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सात महीने में 34 गर्भवतियों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:26 AM IST
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crime news jhansi
- फोटो : demo
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जनपद में अप्रैल से अक्तूबर तक 34 गर्भवतियों की मौत हो चुकी है। बृहस्पतिवार को सीएमओ ऑफिस में हुई मातृ-मृत्यु समीक्षा समिति की बैठक में यह बात सामने आई है।
झांसी में 20 घर और पांच दुर्घटना में मातृ-मृत्यु हुई हैं। बैठक में सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव ने इसको गंभीरता से लेते हुए आशाओं, एएनएम से गर्भवती महिलाओं के परिजनों को खतरों के लक्षण के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस पर आने वाली गर्भवतियों में अंतिम तिमाही की गर्भावस्था वाली महिलाओं और मातृत्व सप्ताह में चिह्नित की गई हाई रिस्क वाली गर्भवतियों की प्रसव योजना बनाई जाए। हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं का प्रसव होने के बाद 42 दिन की अवधि तक फालोअप किया जाए। इससे मातृ-मृत्यु दर में अपेक्षित कमी लाई जा सके। डॉ. प्रीति कैनाल ने बताया कि सीएचसी, पीएचसी से एक्लेम्पिसिया व पीपीएच के केसों का उचित प्रबंधन करने के बाद ही मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए। इस दौरान डॉ. नरेश अग्रवाल, डॉ. एके त्रिपाठी, डॉ. एनके जैन, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. विजयश्री शुक्ला, डॉ. रजनी चौरसिया मौजूद रहीं।
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झांसी में 20 घर और पांच दुर्घटना में मातृ-मृत्यु हुई हैं। बैठक में सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव ने इसको गंभीरता से लेते हुए आशाओं, एएनएम से गर्भवती महिलाओं के परिजनों को खतरों के लक्षण के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस पर आने वाली गर्भवतियों में अंतिम तिमाही की गर्भावस्था वाली महिलाओं और मातृत्व सप्ताह में चिह्नित की गई हाई रिस्क वाली गर्भवतियों की प्रसव योजना बनाई जाए। हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं का प्रसव होने के बाद 42 दिन की अवधि तक फालोअप किया जाए। इससे मातृ-मृत्यु दर में अपेक्षित कमी लाई जा सके। डॉ. प्रीति कैनाल ने बताया कि सीएचसी, पीएचसी से एक्लेम्पिसिया व पीपीएच के केसों का उचित प्रबंधन करने के बाद ही मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए। इस दौरान डॉ. नरेश अग्रवाल, डॉ. एके त्रिपाठी, डॉ. एनके जैन, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. विजयश्री शुक्ला, डॉ. रजनी चौरसिया मौजूद रहीं।
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