाद इनकी तलाश शुरू हुई। झांसी में सर्वाधिक 593 बदमाश जमानत पर छूटकर बाहर आए। पिछले करीब एक माह से पुलिस इनकी तलाश में पसीने बहा रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद बाद पुलिस 412 बदमाशों की तलाश कर सकी। बाकी के 181 बदमाशों के बारे में कुछ भी नहीं पता चल रहा।
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नियमों की बात करें तब जेल से जमानत पर छूटने वाले अपराधियों के रिकॉर्ड उनके निवास वाले थानों में रखना अनिवार्य है। इसके लिए थाने पर बकायदा अलग से रजिस्टर बनाया जाता है लेकिन, हकीकत में अधिकांश थानों में यह रजिस्टर ही नहीं है। इसी वजह से अब पुलिस को यह बदमाश ढूंढे नहीं मिल रहे। ललितपुर में 171 बदमाशों ने पिछले दो साल के दौरान अपनी जमानत कराई। यहां तलाश करने पर 112 बदमाश ही पुलिस तलाश सकी। यहां भी 59 बदमाशों को पुलिस अब तक तलाश नहीं सकी। इनके बारे में उनके परिजन भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। इनमें कई हिस्ट्रीशीटर बदमाश भी हैं। जालौन में कुल 290 बदमाश जमानत कराकर बाहर आए लेकिन, सिर्फ पुलिस 135 बदमाशों की ही तलाश कर सकी। बाकी 155 बदमाशों के बारे में कुछ भी नहीं मालूम चल सका।
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इन सभी की तलाश कराई जा रही है। जमानत पर बाहर आने वाले सभी अपराधियों का रिकॉर्ड अनिवार्य तौर पर थाने पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पंद्रह दिन की डेडलाइन बढ़ाई गई है। उसके बाद सत्यापित किए गए अपराधियों की सूची भी परखी जाएगी। इसमें लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जोगेंद्र कुमार, डीआईजी