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Jaunpur News: रैन बसेरा बनाकर सुविधाएं देना भूल गए जिम्मेदार
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कड़ाके की ठंड के बीच सार्वजनिक स्थलों पर अस्थायी रैन बसेरे बना तो दिए गए हैं लेकिन जिम्मेदार वहां यात्री सुविधाएं देना भूल गए। न तो पेयजल की व्यवस्था है ना ही पर्याप्त प्रकाश की। यहां तक कि आगंतुकों को जिस गद्दे पर सोने की व्यवस्था की गई है, वह भी फटे हैं। रजाई के स्थान पर कंबल रखे गए हैं।
अमर उजाला की ओर से शुक्रवार की देर रात शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के रैन बसेरों की पड़ताल में तैयारियों की कलई खुल गई। रैन बसेरों के बाहर अलाव जलता नहीं दिखा। रजाई के स्थान पर कंबल मुहैया कराए गए हैं। गद्दे नीचे से फटे और गंदे दिखे। समुचित साफ-सफाई भी नहीं की गई थी। शहर स्थित रोडवेज बस स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे में न तो वहां ठहरने वालों के लिए पेयजल की व्यवस्था है, ना शौचालय की। केयर टेकर ने बताया कि अधिकारी आते हैं और बाहर से देख के चले जाते हैं।
शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र या फिर चट्टी चौराहे, कहीं भी अलाव नहीं जल रहे हैं। इसके चलते गरीब-गुरबे और असहाय लोग ठंड से कांपने को मजबूर हैं। प्रशासन की तरफ से प्रत्येक तहसील में अलाव के लिए 50-50 हजार रुपये बजट उपलब्ध कराया गया है। जिला मुख्यालय पर शहरी क्षेत्र में कलीचाबाद, मुरादगंज तिराहा, नईगंज तिराहा, रुहट्टा, कलीचाबाद, सहकारी कालोनी, जेसीज चौराहा, सिपाह, ओलंदगंज आदि क्षेत्रों में अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। मड़ियाहूं और जफराबाद में भी किसी सार्वजनिक स्थान अथवा चौराहे पर अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी।
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चंदवक क्षेत्र में अलाव के लिए ग्राम प्रधानों को निर्देश दिया गया है लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से कहीं भी अलाव नहीं जल रहे हैं। चंदवक तिराहा, डोभी रेलवे स्टेशन, मोढ़ेला और खुज्झी तिराहा के अलावा स्वास्थ केंद्र डोभी, बीरीबारी बाजार में भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
सिंगरामऊ क्षेत्र में शुक्रवार की रात बस पड़ाव पर अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। महाकाली मंदिर सिंघावल के पास भी अलाव नहीं दिखा। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास भी ठंड से बचाव की व्यवस्था अब तक नहीं की गई है।
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अमर उजाला की ओर से शुक्रवार की देर रात शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के रैन बसेरों की पड़ताल में तैयारियों की कलई खुल गई। रैन बसेरों के बाहर अलाव जलता नहीं दिखा। रजाई के स्थान पर कंबल मुहैया कराए गए हैं। गद्दे नीचे से फटे और गंदे दिखे। समुचित साफ-सफाई भी नहीं की गई थी। शहर स्थित रोडवेज बस स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे में न तो वहां ठहरने वालों के लिए पेयजल की व्यवस्था है, ना शौचालय की। केयर टेकर ने बताया कि अधिकारी आते हैं और बाहर से देख के चले जाते हैं।
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शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र या फिर चट्टी चौराहे, कहीं भी अलाव नहीं जल रहे हैं। इसके चलते गरीब-गुरबे और असहाय लोग ठंड से कांपने को मजबूर हैं। प्रशासन की तरफ से प्रत्येक तहसील में अलाव के लिए 50-50 हजार रुपये बजट उपलब्ध कराया गया है। जिला मुख्यालय पर शहरी क्षेत्र में कलीचाबाद, मुरादगंज तिराहा, नईगंज तिराहा, रुहट्टा, कलीचाबाद, सहकारी कालोनी, जेसीज चौराहा, सिपाह, ओलंदगंज आदि क्षेत्रों में अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। मड़ियाहूं और जफराबाद में भी किसी सार्वजनिक स्थान अथवा चौराहे पर अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी।
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