फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Taking bath in the morning, eating khichdi and flying kites

सुबह होना स्नान-दान, फिर खिचड़ी खाकर उड़ाएंगे पतंग

Wed, 13 Jan 2021 11:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jan 2021 11:35 PM IST
विज्ञापन
Taking bath in the morning, eating khichdi and flying kites
मकर संक्रान्ति के की पूर्व संध्या पर लाई चूड़ा इत्यादि की खरीदारी करते लोग। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। स्नान-दान का पावन पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को जिले में धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए बुधवार को नदी-तालाब के घाटों से लेकर घरों में तैयारियां जोरों पर रहीं। घरों में महिलाएं गुड़-तिल की मिठाई बनाने में मशगूल रहीं तो बच्चे पतंगबाजी की तैयारी में रहे। बाजारों में भी इससे जुड़े सामानों की दुकान पर दिन भर खरीदारों की भीड़ रही। बहन-बेटियों के घर खिचड़ी पहुंचाने के लिए लोग खरीदारी करते रहे।
विज्ञापन

मकर संक्रांति का उल्लास कई दिन पहले से ही बाजारों में दिख रहा था। शहर के पॉलीटेक्निक चौराहा, रुहट्टा, ओलंदगंज, कोतवाली, शकरमंडी, सब्जी मंडी आदि इलाकों में लाई-चूड़ा, तिल-गुड़ से बनी मिठाइयों की दुकानें सजी हुई थीं। इस पर लोग खरीदारी भी कर रहे थे, मगर बुधवार को त्योहार से ठीक पहले खरीदारों की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही बाजार में सजी दुकानों पर लोग खरीदारी करते नजर आए। शहर के प्रमुख पपड़ी विक्रेता फिरतू राम ने बताया कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार महंगाई बढ़ने से ग्राहकों का रुझान कम है। कोविड-19 के कारण बाजार में पहले जैसा उत्साह नहीं है। फिर भी लोग परंपरा का निर्वहन करते हुए खरीदारी कर रहे हैं। बहन-बेटियों के घर खिचड़ी भेजने वालों की संख्या खरीदारों में अधिक है। पतंगबाजी के शौकीन त्योहार पर पतंग उड़ाने के लिए थोक में पतंगों की खरीदारी करते रहे। बच्चों और युवाओं की भीड़ अधिक थी। उधर, मकर संक्रांति पर स्नान के महत्व को देखते हुए शहर के गोमती घाटों पर साफ-सफाई की जाती रही। शाही पुल व सद्भावना पुल को झालर से सजाया गया है। सई-गोमती के संगम राजेपुर त्रिमुहानी घाट के अलावा अन्य घाटों के किनारे भी तैयारी होती रही।
विज्ञापन

सकारात्मकता का प्रतीक है मकर संक्रांति
पं. रवि पांडेय के मुताबिक मकर संक्रांति पर पुण्य काल सुबह से ही शुरू हो जाएगा। सुबह 8.30 बजे के बाद का मुहूर्त अच्छा है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति सकारात्मकता का भी प्रतीक है। दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता और उत्तरायण को देवताओं के दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। गंगास्नान व गंगातट पर दान को अत्यंत शुभ माना गया है। पानी में तिल मिलाकार स्नान करें। पूर्वाभिमुख होकर गायत्री मंत्र का जप करें। पूजा-अर्चना में भगवान को भी तिल और गुड़ से बने सामग्रियों का भोग लगाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed