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पूविवि: रुपए दो और असाइनमेंट और प्रोजेक्ट ले जाओ
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करंजाकला। नई शिक्षा नीति के तहत ग्रेजुएशन-पोस्ट ग्रेजुएशन में असाइनमेंट और प्रोजेक्ट बनाने का चलन बढ़ा है। विद्यार्थियों को हर समेस्टर में हर विषय के प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा जाता है। छात्र इसे बोझ समझकर पैसे देकर असाइनमेंट बनवा रहे हैं। इससे जहां कुछ छात्रों को नुकसान हो रहा है वहीं कुछ लोगों का व्यापार फलफूल रहा है।
असाइनमेंट और प्रोजेक्ट में आंतरिक मूल्यांकन के 25 अंक होते हैं, ऐसे में हर विद्यार्थी चाहता है कि उसे ज्यादा से ज्यादा अंक मिले और मेहनत भी ना करनी पड़े। ऐसे में वह असाइनमेंट के बोझ से बचने के लिए ये सरल रास्ता अपना रहे और अपना प्रोजेक्ट किसी दूसरे व्यक्ति से तैयार करवा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इस तरह से असाइनमेंट और प्रोजेक्ट तैयार करने वालों की चांदी है, इसके बदले उनकी अच्छी कमाई हो जा रही है। पीड़ित छात्रों के मुताबिक, स्नातक के तीसरे सत्र में रिसर्च प्रोजेक्ट और उससे मिलने वाले 25 अंक के लिए कहीं कहीं पर 100 से 200 रुपए भी रेट है। वहीं इसे टाइप करने वाले प्रति पेज के हिसाब से मोटी रकम ले रहे हैं। छात्र भी इसे देकर अपना काम करा रहे हैं।
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40 से 50 रुपए में तय होता सौदा
प्रोजेक्ट तैयार करने वाले एक बाहरी व्यक्ति ने बताया कि अलग-अलग प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग रेट तय है। एक असाइनमेंट का वह 40 से 50 रुपये लेकर असाइनमेंट लिखता है। उसने बताया कि अब तक सैकड़ों प्रोजेक्ट तैयार कर चुका है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं संपर्क कर रहे हैं। असाइनमेंट लिखकर वह घर तक भी पहुंचा देते हैं।
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वर्जन
जो भी छात्र इस प्रकार के काम कर रहे हैं, वह अपने ज्ञान में कमी कर रहे हैं। उन्हें विश्वविद्यालय या महाविद्यालय की तरफ से जो भी प्रोजेक्ट दिया जा रहा है वह स्वयं से लिखें जिससे उनके आंतरिक मूल्यांकन भी किया जा सके। छात्र से प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे लेने वालों की जांच कराएंगे।
- प्रो. वंदना सिंह, कुलपति, पूविवि
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असाइनमेंट और प्रोजेक्ट में आंतरिक मूल्यांकन के 25 अंक होते हैं, ऐसे में हर विद्यार्थी चाहता है कि उसे ज्यादा से ज्यादा अंक मिले और मेहनत भी ना करनी पड़े। ऐसे में वह असाइनमेंट के बोझ से बचने के लिए ये सरल रास्ता अपना रहे और अपना प्रोजेक्ट किसी दूसरे व्यक्ति से तैयार करवा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इस तरह से असाइनमेंट और प्रोजेक्ट तैयार करने वालों की चांदी है, इसके बदले उनकी अच्छी कमाई हो जा रही है। पीड़ित छात्रों के मुताबिक, स्नातक के तीसरे सत्र में रिसर्च प्रोजेक्ट और उससे मिलने वाले 25 अंक के लिए कहीं कहीं पर 100 से 200 रुपए भी रेट है। वहीं इसे टाइप करने वाले प्रति पेज के हिसाब से मोटी रकम ले रहे हैं। छात्र भी इसे देकर अपना काम करा रहे हैं।
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40 से 50 रुपए में तय होता सौदा
प्रोजेक्ट तैयार करने वाले एक बाहरी व्यक्ति ने बताया कि अलग-अलग प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग रेट तय है। एक असाइनमेंट का वह 40 से 50 रुपये लेकर असाइनमेंट लिखता है। उसने बताया कि अब तक सैकड़ों प्रोजेक्ट तैयार कर चुका है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं संपर्क कर रहे हैं। असाइनमेंट लिखकर वह घर तक भी पहुंचा देते हैं।
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वर्जन
जो भी छात्र इस प्रकार के काम कर रहे हैं, वह अपने ज्ञान में कमी कर रहे हैं। उन्हें विश्वविद्यालय या महाविद्यालय की तरफ से जो भी प्रोजेक्ट दिया जा रहा है वह स्वयं से लिखें जिससे उनके आंतरिक मूल्यांकन भी किया जा सके। छात्र से प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे लेने वालों की जांच कराएंगे।
- प्रो. वंदना सिंह, कुलपति, पूविवि