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Jhansi News: जेल लोक अदालत में 19 मामलों का निस्तारण, बंदियों को राहत
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झांसी। जिला कारागार में सोमवार को जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें बंदियों के 19 मामलों का पूर्ण और अंतिम रूप से निस्तारण कर उन्हें राहत प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ईशा त्रिपाठी और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतीक त्रिपाठी ने कारागार में जाकर कार्रवाई पूरी कराई।
एसीजेएम प्रतीक त्रिपाठी ने कारागार में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की। उन्होंने जेल परिसर में ही बंदियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझा। विचाराधीन बंदियों द्वारा स्वेच्छा से 30 दांडिक वादों में जुर्म स्वीकारोक्ति के प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें से 10 प्रार्थना पत्रों और 9 दांडिक वादों का पूर्ण एवं अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। इस निस्तारण से कुल 19 बंदियों को कानूनी राहत मिली। सचिव ईशा त्रिपाठी ने बताया कि जेलों में निरुद्ध छोटे और सुलह-समझौते योग्य अपराधों के बंदियों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से ऐसी अदालतें आयोजित की जाती हैं।
त्वरित न्याय और भीड़ कम करने का प्रयास
जेल लोक अदालतों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इनका मुख्य लक्ष्य छोटे अपराधों में बंद बंदियों को जल्द न्याय दिलाना है। ये अदालतें सुलह-समझौते योग्य मामलों पर विशेष ध्यान देती हैं। इन प्रयासों से जेलों में बंदियों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्हें लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सेवाओं की जानकारी भी दी गई है।
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एसीजेएम प्रतीक त्रिपाठी ने कारागार में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की। उन्होंने जेल परिसर में ही बंदियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझा। विचाराधीन बंदियों द्वारा स्वेच्छा से 30 दांडिक वादों में जुर्म स्वीकारोक्ति के प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें से 10 प्रार्थना पत्रों और 9 दांडिक वादों का पूर्ण एवं अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। इस निस्तारण से कुल 19 बंदियों को कानूनी राहत मिली। सचिव ईशा त्रिपाठी ने बताया कि जेलों में निरुद्ध छोटे और सुलह-समझौते योग्य अपराधों के बंदियों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से ऐसी अदालतें आयोजित की जाती हैं।
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त्वरित न्याय और भीड़ कम करने का प्रयास
जेल लोक अदालतों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इनका मुख्य लक्ष्य छोटे अपराधों में बंद बंदियों को जल्द न्याय दिलाना है। ये अदालतें सुलह-समझौते योग्य मामलों पर विशेष ध्यान देती हैं। इन प्रयासों से जेलों में बंदियों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्हें लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सेवाओं की जानकारी भी दी गई है।
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