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युवाओं के हाथ में गांव की सरकार
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जौनपुर। अबकी बार पंचायत चुनाव में जिले के कई गांवों की जनता ने अपने यहां की सत्ता युवा और उच्च शिक्षितों के हाथ में सौंपी है। बीए, बीएससी, एमए, बीएड, एमएड तक की शिक्षा हासिल करने के बाद ऐसे युवाओं ने किसी नौकरी पेशे में जाने की बजाय गांव का मुखिया बनकर जनता की सेवा करने और विकास के जरिए गांव की तस्वीर बदलने को ठाना है।
पहली बार गांव के प्रधान बने इन युवाओं का दावा है कि मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से गांव के विकास के लिए आने वाले बजट का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल से गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। गांव के प्रधान बने ये उत्साही युवा लोगों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेंगे यह तो समय बताएगा, लेकिन उनके जज्बातों से लगता है कि उनके नेतृत्व में गांव के विकास की तस्वीर बदलने वाली है। इनमें से कोई आदर्श गांव बनाने का सपना देख रहा है तो कोई विकास के मॉडल के तौर पर गांव को विकसित करने की तैयारी में है।
खुली बैठक में तैयार करेंगे विकास का खाका
सिंगरामऊं। बदलापुर विकासखंड के सिरकिना गांव से निर्वाचित ग्राम प्रधान दीपक सिंह 25 बीएससी तक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। दीपक कहते हैं कि जिस भरोसे के साथ जनता ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है उस पर पूरी तरह खरा उतरने की कोशिश रहेगी। नियमत: गांव के विकास की कार्ययोजना खुली बैठक में बननी चाहिए, लेकिन ऐसा किसी ग्राम पंचायत में देखने को नहीं मिलता। कोशिश होगी कि खुली बैठक में विकास की कार्ययोजना बने और उसे जमीन पर उतारने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
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गांव का विकास ही होगा मकसद
मीरगंज। मछलीशहर विकास खंड के भटहर गांव से पहली बार प्रधान बनीं 28 वर्षीय शर्मिला सरोज बीएड की डिग्री हासिल कर चुकी हैं। उनका सपना पहले शिक्षक बनने का था, लेकिन अब उनकी जिंदगी का मकसद ग्राम प्रधान के रूप में गांव का विकास करना है। वह कहती हैं कि गांव में जीर्ण शीर्ण पड़े जच्चा बच्चा केंद्र को ठीक कराना उनकी प्राथमिकता में होगा। जेठ शिव कुमार स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी हैं, इस नाते स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने पर उनका जोर रहेगा। शासकीय योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाना प्राथमिकता होगी।
मॉडल गांव के रूप में करेंगे विकास
मीरगंज। अदारी गांव की जनता ने इस साल युवा पहलवान 28 वर्षीय चंद्रसेन गिरी को ग्राम प्रधान चुना है। अखाड़े के दांव पेच के माहिर इस युवा पहलवान ने राजनीति के अखाड़े में भी अपनी दांव पेच की कुशलता की छाप छोड़ी है। चंद्रसेन कहते हैं कि ग्राम प्रधान चुने जाने के बाद अब सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक ईमानदारी से पहुंचाकर गांव को मॉडल गांव के रूप में विकसित करना प्राथमिकता होगी। गांव के अभिनव प्राथमिक विद्यालय को भी सुविधाओं से सुसज्जित करने का प्रयास करेंगे।
गांव से ही होगा देश का विकास
जलालपुर। महिमापुर गांव से निर्वाचित ग्राम प्रधान चिंटू गुप्ता (24) एमए की पढ़ाई पूरी करने के बाद जलालपुर कस्बे में ही मोबाइल की दुकान चलाते हैं। वह कहते हैं कि दुकान चलाने के साथ ही समाज सेवा में उनकी रुचि को देखते हुए ही जनता ने उन्हें ग्राम प्रधान बनाया और उनके बड़े भाई पिंटू को जिला पंचायत सदस्य चुना है। अब समाज सेवा के लिए जिम्मेदारी और बढ़ गई है। गांव का विकास ही उनकी प्राथमिकता है। ऐसी कोशिश रहेगी कि विकास के मामले में अपने गांव को अन्य गांवों से अलग कर सकूं।
असली हकदार को मिलेगा योजनाओं का लाब
बक्शा। ग्राम पंचायत कौली से निर्वाचित ग्राम प्रधान 30 वर्षीय अभिषेक सिंह बीसीए, बीएड हैं। जनता ने उन्हें पहली बार गांव की सत्ता सौंपी है। अभिषेक कहते हैं कि गांव के विकास के लिए लिए सरकार की ओर से जितनी योजनाएं संचालित हो रही हैं, उसका बस ईमानदारी से क्रियान्वयन किया जाए तो गांव की तस्वीर बदल सकती है। आवागमन के लिए सम्पर्क मार्ग, शिक्षा, स्वास्थ्य की सेवाओं को बेहतर करना प्राथमिकता में होगा। सभी शासकीय योजनाओं का लाभ उन्हें मिलेगा जो उसके असली हकदार होंगे।
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पहली बार गांव के प्रधान बने इन युवाओं का दावा है कि मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से गांव के विकास के लिए आने वाले बजट का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल से गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। गांव के प्रधान बने ये उत्साही युवा लोगों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेंगे यह तो समय बताएगा, लेकिन उनके जज्बातों से लगता है कि उनके नेतृत्व में गांव के विकास की तस्वीर बदलने वाली है। इनमें से कोई आदर्श गांव बनाने का सपना देख रहा है तो कोई विकास के मॉडल के तौर पर गांव को विकसित करने की तैयारी में है।
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खुली बैठक में तैयार करेंगे विकास का खाका
सिंगरामऊं। बदलापुर विकासखंड के सिरकिना गांव से निर्वाचित ग्राम प्रधान दीपक सिंह 25 बीएससी तक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। दीपक कहते हैं कि जिस भरोसे के साथ जनता ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है उस पर पूरी तरह खरा उतरने की कोशिश रहेगी। नियमत: गांव के विकास की कार्ययोजना खुली बैठक में बननी चाहिए, लेकिन ऐसा किसी ग्राम पंचायत में देखने को नहीं मिलता। कोशिश होगी कि खुली बैठक में विकास की कार्ययोजना बने और उसे जमीन पर उतारने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
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गांव का विकास ही होगा मकसद
मीरगंज। मछलीशहर विकास खंड के भटहर गांव से पहली बार प्रधान बनीं 28 वर्षीय शर्मिला सरोज बीएड की डिग्री हासिल कर चुकी हैं। उनका सपना पहले शिक्षक बनने का था, लेकिन अब उनकी जिंदगी का मकसद ग्राम प्रधान के रूप में गांव का विकास करना है। वह कहती हैं कि गांव में जीर्ण शीर्ण पड़े जच्चा बच्चा केंद्र को ठीक कराना उनकी प्राथमिकता में होगा। जेठ शिव कुमार स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी हैं, इस नाते स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने पर उनका जोर रहेगा। शासकीय योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाना प्राथमिकता होगी।
मॉडल गांव के रूप में करेंगे विकास
मीरगंज। अदारी गांव की जनता ने इस साल युवा पहलवान 28 वर्षीय चंद्रसेन गिरी को ग्राम प्रधान चुना है। अखाड़े के दांव पेच के माहिर इस युवा पहलवान ने राजनीति के अखाड़े में भी अपनी दांव पेच की कुशलता की छाप छोड़ी है। चंद्रसेन कहते हैं कि ग्राम प्रधान चुने जाने के बाद अब सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक ईमानदारी से पहुंचाकर गांव को मॉडल गांव के रूप में विकसित करना प्राथमिकता होगी। गांव के अभिनव प्राथमिक विद्यालय को भी सुविधाओं से सुसज्जित करने का प्रयास करेंगे।
गांव से ही होगा देश का विकास
जलालपुर। महिमापुर गांव से निर्वाचित ग्राम प्रधान चिंटू गुप्ता (24) एमए की पढ़ाई पूरी करने के बाद जलालपुर कस्बे में ही मोबाइल की दुकान चलाते हैं। वह कहते हैं कि दुकान चलाने के साथ ही समाज सेवा में उनकी रुचि को देखते हुए ही जनता ने उन्हें ग्राम प्रधान बनाया और उनके बड़े भाई पिंटू को जिला पंचायत सदस्य चुना है। अब समाज सेवा के लिए जिम्मेदारी और बढ़ गई है। गांव का विकास ही उनकी प्राथमिकता है। ऐसी कोशिश रहेगी कि विकास के मामले में अपने गांव को अन्य गांवों से अलग कर सकूं।
असली हकदार को मिलेगा योजनाओं का लाब
बक्शा। ग्राम पंचायत कौली से निर्वाचित ग्राम प्रधान 30 वर्षीय अभिषेक सिंह बीसीए, बीएड हैं। जनता ने उन्हें पहली बार गांव की सत्ता सौंपी है। अभिषेक कहते हैं कि गांव के विकास के लिए लिए सरकार की ओर से जितनी योजनाएं संचालित हो रही हैं, उसका बस ईमानदारी से क्रियान्वयन किया जाए तो गांव की तस्वीर बदल सकती है। आवागमन के लिए सम्पर्क मार्ग, शिक्षा, स्वास्थ्य की सेवाओं को बेहतर करना प्राथमिकता में होगा। सभी शासकीय योजनाओं का लाभ उन्हें मिलेगा जो उसके असली हकदार होंगे।