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जर्जर मकान बन सकते हैं जानलेवा
ब्यूरो,अमर उजाला/जौनपुर
Updated Sat, 15 Jul 2017 01:05 AM IST
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ओलंदगंज नखास मोहल्ला स्थित जर्जर राज भवन।
शहर में कई ऐसी जर्जर इमारतें हैं जो बारिश में कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं । लेकिन ऐसी इमारतों को सुरक्षा के लिहाज से ढहाने के लिए प्रशासन के पास कोई प्लान नहीं है। पूर्व डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने कुछ जर्जर इमारतों को ढहाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक उन मकानों को प्रशासन ढहाना तो दूर खाली तक नही करा पाया है। ऐेसे में लगता है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
शहर में मीरमस्त मोहल्ला, ओलदंगंज, नखास, नवाब युसूफ रोड, सब्जी मंडी, कोतवाली, जहांगीराबाद रोड पर सैकड़ों मकान है जो जर्जर हो चुके हैं। नखास मोहल्ला स्थित सिंगरामऊ के राजा के मकान एवं दुकान में तो लोग मनाही के बाद भी रहते हैं। कमोबेश यही स्थिति सभी जर्जर मकानों की है। कई बार जर्जर मकान गिरने से लोग घायल हो चुके हैं। पिछले साल कोतवाली इलाके में जर्जर मकान गिरने से कई लोग घायल हो गए थे और कई लोग जर्जर मकान में फंस गए थे। हाल ही में जर्जर मकान गिरने से एक राहगीर भी घायल हो गया था। बावजूद इसके प्रशासन चेत नही रहा है।
कभी भी जर्जर मकान गिर सकते हैं। सबसे खराब स्थिति यह है कि न तो जिला प्रशासन के पास जर्जर मकानों का कोई आंकड़ा है और न ही नगर पालिका के पास ही है। प्रशासन और नगर पालिका एक दूसरे के ऊपर जर्जर मकानों की जिम्मेदार बता रहे हैं। यही स्थिति कई वर्षो से चल रही है। अधिकारी आते और चले जाते हैं उन्हें इस बात की चिंता नही है कि लोग काल के गाल में कभी भी समा सकते हैं।
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शहर में मीरमस्त मोहल्ला, ओलदंगंज, नखास, नवाब युसूफ रोड, सब्जी मंडी, कोतवाली, जहांगीराबाद रोड पर सैकड़ों मकान है जो जर्जर हो चुके हैं। नखास मोहल्ला स्थित सिंगरामऊ के राजा के मकान एवं दुकान में तो लोग मनाही के बाद भी रहते हैं। कमोबेश यही स्थिति सभी जर्जर मकानों की है। कई बार जर्जर मकान गिरने से लोग घायल हो चुके हैं। पिछले साल कोतवाली इलाके में जर्जर मकान गिरने से कई लोग घायल हो गए थे और कई लोग जर्जर मकान में फंस गए थे। हाल ही में जर्जर मकान गिरने से एक राहगीर भी घायल हो गया था। बावजूद इसके प्रशासन चेत नही रहा है।
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कभी भी जर्जर मकान गिर सकते हैं। सबसे खराब स्थिति यह है कि न तो जिला प्रशासन के पास जर्जर मकानों का कोई आंकड़ा है और न ही नगर पालिका के पास ही है। प्रशासन और नगर पालिका एक दूसरे के ऊपर जर्जर मकानों की जिम्मेदार बता रहे हैं। यही स्थिति कई वर्षो से चल रही है। अधिकारी आते और चले जाते हैं उन्हें इस बात की चिंता नही है कि लोग काल के गाल में कभी भी समा सकते हैं।
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