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कोरम पूरा करने तक सिमटा रहा अभियान,अभी भी घुम रहे हजारों छुट्टा पशु
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जिले में 17 दिनों तक चला अभियान सिर्फ कोरम पूरा करने तक सिमटा रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर को छुट्टा पशुओं से मुक्त होने का प्रमाण पत्र ईओ और ग्रामीण क्षेत्रों क मुक्त होने का प्रमाण पत्र बीडीओ की ओर से दिया जा चुका है, लेकिन हाल यह है कि अभियान चलने के बाद भी छुट्टा पशुओं को लगाम नहीं लग सका है। वे आज भी झुंड के झुंड इधर -उधर घुम रहे हैं, जो लोगों के लिए जान का दुश्मन बन रहे हैं।वहीं किसानों के फसलों को भी क्षति कर रहे हैं, जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 82 गो शाला मौजूद है, जिसमें इस समय 10 हजार 800 पशु संरक्षित है, लेकिन अभी हजारों पशु नगर निकायों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में झुंड में घुम रहे हैं। इस दौरान वे फसलों को क्षति पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।वहीं उनको रास्ते में खड़े होने से आए दिन राहगीर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। चाहे दिन हो या रात,हर समय फसलों को इन पशुओं से बचाने के लिए खेतों की तरफ किसान टकटकी लगाए रहते हैं। वहीं यह पशु सड़कों पर लोगों के जान का दुश्मन भी बन रहे हैं। आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं,जिस पर लगाम लगाने के लिए शासन के निर्देश पर एक से लेकर 17 जनवरी तक अभियान चलाकर इन पशुओं को गौशाला में रखने का निर्देश दिया था, जिसके क्रम में नगर निकायों में अधिशासी अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ को अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ने का निर्देश दिया गया था। साथ ही ईओ को नगर निकायों और बीडीओ को ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं से मुक्त प्रमाण पत्र भी देना था, जिसके क्रम में 15 दिनों तक अभियान चलाकर कुल 847 पशु को पकड़ कर गौशाला भेजा गया। साथ ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को छुट्टा पशुओं से मुकत होने का प्रमाण पत्र भी जिम्मेदारों की ओर से दिया गया है,बावजूद इसके आज भी हजारों छुट्टा पशु खुले में इधर-उधर उटहल रहे हैं। चाहे वह शहर हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह-जगह झुंड के रुप में छुट्टा पशु घुम रहे रहें।
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जिले में 82 गो शाला मौजूद है, जिसमें इस समय 10 हजार 800 पशु संरक्षित है, लेकिन अभी हजारों पशु नगर निकायों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में झुंड में घुम रहे हैं। इस दौरान वे फसलों को क्षति पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।वहीं उनको रास्ते में खड़े होने से आए दिन राहगीर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। चाहे दिन हो या रात,हर समय फसलों को इन पशुओं से बचाने के लिए खेतों की तरफ किसान टकटकी लगाए रहते हैं। वहीं यह पशु सड़कों पर लोगों के जान का दुश्मन भी बन रहे हैं। आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं,जिस पर लगाम लगाने के लिए शासन के निर्देश पर एक से लेकर 17 जनवरी तक अभियान चलाकर इन पशुओं को गौशाला में रखने का निर्देश दिया था, जिसके क्रम में नगर निकायों में अधिशासी अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ को अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ने का निर्देश दिया गया था। साथ ही ईओ को नगर निकायों और बीडीओ को ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं से मुक्त प्रमाण पत्र भी देना था, जिसके क्रम में 15 दिनों तक अभियान चलाकर कुल 847 पशु को पकड़ कर गौशाला भेजा गया। साथ ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को छुट्टा पशुओं से मुकत होने का प्रमाण पत्र भी जिम्मेदारों की ओर से दिया गया है,बावजूद इसके आज भी हजारों छुट्टा पशु खुले में इधर-उधर उटहल रहे हैं। चाहे वह शहर हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह-जगह झुंड के रुप में छुट्टा पशु घुम रहे रहें।
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