{"_id":"596e7f784f1c1b6b168b48c5","slug":"21500413816-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोडवेज बस डिपो के हालात बदतर, जबदस्त घाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोडवेज बस डिपो के हालात बदतर, जबदस्त घाटा
Updated Wed, 19 Jul 2017 04:06 AM IST
विज्ञापन
रोडवेज बस डिपो के हालात बदतर, जबदस्त घाटा
झांसी।
बदहाली और अनदेखी के चलते झांसी रोडवेज बस डिपो सूबे का सबसे खराब और घाटे वाली सूची में आ गया है। हालात यह हैं कि हर महीने खर्च है लगभग चार करोड़ और प्रतिदिन आमदनी मात्र 14 लाख रुपये। राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक पी.गुरु प्रसाद ने इसमें जल्द सुधार के निर्देश दिए हैं।
निगम मुख्यालय में मंगलवार को हुई रोडवेज के आला अधिकारियोें की बैठक में प्रतापगढ़, जौनपुर, जीरो रोड इलाहाबाद, बलिया और झांसी रोडवेज बस डिपो को सबसे खराब और घाटा देेने वाले डिपो की श्रेणी में रखा है। उन्होंने क्षेत्रीय और सहायक प्रबंधक से कार्ययोजना बनाने और डिपो को लाभप्रद बनाने को कहा। नोडल अधिकारी को डिपो का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। इधर विभाग के अनुसार डिपो के घाटे में रहने का मुख्य कारण झांसी का मध्य प्रदेश से घिरा रहना और एक मात्र राष्ट्रीय राजमार्ग कानपुर होना है। बसें तो बीते कुछ वर्षों में रोडवेज की बसें तो बढ़ी, लेकिन चालक - परिचालकों की कमी रही, डग्गामार वाहनों की अधिक संख्या होने सहित कई अन्य कारण भी हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राम लवट के मुताबिक इस श्रेणी से उबरने के लिए बनाई जा रही हैं। हालांकि पहले से ही प्रत्येक बृहस्पतिवार को चालकों की भर्ती की जा रही है। इसके अलावा डग्गामार वाहनों से सख्ती से निपटा जा रहा हैं। अगर ललितपुर मार्ग को राष्ट्रीय कृत कर दिया जाए, तो निश्चित ही रोडवेज को अच्छी कमाई होगी।
बाक्स
इसलिए है फिसड्डी
- सीमावर्ती जिलों में बसों केे परमिट का अभाव
- झांसी में रात में पर्याप्त यात्री नहीं मिलते।
- 100 चालक और परिचालकों की कमी।
- बड़े पैमाने पर चल रही हैं डग्गामार बसें।
- राष्ट्रीय राजमार्ग कानपुर में अन्य बसों का संचालन।
- औसतन रोज कमाई 14 लाख और मासिक खर्चा चार करोड़ रुपये।
विज्ञापन
झांसी।
बदहाली और अनदेखी के चलते झांसी रोडवेज बस डिपो सूबे का सबसे खराब और घाटे वाली सूची में आ गया है। हालात यह हैं कि हर महीने खर्च है लगभग चार करोड़ और प्रतिदिन आमदनी मात्र 14 लाख रुपये। राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक पी.गुरु प्रसाद ने इसमें जल्द सुधार के निर्देश दिए हैं।
निगम मुख्यालय में मंगलवार को हुई रोडवेज के आला अधिकारियोें की बैठक में प्रतापगढ़, जौनपुर, जीरो रोड इलाहाबाद, बलिया और झांसी रोडवेज बस डिपो को सबसे खराब और घाटा देेने वाले डिपो की श्रेणी में रखा है। उन्होंने क्षेत्रीय और सहायक प्रबंधक से कार्ययोजना बनाने और डिपो को लाभप्रद बनाने को कहा। नोडल अधिकारी को डिपो का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। इधर विभाग के अनुसार डिपो के घाटे में रहने का मुख्य कारण झांसी का मध्य प्रदेश से घिरा रहना और एक मात्र राष्ट्रीय राजमार्ग कानपुर होना है। बसें तो बीते कुछ वर्षों में रोडवेज की बसें तो बढ़ी, लेकिन चालक - परिचालकों की कमी रही, डग्गामार वाहनों की अधिक संख्या होने सहित कई अन्य कारण भी हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक राम लवट के मुताबिक इस श्रेणी से उबरने के लिए बनाई जा रही हैं। हालांकि पहले से ही प्रत्येक बृहस्पतिवार को चालकों की भर्ती की जा रही है। इसके अलावा डग्गामार वाहनों से सख्ती से निपटा जा रहा हैं। अगर ललितपुर मार्ग को राष्ट्रीय कृत कर दिया जाए, तो निश्चित ही रोडवेज को अच्छी कमाई होगी।
विज्ञापन
बाक्स
इसलिए है फिसड्डी
- सीमावर्ती जिलों में बसों केे परमिट का अभाव
- झांसी में रात में पर्याप्त यात्री नहीं मिलते।
- 100 चालक और परिचालकों की कमी।
- बड़े पैमाने पर चल रही हैं डग्गामार बसें।
- राष्ट्रीय राजमार्ग कानपुर में अन्य बसों का संचालन।
- औसतन रोज कमाई 14 लाख और मासिक खर्चा चार करोड़ रुपये।