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Jaunpur News: एलईडी स्क्रीन पर प्रचार करके एजेंसी कमा रही लाखों रुपये, पालिका कह रही हमें चव्वनी भी नहीं मिल रही

Sat, 10 Oct 2026 01:49 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:49 AM IST
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The agency is earning millions by advertising on the LED screen while the municipality says we arent even getting a penny
पालिटे​क्निक चौराहा ​स्थित पुलिस बूथ के ऊपर लगा अवैध एलईडी स्क्रीन। संवाद
जौनपुर। शहर में अवैध होर्डिंग के भरमार के बीच प्रतिष्ठानों के प्रचार के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है। ओलंदगंज में मंदिर के पास, पॉलिटेक्निक चौराहा, वाजिदपुर तिराहा, जेसीज चौराहा और सद्भावना पुल के पास पुलिस बूथ के ऊपर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। पचहटिया में एक ही स्क्रीन पर अलग-अलग संस्थानों के प्रचार किए जाते हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शुक्रवार को कई विज्ञापन एजेंसियों के संचालकों से बात की। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि एक यूनिपोल पर होर्डिंग लगाने के लिए 16 हजार रुपये के हिसाब से वार्षिक शुल्क जमा किया जाता है। इधर, नगर पालिका का दावा है कि उसको राजस्व नहीं मिल रहा है। पालिका के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 115 यूनिपोल हैं, जबकि एजेंसी संचालकों ने बताया कि शहर में यूनिपोल की संख्या 167 है।
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एक एलईडी स्क्रीन लगाकर संचालक कमाते हैं एक लाख रुपये महीने
नियम विरूद्ध तरीके से शहर के प्रमुख चौराहों पर एलईडी स्क्रीने लगी हैं। एजेंसी संचालकों ने बताया कि एलईडी स्क्रीन पर विज्ञापन के लिए महीने का पैकेज करीब 16 हजार रुपये है। दूसरी ओर, नगर पालिका का कहना है कि वह एलईडी स्क्रीन पर विज्ञापन का शुल्क नहीं लेती है। सवाल ये है कि पालिका शुल्क नहीं ले रही तो विज्ञापन के इस कारोबार में हो रही वसूली आखिर किसके स्तर से हो रही है। उसका हिसाब कौन रख रहा है। शहर में अब होर्डिंग से ज्यादा एलईडी स्क्रीन पर विज्ञापन करवाने का क्रेज बढ़ गया है। एक एलईडी स्क्रीन लगाकर संचालक महीने में लगभग एक लाख रुपये की कमाई करते हैं।
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नगर पालिका ने कहा- किसी ने नहीं ली अनुमति
नगर पालिका ने कहा है कि शहर में एलईडी स्क्रीन लगाने की अनुमति किसी ने नहीं ली है। इसके साथ ही इसके विज्ञापन की दर भी पालिका से तय नहीं की गई है। नपा के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
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एलईडी स्क्रीन लगाने के ये हैं नियम
एलईडी स्क्रीन लगाने के लिए स्थानीय निकाय की अनुमति जरूरी है।
निर्धारित शुल्क और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन करना जरूरी है।
निजी भवन या जमीन पर स्क्रीन लगाने की स्थिति में भूमि स्वामी की सहमति के साथ लागू विज्ञापन नियमों का पालन भी करना होता है।
सार्वजनिक संपत्ति पर स्क्रीन लगाने के लिए संबंधित विभाग की अनुमति भी आवश्यक है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की नीति के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्धारित अधिकार क्षेत्र में सामान्य विज्ञापन होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं है।

स्क्रीन से निकलने वाली तेज रोशनी या बदलते दृश्यों से वाहन चालकों का ध्यान भटकने की आशंका होने पर सड़क सुरक्षा के मानकों का पालन भी जरूरी है।

जानकारी मिली है कि शहर में पांच स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर प्रतिष्ठानों का प्रचार किया जा रहा है। अभी इनसे किसी तरह का शुल्क नहीं वसूल किया जा रहा है। इस मामले को बोर्ड की बैठक में उठाया जाएगा। प्रस्ताव पारित करके नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - धर्मराज राम, ईओ
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