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Jaunpur News: ऐतिहासिक शाही पुल के दो ताखे बंद, पांच के रास्ते में अवरोध
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जौनपुर। सुंदरीकरण के लिए ऐतिहासिक शाही पुल के दोनों तरफ से इंजीनियरों ने दो ताखे बंद कर दिए और पांच के रास्ते में अवरोध पैदा किया है। जबकि एनजीटी की स्पष्ट गाइडलाइन है कि नदियों के रास्ते में किसी प्रकार का कोई अवरोध न उत्पन्न हो। पर्यावरण के जानकारों की माने तो यह नदियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे पानी के बहाव में समस्या हो रही है। इससे जगह-जगह गाद दिखाई पड़ रहे हैं। वहीं भविष्य में बाढ़ की संभावना हो सकती है। मुगलशासक अकबर के शासनकाल में 1564 में मुनइन खानखाना ने ऐतिहासिक शाही पुल का निर्माण करवाया है। यह भारत में अपने ढंग का अनूठा पुल है और इसकी मुख्य सड़क पृथ्वी तल पर निर्मित है। पुल के उत्तर तरफ 10 व दक्षिण तरफ पांच ताखे हैं। इसे लखनऊ के रिवर फ्रंट योजना की तर्ज पर आधुनिक तरीके से निर्माण कराने के चक्कर में इसके मूल अस्तित्व से खिलवाड़ किया गया। इंजीनियरों ने इसकी मूल सुंदरता को नजर अंदाज कर दिया। एनजीटी की गाइड लाइन है कि नदी के रास्ते में कोई अवरोध न उत्पन्न हो सके, मगर यहां कई क्विंटल पत्थर लगा दिए गए हैं। इससे नदी का क्षेत्रफल भी कम हुआ है। दक्षिणी तरफ के पांच ताखों के आगे के पानी को निकलने के लिए पक्का निर्माण कर नाले की आकृति का रास्ता बनाया गया है जो बारिश के दिनों में निकासी के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे बारिश का पानी घाटों से होकर आबादी वाले निचले इलाकों में प्रवेश कर जाता है।
रीवर फ्रंट योजना के तहत हो रहा काम-सद्भावना पुल से लेकर हनुमान घाट से लेकर बजरंग घाट तक 650 मीटर के दायरे में रीवर फ्रंट डेवलपमेंट का कार्य हो रहा है, इसके लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-नमामि गंगे परियोजना के तहत 8.05 करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया है। इस कार्य को ईआईएल करा रहा है। इसने बजरंग काट के एक ताखे को पत्थर बिछाकर घाट बना दिया तो दूसरे ताखे के नीचे निर्माण के पानी का बहाव रोके हैं। इसी तरह विसर्जन घाट के सुंदरीकरण का कार्य उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा 6.75 करोड़ की लागत से कराया गया।
बोले पर्यावरणविद, नदी के अस्तित्व से छेड़छाड़ गलत-राज पीजी काॅलेज के प्राचार्य और पर्यावरणविद् प्रो.शंभूराम चौहान ने कहा कि गोमती नदी के मूल अस्तित्व के साथ छेड़छाड़ करना गलत है। जितनी चौड़ाई है उसको बिगाड़ना नहीं चाहिए। ताखे बंद करने व उसके रास्ते में अवरोध पैदा कर पानी के बहाव को नहीं रोकना चाहिए। यह पारिस्थितिकी तंत्र के विपरीत है।
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ताखा बंद करने की कार्रवाई क्यों की गई है इसकी जांच कराएंगे। आवास विकास के अधिकारियों से समझ कर इसे ठीक कराया जाएगा। यदि गलत है तो कार्रवाई भी करेंगे। - डाॅ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी
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रीवर फ्रंट योजना के तहत हो रहा काम-सद्भावना पुल से लेकर हनुमान घाट से लेकर बजरंग घाट तक 650 मीटर के दायरे में रीवर फ्रंट डेवलपमेंट का कार्य हो रहा है, इसके लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-नमामि गंगे परियोजना के तहत 8.05 करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया है। इस कार्य को ईआईएल करा रहा है। इसने बजरंग काट के एक ताखे को पत्थर बिछाकर घाट बना दिया तो दूसरे ताखे के नीचे निर्माण के पानी का बहाव रोके हैं। इसी तरह विसर्जन घाट के सुंदरीकरण का कार्य उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा 6.75 करोड़ की लागत से कराया गया।
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बोले पर्यावरणविद, नदी के अस्तित्व से छेड़छाड़ गलत-राज पीजी काॅलेज के प्राचार्य और पर्यावरणविद् प्रो.शंभूराम चौहान ने कहा कि गोमती नदी के मूल अस्तित्व के साथ छेड़छाड़ करना गलत है। जितनी चौड़ाई है उसको बिगाड़ना नहीं चाहिए। ताखे बंद करने व उसके रास्ते में अवरोध पैदा कर पानी के बहाव को नहीं रोकना चाहिए। यह पारिस्थितिकी तंत्र के विपरीत है।
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ताखा बंद करने की कार्रवाई क्यों की गई है इसकी जांच कराएंगे। आवास विकास के अधिकारियों से समझ कर इसे ठीक कराया जाएगा। यदि गलत है तो कार्रवाई भी करेंगे। - डाॅ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी