{"_id":"5f5a6f4e8ebc3e43984e5c2b","slug":"the-cost-of-medical-college-increased-by-43-crores-due-to-slow-construction-speed-jaunpur-news-vns546538982","type":"story","status":"publish","title_hn":"धीमी निर्माण गति से 43 करोड़ बढ़ी मेडिकल कॉलेज की लागत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धीमी निर्माण गति से 43 करोड़ बढ़ी मेडिकल कॉलेज की लागत
विज्ञापन
सिद्दीकपुर स्थित निर्माणाधीन मेडिकल कालेज ।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। जिस मेडिकल कॉलेज को वर्ष 2018 तक बनकर तैयार हो जाना था, वह अब तक महज 45 फीसदी ही बन पाया है। निर्माण की इस धीमी गति का असर परियोजना की लागत पर पड़ा है। कच्चे माल की महंगाई के कारण करीब 43 करोड़ रुपये लागत बढ़ गई है। कार्यदायी संस्था ने 597 करोड़ का पुनरीक्षित बजट शासन को भेजा है। नया बजट स्वीकृति होने के बाद ही काम में तेजी आएगी। फिलहाल पांच सौ बेड के इस मेडिकल कॉलेज को बनाने में 84 मजदूर लगाए गए हैं और पूरा करने की अवधि 2021 तय की गई है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की नींव सितंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सिद्दीकपुर के बंद पड़े कताई मिल परिसर रखी थी। तब पांच सौ बेड वाले अस्पताल और कॉलेज निर्माण का 554 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था। इसे जून 2018 तक बनकर तैयार हो जाना था। राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था बनाते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया गया। शुरुआत में काम बहुत तेजी से हुआ, मगर कुछ वर्षों बाद ही इसकी रफ्तार थम गई। डेडलाइन खत्म होने के दो वर्ष बाद भी 45 फीसदी ही काम ही पूरा हो पाया है। परियोजना स्वीकृति के समय की तुलना में आज गिट्टी, बालू, सीमेंट, सरिया, माल ढुलाई आदि की कीमतें बढ़ चुकी हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने 43 करोड़ रुपये अतिरिक्त की मांग की है।
मेडिकल कॉलेज के लिए 554 करोड़ रुपये का बजट वर्ष 2014 में स्वीकृत हुआ था। तब से कच्चे माल के रेट में काफी वृद्धि हुई है। शासन के निर्देश पर पुनरीक्षित आगणन 597 करोड़ रुपये का भेजा गया है। बजट की अनमुति मिलते ही निर्माण कार्य को तेजी के साथ पूरा कराया जाएगा। लॉक डाउन में कुछ दिनों को छोड़कर कभी भी काम रुका नहीं है। अभी भी नियमित चल रहा है। -एमपी सिंह, परियोजना प्रबंधक, राजकीय निर्माण निगम आजमगढ़ इकाई।
विज्ञापन
कताई मिल के सामानों के लिए दो कंपनियों की बीच खींचतान
करंजाकला। मेडिकल कॉलेज के निर्माण का निर्माण कताई मिल की जमीन पर हो रहा है। मिल के पुराने भवन को गिराने और वहां की मशीनों की खरीद के लिए दो कंपनियों में खींचतान शुरू हो गई है। भवन और मशीन की अलग-अलग खरीद करने वाली कंपनियां उन सामानों को लेने की फिराक में हैं, जिनकी नीलामी ही नहीं हुई। इसे लेकर बृहस्पतिवार को दोनों के प्रतिनिधियों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा।
यूपी यार्न कंपनी सिद्दीकपुर के ध्वस्तीकरण और कताई मिल के मशीनों की अलग-अलग नीलामी हुई थी। एचबी कंपनी अहमदाबाद ने कताई मिल की मशीनों को 2 करोड़ 88 लाख रुपये की बोली लगाकर खरीदा है। वहीं गणेश कंस्ट्रक्शन कंपनी बांबे ने ध्वस्तीकरण ईंट पत्थर की खरीद 81 लाख में की है। मामला तब उलझा, जब दोनों कंपनियां कताई मिल के कार्यालय में रखी कुर्सी मेज आलमारी और बर्तनों पर भी अपना हक जताने लगी। दोनों कंपनियां ने यह दावा किया कि यह सामान उनके टेंडर में है। मामला यूपी यार्न कंपनी कानपुर को लिखित दिया, लेकिन कंपनी ने दोनों खरीद कम्पनियों को सामान लेने को मना कर दिया। अपने सिक्योरिटी गार्ड उमराव सिंह को माल की देखरेख करने के लिए लगा दिया है। दोनों कंपनियों को एक अगस्त से 3 महीने में सारे सामान को बाहर कर मेडिकल कॉलेज की जमीन को हैंडओवर कर देना है।
विज्ञापन
राजकीय मेडिकल कॉलेज की नींव सितंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सिद्दीकपुर के बंद पड़े कताई मिल परिसर रखी थी। तब पांच सौ बेड वाले अस्पताल और कॉलेज निर्माण का 554 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था। इसे जून 2018 तक बनकर तैयार हो जाना था। राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था बनाते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया गया। शुरुआत में काम बहुत तेजी से हुआ, मगर कुछ वर्षों बाद ही इसकी रफ्तार थम गई। डेडलाइन खत्म होने के दो वर्ष बाद भी 45 फीसदी ही काम ही पूरा हो पाया है। परियोजना स्वीकृति के समय की तुलना में आज गिट्टी, बालू, सीमेंट, सरिया, माल ढुलाई आदि की कीमतें बढ़ चुकी हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने 43 करोड़ रुपये अतिरिक्त की मांग की है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के लिए 554 करोड़ रुपये का बजट वर्ष 2014 में स्वीकृत हुआ था। तब से कच्चे माल के रेट में काफी वृद्धि हुई है। शासन के निर्देश पर पुनरीक्षित आगणन 597 करोड़ रुपये का भेजा गया है। बजट की अनमुति मिलते ही निर्माण कार्य को तेजी के साथ पूरा कराया जाएगा। लॉक डाउन में कुछ दिनों को छोड़कर कभी भी काम रुका नहीं है। अभी भी नियमित चल रहा है। -एमपी सिंह, परियोजना प्रबंधक, राजकीय निर्माण निगम आजमगढ़ इकाई।
विज्ञापन
कताई मिल के सामानों के लिए दो कंपनियों की बीच खींचतान
करंजाकला। मेडिकल कॉलेज के निर्माण का निर्माण कताई मिल की जमीन पर हो रहा है। मिल के पुराने भवन को गिराने और वहां की मशीनों की खरीद के लिए दो कंपनियों में खींचतान शुरू हो गई है। भवन और मशीन की अलग-अलग खरीद करने वाली कंपनियां उन सामानों को लेने की फिराक में हैं, जिनकी नीलामी ही नहीं हुई। इसे लेकर बृहस्पतिवार को दोनों के प्रतिनिधियों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा।
यूपी यार्न कंपनी सिद्दीकपुर के ध्वस्तीकरण और कताई मिल के मशीनों की अलग-अलग नीलामी हुई थी। एचबी कंपनी अहमदाबाद ने कताई मिल की मशीनों को 2 करोड़ 88 लाख रुपये की बोली लगाकर खरीदा है। वहीं गणेश कंस्ट्रक्शन कंपनी बांबे ने ध्वस्तीकरण ईंट पत्थर की खरीद 81 लाख में की है। मामला तब उलझा, जब दोनों कंपनियां कताई मिल के कार्यालय में रखी कुर्सी मेज आलमारी और बर्तनों पर भी अपना हक जताने लगी। दोनों कंपनियां ने यह दावा किया कि यह सामान उनके टेंडर में है। मामला यूपी यार्न कंपनी कानपुर को लिखित दिया, लेकिन कंपनी ने दोनों खरीद कम्पनियों को सामान लेने को मना कर दिया। अपने सिक्योरिटी गार्ड उमराव सिंह को माल की देखरेख करने के लिए लगा दिया है। दोनों कंपनियों को एक अगस्त से 3 महीने में सारे सामान को बाहर कर मेडिकल कॉलेज की जमीन को हैंडओवर कर देना है।