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दरगाह का फाटक खुलते ही हजारों जायरीनों ने टेका मत्था

Thu, 18 Nov 2021 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 12:15 AM IST
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Thousands of pilgrims bowed their heads as soon as the gate of the dargah opened
क्षेत्र के दरबारे कादरिया गौसपीर दरगाह का फाटक मंगलवार की रात 11 बजकर 11 मिनट पर खुल गया। दरगाह का फाटक खुलते ही सालाना उर्स मेला शुरू हो गया। फाटक खुलने के बाद दूरदराज से पहुंचे हजारों जायरीनों ने दरगाह के भीतर मत्था टेका। यह उर्स प्रत्येक वर्ष रबी उस्मानी की ग्यारवें से शुरू होकर सत्रह दिनों तक चलता है। यहां अपने जिले, प्रदेश के अलावा देश के विभिन्न प्रान्तों से हजारों जायरीन मत्था टेकने आते है।
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दरगाह समिति के मुतवल्ली मोहम्मद मंसूर शाह ने बताया कि 15 नवंबर को 9 बजे सुबह कलश चढ़ा था, इसके बाद मंगलवार की रात में फाटक खुलने का बाद उर्स शुरू हो गया, जो 23 नवंबर तक चलेगा। जनपद मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर पश्चिम दिशा में गौसपुर गांव स्थित गौसपीर दरगाह के विषय मे कहावत है कि इजरत शाह मोहम्मद उमर तथा इजारत शाह नगीना दोनों भाई लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व इजारत के लिए बगदाद शरीफ गये थे, जहां से उन दोनों ने एक ईंट लाया था। गौसपुर में रात्रि विश्राम के समय स्वप्न में बरसात हुई कि ईंट को इसी जगह एक रौजा की तामीर करके नस्ब कर दिया जाय। ताकि इस जमीन पर भी बगदाद शरीफ की तरह गौसपाक फैज का चश्मा जारी रहे। यही पाक ईंट दरगाह की गुंबद के भीतर छोटे से कुब्बे में नस्ब है। इसी कुब्बे का फाटक रबी उस्मानी की ग्यारवें की रात जायरीनों को मत्था टेकने के लिए खोला जाता है।
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