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Jaunpur News: शतभिषा नक्षत्र और आयुष्मान योग में पड़ रहा सावन का पहला सोमवार
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मछलीशहर। शिवार्चन के लिए सावन मास का सोमवार विशेष फलदाई कहा गया है। सावन का पहला सोमवार नक्षत्रों के विशेष संयोग में पड़ रहा है। ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ शैलेश मोदनवाल बताते हैं कि सोमवार की सुबह 7:25 बजे तक धनिष्ठा नक्षत्र है, इसके बाद शतभिषा नक्षत्र लग रहा है और आयुष्मान योग भी प्राप्त हो रहा है। इससे सावन का पहला सोमवार महत्वपूर्ण फल देने वाला है।उनका कहना है कि आयुष्मान योग, ज्योतिष में एक शुभ योग माना जाता है, जो दीर्घायु और समृद्धि से जुड़ा है। इस योग में शिवार्चन से व्यक्ति को लंबी आयु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी । इस योग में किए गए शिवार्चन से लंबे समय तक शुभ फल प्राप्त होते रहेंगे। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी ग्रह राहु हैं, और यह नक्षत्र शनि से भी संबंधित है। इस नक्षत्र में शिव की पूजा करने से शनि के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस नक्षत्र को उपचार और परिवर्तन से जोड़ा जाता है अत: इस नक्षत्र में शिव की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान-सावन सोमवार व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने का विधान बतलाया गया है। सोमवार दिन का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा जल, दूध व चावल का कारक कहा गया है इसलिए भगवान शिव को इस दिन गंगाजल, दूध व चावल अर्पित करने से उनका विशेष प्रसन्नता होती है। इस दिन भगवान शिव और शिवा का अर्चन करने से कुंडली में उत्पन्न चंद्रमा के दोष दूर हो जाते हैं। यदि सोमवार के दिन भगवान शिव को चांदी का चंद्रमा चढ़ाकर जल पंचामृत बेलपत्र सच्चे श्रद्धा भक्ति के साथ अर्पित कर प्रार्थना करें तो निश्चय ही भगवान शिव साधक के कष्टों को हर लेते हैं।
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प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान-सावन सोमवार व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने का विधान बतलाया गया है। सोमवार दिन का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा जल, दूध व चावल का कारक कहा गया है इसलिए भगवान शिव को इस दिन गंगाजल, दूध व चावल अर्पित करने से उनका विशेष प्रसन्नता होती है। इस दिन भगवान शिव और शिवा का अर्चन करने से कुंडली में उत्पन्न चंद्रमा के दोष दूर हो जाते हैं। यदि सोमवार के दिन भगवान शिव को चांदी का चंद्रमा चढ़ाकर जल पंचामृत बेलपत्र सच्चे श्रद्धा भक्ति के साथ अर्पित कर प्रार्थना करें तो निश्चय ही भगवान शिव साधक के कष्टों को हर लेते हैं।
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