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डायरिया की रोकथाम के लिए चलेगा अभियान
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डायरिया की रोकथाम के लिए चलेगा अभियान
झांसी। भीषण गर्मी और चढ़ते हुए पारे के साथ-साथ बीमारियों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इनमें से डायरिया ऐसी ही एक आम बीमारी है जो पूरे देश में नवजात व बाल मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है। इस बीमारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर पीड़ित बच्चों का इलाज करेगा। इसके लिए कार्यशाला का आयोजन हुआ।
प्रशिक्षण दे रहे एसीएमओ डॉ. एनके जैन ने बताया कि ‘डायरिया से पीड़ित बच्चों की वजह से जीरो चाइल्ड डेथ्स’ के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में 28 मई से नौ जून तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े अभियान का संचालन होगा, जिससे डायरिया से होने वाली मृत्यु को रोकना संभव है। अभियान के दौरान ओआरएस व जिंक टेबलेट के माध्यम से डायरिया से ग्रसित बच्चों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए आशाएं माईक्रोप्लान बनाएंगी। इसमें बच्चों को चिन्हित कर उनके घर पहले से ही ओआरएस के पैकेट रखवाए जाएंगे। साथ ही वे ओआरएस बनाने की विधि का प्रदर्शन भी करके दिखाएंगी। सामान्य डायरिया का इलाज करने के अलावा गंभीर केस को रेफेर करेंगी, जिससे पीएचसीए-सीएचसी पर उनका सही उपचार हो सके।
डॉ. जैन ने बताया की माताओं के साथ काउन्सलिंग की भी इस पखवाड़े में अहम भूमिका होगी जिसमें उन्हें स्तनपान, सही तरीके से हाथ धोने, साफ-सफाई रखन, शौच के लिए शौचालय का प्रयोग करने आदि के बारे में बताया जाएगा। अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुशील प्रकाश की अध्यक्षता में किया गया।
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क्या कहते हैं आंकड़े ?
एसआरएस 2016 के आंकड़ों के अनुसार यूपी में डायरिया के कारण हर साल लगभाग 25 हजार व हर घंटे तीन शिशुओं की मृत्यु होती हैं। डायरिया नवजात मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है और एनएफएचएस-4 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 15 प्रतिशत बच्चे डायरिया से ग्रसित हैं। ओआरएस और जिंक की उपयोगिता मृत्यु दर को कम कर सकती हैं। लेकिन, यूपी में इसकी उपयोग की दर कम है।
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झांसी। भीषण गर्मी और चढ़ते हुए पारे के साथ-साथ बीमारियों ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इनमें से डायरिया ऐसी ही एक आम बीमारी है जो पूरे देश में नवजात व बाल मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है। इस बीमारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर पीड़ित बच्चों का इलाज करेगा। इसके लिए कार्यशाला का आयोजन हुआ।
प्रशिक्षण दे रहे एसीएमओ डॉ. एनके जैन ने बताया कि ‘डायरिया से पीड़ित बच्चों की वजह से जीरो चाइल्ड डेथ्स’ के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में 28 मई से नौ जून तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े अभियान का संचालन होगा, जिससे डायरिया से होने वाली मृत्यु को रोकना संभव है। अभियान के दौरान ओआरएस व जिंक टेबलेट के माध्यम से डायरिया से ग्रसित बच्चों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए आशाएं माईक्रोप्लान बनाएंगी। इसमें बच्चों को चिन्हित कर उनके घर पहले से ही ओआरएस के पैकेट रखवाए जाएंगे। साथ ही वे ओआरएस बनाने की विधि का प्रदर्शन भी करके दिखाएंगी। सामान्य डायरिया का इलाज करने के अलावा गंभीर केस को रेफेर करेंगी, जिससे पीएचसीए-सीएचसी पर उनका सही उपचार हो सके।
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डॉ. जैन ने बताया की माताओं के साथ काउन्सलिंग की भी इस पखवाड़े में अहम भूमिका होगी जिसमें उन्हें स्तनपान, सही तरीके से हाथ धोने, साफ-सफाई रखन, शौच के लिए शौचालय का प्रयोग करने आदि के बारे में बताया जाएगा। अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुशील प्रकाश की अध्यक्षता में किया गया।
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क्या कहते हैं आंकड़े ?
एसआरएस 2016 के आंकड़ों के अनुसार यूपी में डायरिया के कारण हर साल लगभाग 25 हजार व हर घंटे तीन शिशुओं की मृत्यु होती हैं। डायरिया नवजात मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है और एनएफएचएस-4 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 15 प्रतिशत बच्चे डायरिया से ग्रसित हैं। ओआरएस और जिंक की उपयोगिता मृत्यु दर को कम कर सकती हैं। लेकिन, यूपी में इसकी उपयोग की दर कम है।