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जौनपुर में आश्रय स्थलों में ठंड से चार दिन में दस पशुओं की मौत
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धर्मापुर। ठंड का मौसम शुरू हो गया है और इसके साथ ही पशु आश्रय स्थलों में रह रहे पशुओं की दुर्दशा भी बढ़ गई है। खुले आसमान के नीचे रह रहे पशु ठंड की मार के आगे जीवन हार रहे हैं। इमलोपट्टी गांव के सरस हाट में बनी अस्थाई आश्रय स्थल में चार दिनों के अंदर दस पशुओं की मौत हो चुकी है। इसमें तीन मवेशियों ने शुक्रवार को ही दम तोड़ दिया। चार की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। जिम्मेदार इससे बेखबर बने हुए हैं। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
इमलो पांडेय पट्टी गांव के आश्रय स्थल में 71 गोवंश रखे गए हैं। इसमें से चार दिनों में 10 पशुओं ने दम तोड़ दिया है। पशुओं की मौत का सिलसिला लगातार बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार इसका कोई ठोस उपाय नहीं कर रहे हैं। आस-पास के लोगों ने बताया कि लगभग पांच दिन से पशु चिकित्सा अधिकारी धर्मापुर धर्मेंद्र कुमार सिंह भी पशुओं की स्थिति को देखने के लिए नहीं आए है। ठंड लगने से इलाज के अभाव में बेजुबान पशु मरते जा रहे हैं। पशुओं की मौत होने के बाद उन्हें गोशाला के पास में ही छोटा सा गड्ढा बनाकर दफना दिया जाता है। गड्ढा छोटा होने के कारण दुर्गंध आने से दिक्कत होती है। अभी कुछ महीने पहले ही डीएम भी गौशाले का निरीक्षण किया था। बावजूद यहां व्यवस्थाएं सुदृढ़ नहीं हो पाई हैं।
पशु आश्रय स्थल में पशुओं की मौत की जानकारी नहीं है। जहां तक उनको छांव में रखने की बात है तो इसकी शीघ्र ही व्यवस्था की जाएगी, जिससे पशुओं को ठंड में परेशानी न हो। - अनुराग प्रसाद, डिप्टी कलेक्टर।
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इमलो पांडेय पट्टी गांव के आश्रय स्थल में 71 गोवंश रखे गए हैं। इसमें से चार दिनों में 10 पशुओं ने दम तोड़ दिया है। पशुओं की मौत का सिलसिला लगातार बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार इसका कोई ठोस उपाय नहीं कर रहे हैं। आस-पास के लोगों ने बताया कि लगभग पांच दिन से पशु चिकित्सा अधिकारी धर्मापुर धर्मेंद्र कुमार सिंह भी पशुओं की स्थिति को देखने के लिए नहीं आए है। ठंड लगने से इलाज के अभाव में बेजुबान पशु मरते जा रहे हैं। पशुओं की मौत होने के बाद उन्हें गोशाला के पास में ही छोटा सा गड्ढा बनाकर दफना दिया जाता है। गड्ढा छोटा होने के कारण दुर्गंध आने से दिक्कत होती है। अभी कुछ महीने पहले ही डीएम भी गौशाले का निरीक्षण किया था। बावजूद यहां व्यवस्थाएं सुदृढ़ नहीं हो पाई हैं।
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पशु आश्रय स्थल में पशुओं की मौत की जानकारी नहीं है। जहां तक उनको छांव में रखने की बात है तो इसकी शीघ्र ही व्यवस्था की जाएगी, जिससे पशुओं को ठंड में परेशानी न हो। - अनुराग प्रसाद, डिप्टी कलेक्टर।
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