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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   What is my fault, as soon as I came into this world I was thrown into the bushes.

Jaunpur News: मेरा क्या कसूर, दुनिया में आते ही फेंक दिया झाड़ियों में

Mon, 08 Apr 2024 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Apr 2024 12:30 AM IST
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What is my fault, as soon as I came into this world I was thrown into the bushes.
करंजाकला। उसकी कातर निगाहें आसमान की ओर टकटकी लगाए थीं और आंखें डबडबा रही थीं। अभी उसने दुनिया में कदम रखा था। आदमी की भाषा भी नहीं सीख पाई थी कि अपना दर्द बयां कर सके और मदद के लिए पुकारे। फिर भी यह सवाल तो मथ ही रहा होगा कि मेरा क्या कसूर जो जन्मते ही झाड़ियों में फेंक दिया गया। मामला सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के परसनी गांव का है।
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रविवार को अलसुबह ही सड़क किनारे जिंदगी की चाहत में एक शिशु की सुबगती, लरजती चीख सुनाई दी। आवाज सुनकर लोगों ने मासूम पुकार का पीछा किया तो पता चला कि आवाज झाड़ी से आ रही है। आसपास गेहूं की कटाई कर रहे लोगों को उसकी सूचना मिली तो वे भी कामकाज बंद करके पहुंच गए। पर सब बेबस ताकते रहे। झाड़ियों से नवजात को निकालने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
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करंजाकला ब्लॉक में तैनात सफाईकर्मी रामसमुझ यादव को सूचना मिली तो वे पत्नी के साथ पहुंचे। पत्नी बच्ची को झाड़ियों से बाहर निकालकर पुचकारी। उसे तुरंत करंजाकला पीएससी पर ले गए। डॉक्टरों ने बच्ची की सफाई की और प्राथमिक उपचार किया। उसके बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में नवजात ने दम तोड़ दिया। झाड़ी से बरामद होने और अस्पताल की दौड़ में कुल सात घंटे ही गुजरे। इतनी ही उसकी जिंदगी थी।
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रामसमुझ ने बताया कि बच्ची की शरीर पर ईंट रख दी गई थी ताकि उसके रोने की आवाज न सुनाई दे। लेकिन अपनों से ठुकराई बच्ची मौत से जीत न सकी। लोगों ने आसपास के इलाकों और गांव में पता किया लेकिन किसी महिला या पुरुष ने नवजात को फेंकते हुए नहीं देखा था। पुलिस क्षेत्राधिकारी परमानंद कुशवाहा ने बताया कि किसी ने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी है। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी महिला या पुरुष के खिलाफ कार्रवाई होगी।









करंजाकला पीएचसी पर तैनात डॉ. आनंद ने बताया कि जिस नवजात को लोग लेकर आए थे। वह पैदा होने के करीब सात घंटे तक जीवित रही। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची को पैदा होते ही फेंक दिया गया था। उसकी सफाई तक नहीं की गई थी। उसे तुरंत बेहतर उपचार मिलता तो शायद बच गई होती।
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