{"_id":"56f538bf4f1c1bf16df14d6c","slug":"water-problem-in-ststion","type":"story","status":"publish","title_hn":"टोटियां टूटीं, यात्री कैसे बुझाएं प्यास ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टोटियां टूटीं, यात्री कैसे बुझाएं प्यास
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी-फैजाबाद रेल मार्ग पर स्थित जौनपुर भंडारी स्टेशन की हालत तो बद से बदतर है। स्टेशन के करीब सभी प्लेट फार्मो पर लगे प्याऊ की टोटियां टूटी पड़ी हैं। यात्री पानी के लिए तड़पते रहते हैं लेकिन उन्हें इस स्टेशन पर पानी नसीब नही होता है। अगर पानी के लिए दूसरे प्लेट फार्म पर या दूसरे छोर पर जाए तो ट्रेन भी छूटने का डर रहता है। ऐेसे में यात्री ट्रेन में वेंडरों से पानी खरीदें या फिर फिर प्यासे ही अगले स्टेशन के आने का इंतार करते सफर करें।
भंडारी स्टेशन पर यात्री व्यवस्था के नाम पर कुर्सी के अलावा कुछ नही है। ना तो पंखा चलता है और ना ही पानी की कोई व्यवस्था है। अधिकांश प्याऊ की टोटियां टूटी पड़ी हैं और कुछ प्याऊ पर तो तो टोटी टूटने के कारण पानी हमेशा बहता रहता है। गर्मी में ट्रेन रूकते ही यात्री पानी के लिए उतरते तो हैं लेकिन उन्हें पानी मिलेगा या नही यह निश्चित नही है।
एक-दो प्याऊ पर यात्रियो ंकी भीड़ लग जाती है। ट्रेन के दो मिनट के स्टापेज में चार पांच लोग ही पानी ले पाते हैं। बाकी को फिर बिना पानी लिए ही दौड़कर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। पंखा और लाइट के नाम पर जो भी है वह भी खराब पड़े हैं। किसी अधिकारी के निरीक्षण के समय ही कुछ समय के लिए व्यवस्था ठीक की जाती है। अधिकारी के जाते ही फिर वैसी ही स्थिति हो जाती है जैसी पिछले दिनों थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
भंडारी स्टेशन पर यात्री व्यवस्था के नाम पर कुर्सी के अलावा कुछ नही है। ना तो पंखा चलता है और ना ही पानी की कोई व्यवस्था है। अधिकांश प्याऊ की टोटियां टूटी पड़ी हैं और कुछ प्याऊ पर तो तो टोटी टूटने के कारण पानी हमेशा बहता रहता है। गर्मी में ट्रेन रूकते ही यात्री पानी के लिए उतरते तो हैं लेकिन उन्हें पानी मिलेगा या नही यह निश्चित नही है।
विज्ञापन
एक-दो प्याऊ पर यात्रियो ंकी भीड़ लग जाती है। ट्रेन के दो मिनट के स्टापेज में चार पांच लोग ही पानी ले पाते हैं। बाकी को फिर बिना पानी लिए ही दौड़कर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। पंखा और लाइट के नाम पर जो भी है वह भी खराब पड़े हैं। किसी अधिकारी के निरीक्षण के समय ही कुछ समय के लिए व्यवस्था ठीक की जाती है। अधिकारी के जाते ही फिर वैसी ही स्थिति हो जाती है जैसी पिछले दिनों थी।
विज्ञापन