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लॉकडाउन में दर्द और बेबसी लेकर पैदल ही घर जा रहे मजदूर, 500 किमी की दूरी तय कर आए, मंजिल अभी दूर

Thu, 30 Apr 2020 04:47 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर Published by: विचित्र सिंह Updated Thu, 30 Apr 2020 04:47 PM IST
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Workers going home on foot with pain and helplessness in lockdown
जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर में सड़क के किनारे बैठकर भोजन करते दूसरे प्रदेशों से आये युवक। - फोटो : अमर उजाला
आंखों में सुनहरे ख्वाब लेकर परदेश कमाने गए नौजवान अब दर्द और बेबसी लेकर घर लौट रहे हैं। पराए शहर में लॉकडाउन ने उन्हें दो जून की रोटी के लिए मोहताज किया तो उन्हें गांव की माटी याद आने लगी। मुश्किल घड़ी में अपनों के साथ को ही सबसे बड़ी ताकत मानते हुए वह सैकड़ों किमी दूर से पैदल ही चले आ रहे हैं।
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बृहस्पतिवार को भी ऐसे कई नौजवानों ने जौनपुर की सीमा में प्रवेश किया, जिन्हें हालात ने अपने सपनों का शहर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। गोरखपुर जिले के यह युवा करीब 500 किमी की दूरी तय कर आए थे, उन्हें अभी ढाई सौ किमी तक और चलना है। अमन, रवि, जाकिर, रोशन, शिवाकांत, भुलई सरोज, पवन कुमार, नन्हेलाल पटेल, किशन लाल, बृजेश चौरसिया, प्रभात, सुभाष, नंदू कुमार, मनोहर, शिवजी गोरखपुर के निवासी हैं। 
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अपने शहर में मनमाफिक काम नहीं मिला तो करीब दो साल पहले वह जबलपुर चले गए। वहां की एक फैक्ट्री में सभी साथ काम करते थे। करीब दो सालों से परिवार की जीविका इन्हीं के भरोसे थी। कोरोना के कहर से देश लॉक डाउन हुआ तो फैक्ट्री के पहियों के साथ ही इनकी जिंदगी भी थम सी गई। फैक्ट्री मालिक प्रकाश सिंह ने ढांढ़स बधाया कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।
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रहने-खाने की व्यवस्था भी दी, लेकिन जब लॉक डाउन दूसरे चरण में पहुंचा तो वह भी मजबूर हो गए। इसके बाद सभी 15 मजदूर पैदल की घर के लिए निकल पड़े। रास्ते भर भोजन कम ठोकरें अधिक खाते रहे। मजदूरों ने बताया कि छांव की तलाश में किसी के दरवाजे पर बैठते तो वह संदिग्ध की निगाह से देखते हुए हटा देता था।


किसी तरह से प्रयागराज आए और फिर पैदल ही चल पड़े। तपती दोपहरी और भूख-प्यास से बेहाल यह मजदूर मुंगराबादशाहपुर पहुंचे तो हलक से आवाज नहीं निकल रही थी। आंखों मे आंसू बेपनाह दर्द में मुलव्वस 15 मजदूरों को (सीता रसोई ) के माध्यम से चेयरमैन शिव गोविंद साहू, विशंभर दुबे ने जलपान और फिर भर पेट भोजन कराया। मजदूरों ने कहा कि पिछले दस दिन से भूख प्यास की तड़प ने उन्हें लाचार बना दिया है। किसी तरह से वह घर गोरखपुर पहुंच जाएं तो मानो मुझे सब कुछ मिल जाएगा।
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