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छठ महोत्सव पर अर्घ्य-Dehat
Updated Tue, 13 Nov 2018 11:59 PM IST
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अस्त होते सूर्य को दिया अर्घ्य
झांसी।
चार दिवसीय छठ पूजा के अंतर्गत मंगलवार की शाम श्रद्धालुओं ने शांति मंत्रों क ा उच्चारण किया और छठ मैया के भजन गाए। इस बीच पश्चिम दिशा में अस्त होते भगवान भास्कर को निर्जल व्रत धारण किये श्रद्धालुओं ने विधिवत अर्घ्य दिया। इसके बाद घरों में गन्ना से बने कोसी की पूजा की और रात्रि जागरण किया। भगवान सूर्य को दूसरा अर्घ्य बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उदित होने के दौरान दिया जाएगा। पूजा अर्चना के बाद व्रत का समापन होगा।
दोपहर बाद बिहार व पूर्वांचल के लोग अपने-अपने परिवार के साथ छठ मैया पूजा स्थल व घाटों पर उमड़ने लगे। महिलाओं ने छठ मैया को आकर्षक फूलों से सजाया वहीं, युवाओं ने पूजा के लिए पंडाल को सजावट प्रदान की। पूजा अवसर पर महिला श्रद्धालुओं ने छठ मैया को मौसमी सब्जी, फल व साड़ियों के अलावा गुड़ व आटा से बना ठेकुआ अर्पण किया और उनके भजन गाए। वहीं, कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद कोसी भरकर पूजा स्थल पर पहुंचे। मंगलवार को महानगर में बिहार व पूर्वांचल समाज के परिवारों ने आईटीआई क्षेत्र स्थित नरसिंह मंदिर परिसर में, बाहर बड़ा गांव गेट स्थित चिम्मन लिटौरे की बगिया, पारीछा कॉलोनी में तथा पंचकुइयां स्थित गोशाला में छठ पूजा की और अस्त होते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया।
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नरसिंह मंदिर परिसर में हुई छठ पूजा
आईटीआई क्षेत्र स्थित नरसिंह मंदिर परिसर में बिहार पूर्वांचल सांस्कृतिक कुटुंब की ओर से छठ पूजा हुई। महिलाओं ने जलकुंड में खडे़ होकर बांस के सूप में केला, गन्ना सहित अन्य मौसमी सब्जियां, फल व पकवान अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पण किये। इसके अलावा महिलाओं ने छठ माता के गीत व भजन गाए। बच्चों ने पटाखे फोडे़। यहां पूजा के बाद व्रत धारियों ने अपने घरों में गन्ना से बने कोसी की पूजा की और रात्रि जागरण किया। छठ पूजा अवसर पर शैलेश राय, मानसिंह यादव, हरनारायण यादव, शिवम यादव, सुमन दास, अशोक श्रीवास्तव, प्रियंका श्रीवास्तव, पत्रिका देवी, धर्मेंद्र सिंह, संजय बुंदेला, अश्विनी, मनीष यादव आदि मौजूद रहे।
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बच्चों ने दिखाया उत्साह, महिलाओं ने की पूजा
पंचकुइयां मंदिर स्थित गोशाला में हर वर्ष की तरह इस बार भी छठ पूजा का कार्यक्र म धूमधाम और भक्ति भाव से हुआ। यहां महिला श्रद्धालुओं ने जल में खडे़ होकर पीतल व बांस से बने सूपों में फलों व सब्जियों को रखा और दीप प्रज्ज्वलित कर सूर्य देवता को अर्घ्य दिया। छठ माता को सजाया और भोजपुरी भाषा में भक्ति गीत गाए। बच्चों ने भी पर्व में उत्साह दिखाते हुए गोशाला परिसर में बने मंच पर भोजपुरी गीतों पर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम रात भर चला। इस अवसर पर धनवती, फूलमती, मालती, अनीता देवी, सिपाही यादव, दीपक यादव, अभय रावत, नीरज यादव, राकेश यादव, अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं रात में घरोें में गन्नों से बने कोसी की पूजा की।
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सभी समाजों के लोग जुटे सूर्य पूजा के लिए
बाहर बड़ागांव गेट स्थित चिम्मन लिटौरे की बगिया में छठ पूजा में बिहार व पूर्वांचल के परिवारों के अलावा अन्य सभी समाजों के लोग जुटे। शांति मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान भास्कर को विधिवत अर्घ्य दिया। व्रत धारण किये महिलाओं ने आधा से एक घंटे तक जल कुंड में खडे़ होकर पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने छठ पूजा के गीत भी गाए। वहीं, युवाओं ने पर्व के क्षणों को यादगार बनाते हुए परिवार के सदस्यों के साथ सेल्फी ली। इस अवसर पर आरके सिंह, ज्ञानानंद झा, मार्तंड स्वामी, रेणू सिंह, सुनीता, गिरिजा देवी, राजाराम मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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दीप है पूजा में विशेष
भगवान भास्कर को पीतल अथवा बांस के बने सूपों में गन्ना, सेब, सीताफल, मूली, सिंघाड़ा, गुड़ व आटा से बना ठेकुआ आदि अर्पित किया गया। सूप में दीपक भी प्रज्ज्वलित किया गया। व्रत धारियों ने बताया कि दीपक उजाले और सुख - समृद्धि का प्रतीक है। जो जीवन में ज्योति प्रज्ज्वलित करता है। मान्यता है कि भगवान सूर्य एवं छठ माता बहन-भाई हैं। वहीं पूजा अवसर पर जलाशय को दीपकों से सजाया गया।
यह गाए प्रमुख भजन
पूजा अवसर पर व्रत धारियों ने भोजपुरी भाषा में कई भजन गाए। इनमें छठी मैया, भूल चूक गलती हमार...., घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार....., नारियल केलवा गउधवा, साजल नदिया किनार..., केरवा जे फरेला गवध से..., सांझे बेरा देवो अरधिया, भोरे मांगव आशीष.... आदि शामिल थे।
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मां दुर्गा का अवतार है छठ मां
छठ माता मां दुर्गा का अवतार है। सभी मनोकामनाएं वह पूरी करती है। यह दीपावली जैसा महत्वपूर्ण पर्व है। इसमें परिवार के सभी सदस्य पूजा अवसर पर एकत्रित जरूर होते हैं।
कंचन, महिला श्रद्धालु
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परंपराओं व नियमों का करते हैं पालन
पिछले 13 वर्षों से छठ व्रत कर रहीं हूं। हमारे बिहार में जो धार्मिक परंपराएं और व्रत होते हैं, उसका पूर्ण पालन सभी लोग करते हैं। कार्तिक अमावस्या के साथ ही घर की शुद्धि शुरू हो जाती है।
मानसी सिंह, महिला श्रद्धालु