फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   ट्रैकमैन ही आपस में खोलने लगे मोर्चा,,,-City

ट्रैकमैन ही आपस में खोलने लगे मोर्चा,,,-City

Mon, 18 Sep 2017 09:39 PM IST
Updated Mon, 18 Sep 2017 09:39 PM IST
विज्ञापन
ट्रैकमैन ही आपस में खोलने लगे मोर्चा,,,-City
ट्रैकमैन ही आपस में खोलने लगे मोर्चा
विज्ञापन

वरिष्ठ मंडल अभियंता को लिखा गोपनीय पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रेल मंत्री के आदेश के बाद भी अभी भी दो सौ से अधिक ट्रैकमैन बंगलों और मंडल के अगल-अलग डिपो कार्यालयों में पर ही नजर आ रहे हैं। वहीं, अब ट्रैकमैनों ने आपस में मोर्चा खोल दिया है। वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को खुद बता रहे हैं कि उनके साथी किस ऑफिस और बंगले में काम कर रहे हैं।
वरिष्ठ मंडल अभियंता को लिखे एक गोपनीय पत्र में चिरगांव यूनिट एक से 12 तक के ट्रैकमैनों ने बताया कि उनके ही कुछ साथी कार्यालय में काम कर रहे हैं, जिन्होंने कभी भी ट्रैक पर काम नहीं किया। जबकि, लाइन पर काम करने वाले ट्रैकमैन ऑफिस जाते हैं तो वे उन पर रौब दिखाते हैं। अगर ऑफिस में ज्यादा काम हो तो उनको भी मौका दिया जाए। बंगलों पर काम करने वाले ट्रैकमैन धीरे-धीरे गैंग में वापस आते जा रहे हैं, जबकि ऑफिस की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा।
विज्ञापन

मालूम हो कि, झांसी रेल मंडल में किलोमीटर के हिसाब से कम से कम पांच हजार ट्रैकमैनों की आवश्यकता हैं, जबकि 3970 ही तैनात हैं। पिछले दिनों लगातार बढ़ते रेल हादसों के कारण रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने दस सितंबर तक सभी ट्रैकमैनों को पटरियों के रखरखाव में लगाने के निर्देश जारी किए थे। मगर, इसके बाद भी अभी दो सौ से अधिक ट्रैकमैन इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों और अन्य उच्च अधिकारियों के बंगलों और मंडल के अलग-अलग डिपो कार्यालय में अभी भी काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


‘सभी ट्रैकमैन पटरियों पर ही काम कर रहे हैं। ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की मुझे जानकारी नहीं है।’
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।

भेदभाव नहीं होना चाहिए
रेलमंत्री ने जब सभी ट्रैकमैनों को ट्रैक पर लगाने के निर्देश दिए हैं, तो यह भेदभाव नहीं होना चाहिए। पत्र लिखकर कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा बताई है।
विश्वनाथ सिंह यादव, सहायक सचिव, रेलवे कर्मचारी ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन।

बात करो तो झुंझला जाते हैं अधिकारी
रेलवे अफसर अपने बंगलों पर गैंगमैन, ट्रैकमैन, खलासी जैसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लगाना अपना अधिकार समझते हैं। यह सिलसिला शुरूआत से ही चला आ रहा है। सब अपनी ताकत के हिसाब से कर्मचारियों को अपने बंगलों पर लगाए हैं। जबकि, नियम के तहत डीआरएम और अन्य विभागाध्यक्ष भी एक बंगला प्यून ही अपने साथ रख सकते हैं और उस कर्मचारी को पांच साल में स्थायी भी करा सकते हैं। बंगले में अन्य मेंटेनेंस के काम कराने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के कार्य निरीक्षक की होती है। रेलमंत्री ने जब से कार्यालय और बंगलों से ट्रैकमैनों को हटाने के आदेश दिए हैं, तब से ही अधिकारियों से यह सवाल पूछे जाने पर वह झुंझला जाते हैं। सबका एक सा ही जवाब रहता है कि बंगलों पर कभी कोई ट्रैकमैन तैनात ही नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed