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मस्जिद सजाने को लेकर तनाव
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 19 Jan 2015 12:09 AM IST
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जुलूस ईद मिलादुन्नबी के मौके पर रविवार को खेतासराय के गोरारी बाजार स्थित मस्जिद को सजाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। एक पक्ष मस्जिद को सजाना चाहता था तो दूसरा नहीं। हालात बिगड़ता देख स्थानीय पुलिस की सूचना पर सर्किल के सभी थानों की फोर्स गोरारी बाजार पहुंच गई।
एसडीएम की पहल पर तय हुआ कि मस्जिद को सजाए बिना ही जुलूस निकाला जाएगा। फिलहाल गोरारी बाजार में तनावपूूर्ण शांति है।गोरारी बाजार में रविवार को ईद मिलादुन्नबी का कार्यक्रम था। सुबह बरेलवी समुदाय के लोग मस्जिद को सजाने गए तो वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें रोक दिया। वहां पहले से ही पुलिस तैनात थी क्योंकि देवबंदी समुदाय के लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी कि ईद मिलादुन्नबी पर कभी भी मस्जिद को सजाया नहीं गया है।
दूसरे समुदाय के लोग जबरन ऐसा कर सकते हैं। इससे माहौल बिगड़ सकता है। उधर, जब मस्जिद सजाने से रोकने की खबर बरेलवी समुदाय के लोगों को हुई तो मौके पर दोनों समुदाय के लोग जमा हो गए। ऐसे में पुलिस ने शाहगंज के क्षेत्राधिकारी को सूचना दी। सीओ के निर्देश पर सर्किल के सभी थानों की फोर्स गोरारी बाजार पहुंच गई। पुलिस ने वहां से भीड़ को हटाया। एसडीएम नागेंद्र नाथ द्विवेदी ने दोनों पक्षों को यह कहकर समझाया कि इतनी जल्दी कुछ नहीं हो सकता।
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इसलिए पूर्व की तरह इस साल भी जुलूस निकाला जाए। 27 जनवरी को वक्फ बोर्ड के आदेशों के मद्देनजर विवाद खत्म करा दिया जाएगा। दोनों पक्षों में हुई पंचायत के दौरान ग्राम प्रधान आनंद बरनवाल, डा. गौहर नाहिद, छोटेलाल यादव, अबरार अहमद, डा. शमीम समेत क्षेत्र के संभ्रांत लोग मौजूद थे।
मस्जिद पर दोनों समुदाय के लोग अपना हक जताते रहे हैं। इसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछले साल मस्जिद के मुतवल्ली उसरहटा गांव निवासी नेयाज अहमद थे, जो देवबंदी समुदाय से हैं। उन्होंने पिछले साल भी मस्जिद को सजाने से रोक दिया था।
इस साल वक्फ बोर्ड ने मस्जिद का मुतवल्ली बरेलवी समुदाय के डा. कमाल अहमद को बना दिया। डा. कमाल अहमद का कहना है कि पिछली बार थाने में हुई पंचायत में तय हुआ था कि मस्जिद सजाने या न सजाने के लिए मुतवल्ली का आदेश ही माना जाएगा।
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एसडीएम की पहल पर तय हुआ कि मस्जिद को सजाए बिना ही जुलूस निकाला जाएगा। फिलहाल गोरारी बाजार में तनावपूूर्ण शांति है।गोरारी बाजार में रविवार को ईद मिलादुन्नबी का कार्यक्रम था। सुबह बरेलवी समुदाय के लोग मस्जिद को सजाने गए तो वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें रोक दिया। वहां पहले से ही पुलिस तैनात थी क्योंकि देवबंदी समुदाय के लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी कि ईद मिलादुन्नबी पर कभी भी मस्जिद को सजाया नहीं गया है।
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दूसरे समुदाय के लोग जबरन ऐसा कर सकते हैं। इससे माहौल बिगड़ सकता है। उधर, जब मस्जिद सजाने से रोकने की खबर बरेलवी समुदाय के लोगों को हुई तो मौके पर दोनों समुदाय के लोग जमा हो गए। ऐसे में पुलिस ने शाहगंज के क्षेत्राधिकारी को सूचना दी। सीओ के निर्देश पर सर्किल के सभी थानों की फोर्स गोरारी बाजार पहुंच गई। पुलिस ने वहां से भीड़ को हटाया। एसडीएम नागेंद्र नाथ द्विवेदी ने दोनों पक्षों को यह कहकर समझाया कि इतनी जल्दी कुछ नहीं हो सकता।
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इसलिए पूर्व की तरह इस साल भी जुलूस निकाला जाए। 27 जनवरी को वक्फ बोर्ड के आदेशों के मद्देनजर विवाद खत्म करा दिया जाएगा। दोनों पक्षों में हुई पंचायत के दौरान ग्राम प्रधान आनंद बरनवाल, डा. गौहर नाहिद, छोटेलाल यादव, अबरार अहमद, डा. शमीम समेत क्षेत्र के संभ्रांत लोग मौजूद थे।
मस्जिद पर दोनों समुदाय के लोग अपना हक जताते रहे हैं। इसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछले साल मस्जिद के मुतवल्ली उसरहटा गांव निवासी नेयाज अहमद थे, जो देवबंदी समुदाय से हैं। उन्होंने पिछले साल भी मस्जिद को सजाने से रोक दिया था।
इस साल वक्फ बोर्ड ने मस्जिद का मुतवल्ली बरेलवी समुदाय के डा. कमाल अहमद को बना दिया। डा. कमाल अहमद का कहना है कि पिछली बार थाने में हुई पंचायत में तय हुआ था कि मस्जिद सजाने या न सजाने के लिए मुतवल्ली का आदेश ही माना जाएगा।