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Jaunpur News: जिला अस्पताल में इंजेक्शन आया, लेकिन छह साल से हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं

Wed, 19 Nov 2025 01:35 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Nov 2025 01:35 AM IST
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The district hospital received injections, but there has been no cardiologist for six years.
जनपद में 253 चिकित्सकों की जरूरत हैं। अस्पतालों में 93 में पद 15 साल से खाली हैं। जिला अस्पताल में 6 साल से हृदय रोग विशेषज्ञ (कॉर्डियोलॉजिस्ट) नही है।
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जिला अस्पतास्ल में पहली बार हार्ट अटैक की शिकायत होने पर मरीजों को दिए जाने वाले टेनेक्टेप्लाज या स्ट्रेप्टोकाइनेज के इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक इस इंजेक्शन की कीमत बाजार में 50 हजार रुपये से अधिक हैं।
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जनपद में कुल 23 सीएचसी और 72 पीएचसी हैं। यहां 253 कुल चिकित्सकों के पद हैं। लेकिन, किसी अस्पताल में एक तो कहीं दो डॉक्टर है।
अस्पतालों में डॉक्टर की कमी होने से सबसे अधिक परेशानी प्रसव के बाद मरीजों को होती है। नवजात की तबीयत खराब होने पर उसके परिजन परेशान हो जाते हैं।
ठंड बढ़ने के साथ ही हृदयरोगियों की भी संख्या बढ़ गई है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल की ओपीडी में 1200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 15-20 मरीज हृदय रोग से परेशान होते हैं।
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अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं होने के कारण उन्हें रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में हृदय रोगिरों को बचाने के लिए 50 हजार रुपये से अधिक कीमत के इंजेक्शन उपलब्ध है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके राय ने बताया कि अस्पताल में यदि कोई हार्ट अटैक का मरीज आता है तो सबसे पहले उसकी ईसीजी जांच की जाती है। जांच रिपोर्ट में हार्ट अटैक की पुष्टि होने पर मरीज को उसे इंजेक्शन लगाया जाता है।

मरीज की जान बचाने के लिए कम से कम दो घंटे का समय मिल जाता है। इस अवधि में मरीज को स्थिर अवस्था में बीएचयू या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। जनजीवन पट्टी सुरेश तिवारी ने बताया कि सीने में दर्द होने पर होने पर वे जिला अस्पताल गए थे। वहां उन्हें विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं मिले। वे मायूस होकर घर लाैट आए। बरसठी निवासी अनिल ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें भी माइनर हार्ट अटैक हुआ था। वे भी जिला अस्पताल गए थे। वहां डाॅक्टर न होने पर उन्हें रेफर कर दिया गया। मछली शहर निवासी आशीष ने बताया कि जिला अस्पताल में हृदय रोग के डाॅक्टर के न होने से मरीजों को परेशानी होती है।
घनश्यामपुर के पवन ने बताया किे वे निजी अस्पताल में इलाज कराते है। उनका पैसा ज्यादा लग जाता है।
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