जौनपुर। जिले में मंगलवार को गमगीन माहौल में यौमे आशूरा मनाया गया। इस मौके पर अजादारों ने नौहा मातम के साथ आंसूओं का नजराने पेश कर ताजियों को अपनी-अपनी कर्बलाओं में सुउपुर्द ए खाक कर दिया। इसके बाद अजाखानों में मजलिसें शामे गरीबां आयोजित हुई। नगर के विभिन्न इलाकों में निर्धारित समय के अनुसार ताजिए उठाये गए। जिसके साथ मातमी अंजुमनों ने नौहा और मातम किया।
नगर क्षेत्र के अधिकांश ताजिये सदर इमामबारगाह स्थित गंजे शहीदा में सुपुर्द ए खाक किये गये जबकि कुछ ताजिए मोहल्लों की कर्बलाओं में भी सुपुर्द ए खाक हुए। चहारसू चौराहे से उठा जुलूस शिया जामा मस्जिद होता हुआ अपने मुख्य मार्गों से गुजरकर सदर इमामबारगाह पहुंचा। इसी प्रकार इमामबाड़ा शाह अबुल हसन भंडारी, बलुआघाट, कटघरा, मोहल्ला रिजवीं खां, पुरानी बाजार, ताड़तला, बारादुअरिया, यहियापुर, पानदरीबा के ताजिए भी सदर इमामबारगाह स्थित गंजे शहीदा में दफन हुए। सिपाह मोहल्ले के ताजिये नबी साहब स्थित गंजे शहीदा में दफ्न किये गये। इसके पूर्व बलुआघाट स्थित शाही किला मस्जिद, मोहल्ला दीवान शाह, कबीर, ताड़तला की मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर नमाजे आशूरा का आयोजन हुआ। देर शाम सदर इमामबारगाह की ईदगाह मैदान में मजलिसें शामे गरीबां हुई जिसमे शायरों ने अपने अंदाज में कर्बला के शहीदों को नजराने अक़ीदत पेश किया , जाकिर कैसर नवाब ने मजलिस को खेताब करते हुए कर्बला में शाम ए गरीबा का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह हजरत इमाम हुसैन को उनके 71 साथियों के साथ तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया । यजीदी फौजो ने परिवार की महिलाओं बच्चों पर जो जुल्म ढाया उसे कोई नही भुला सकता है। संचालन तहसीन शाहिद ने किया।