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Jaunpur News: विधायक ने सदन में शिक्षा की दुर्व्यवस्था का उठाया मुद्दा
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पंचहटिया में अनियंत्रित होकर पलटी पिकअप में लदी जिंदा मछलियां सड़क पर पड़ी हुई।
विधानसभा सत्र के दौरान सपा विधायक पंकज पटेल ने बेसिक शिक्षा विभाग की स्थिति पर सदन में सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ चार लाख 93 हजार 389 छात्र नामांकित हैं, जबकि कार्यरत शिक्षकों की संख्या तीन लाख, 38 हजार 590 है। इस अनुपात के हिसाब से देखा जाए तो आज भी करीब 11 हजार 202 अध्यापकों की कमी है।
विधायक पंकज पटेल ने आंकड़ों पर नजर डालते हुए कहा कि पिछले चार सालों में 88 लाख बच्चों ने ड्रॉप आउट कर दिया है। 2022-23 में एक करोड़ 92 लाख छात्रों का नामांकन था, जो अब घटकर एक करोड़ चार लाख हो गया है। सरकार पर आरोप लग रहा है कि शिक्षकों की भर्ती नहीं करने के कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया।
आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की भर्ती से बचने के लिए अनुपात-समानुपात का बहाना बनाती है। यदि 2022-23 में साढ़े पांच लाख से छह लाख शिक्षक होते तो शायद स्थिति इतनी खराब नहीं होती। आज जो स्कूल बंद और मर्जर किए जा रहे हैं, उसकी आवश्यकता नहीं पड़ती अगर पर्याप्त शिक्षक होते और बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती।
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कहा कि यह कोई मामूली गलती नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित अपराध है जिससे करोड़ों मासूम बच्चों के सपनों को छीना गया है। इसका शिकार दलित और पिछड़ा वर्ग हुआ है, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी विद्यालय पर निर्भर हैं।
सरकार की इस मानसिकता को समझने की जरूरत है जो पिछड़ों और अति पिछड़ों को अशिक्षित रखकर गुलाम बनाना चाहती है।
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विधायक पंकज पटेल ने आंकड़ों पर नजर डालते हुए कहा कि पिछले चार सालों में 88 लाख बच्चों ने ड्रॉप आउट कर दिया है। 2022-23 में एक करोड़ 92 लाख छात्रों का नामांकन था, जो अब घटकर एक करोड़ चार लाख हो गया है। सरकार पर आरोप लग रहा है कि शिक्षकों की भर्ती नहीं करने के कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया।
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आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की भर्ती से बचने के लिए अनुपात-समानुपात का बहाना बनाती है। यदि 2022-23 में साढ़े पांच लाख से छह लाख शिक्षक होते तो शायद स्थिति इतनी खराब नहीं होती। आज जो स्कूल बंद और मर्जर किए जा रहे हैं, उसकी आवश्यकता नहीं पड़ती अगर पर्याप्त शिक्षक होते और बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती।
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कहा कि यह कोई मामूली गलती नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित अपराध है जिससे करोड़ों मासूम बच्चों के सपनों को छीना गया है। इसका शिकार दलित और पिछड़ा वर्ग हुआ है, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी विद्यालय पर निर्भर हैं।
सरकार की इस मानसिकता को समझने की जरूरत है जो पिछड़ों और अति पिछड़ों को अशिक्षित रखकर गुलाम बनाना चाहती है।