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Jaunpur News: दीपों की लड़ियां सजीं, जगमग हुए आदि गंगा के घाट
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जौनपुर। देव दीपावली के उपलक्ष्य में जिले के कोने-कोने में भव्य तैयारी की गई है। असंख्य दीपों से घाटों को सजाया जा रहा है। गोपीघाट, गोकुल घाट और विसर्जन घाट पर कुछ लोगों ने रविवार को ही पर्व मनाते हुए दीपदान किया। हालांकि अधिकांश जगह सोमवार को देव दीपावली मनाई जाएगी। जब शाम को हजारों की संख्या में एक साथ दीप जल उठेेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे तारे आसमां से जमीं पर उतर आए हों। रविवार की शाम को ही इसकी तैयारी शुरू कर दी गई।
जौनपुर के पुरानी बाजार मोहल्ला स्थित गोकुल घाट पर 15 साल से देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। रविवार को यहां रंगोली प्रतियोगिता के बाद आदि गंगा गोमती पूजन, दीपदान और महाआरती और आखिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पूर्व सांसद धनंजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप मौजूद रहे। साथ ही देव दीपावली समिति के संस्थापक पंडित आनंद मिश्र, अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, महासचिव मनीष गुप्ता आदि लोग मौजूद थे। इसके अलावा गोपी घाट और विसर्जन घाट पर भी दीपदान हुआ। सद्भावन पुल समेत जगह-जगह आकर्षक लाइटों की भव्य सजावट की गई है। उधर, आदि गंगा गोमती के तट पर विसर्जन घाट, सूरज घाट पर सोमवार को दीप दान कर देव दीपावली मनायी जाएगी।
पिलकिछा घाट पर लगेगी आस्था की डूबकी
खुटहन। कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोमती नदी के पिलकिछा घाट पर सोमवार को सैकड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा कर पुुण्य अर्जित करेंगे। घाट के बगल स्थित भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता व बजरंग बली के मंदिर में श्रद्धालु दर्शन पूजन भी करेंगे। यहां ऐतिहासिक साप्ताहिक मेला भी लगता है। यहां की मान्यता है कि प्रभु श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद वानर सेना के साथ पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौट रहे थे तो उनका विमान कुछ क्षणों के लिए इस घाट पर उतरा था। यहां स्वयं भगवान और उनकी सेना ने स्नान कर गोमती का पवित्र जल ग्रहण किया था। यहां का मेला कृषि औजारों, मिट्टी के बर्तन के लिए चर्चित है। मेले में दो से पांच किग्रा तक के गट्टे विशेष आकर्षण होते हैं।
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51 हजार दीपों से सजेगा शीतला चौकियां धाम
धर्मापुर। शीतला चौकियां धाम में सोमवार को देव दीपावली मनायी जाएगी। यहां सरोवर को 51 हजार दीपों से सजाया जाएगा। मंदिर की साफ-सफाई के साथ ही पूर्णिमा के दिन मां शीतला का शृंगार किया जाएगा। मंदिर को झालरों से सजाया जा रहा है।
सई गोमती के संगम तट पर लगेगा मेला
जफराबाद। सई उतरि गोमती नहाये, चौथे दिवस अवधपुर आए। श्री रामचरित मानस की इस चौपाई को जौनपुर के राजपुर त्रिमुहानी से जोड़कर देखा जाता है। यहां सई और गोमती नदी का संगम तट है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान राम के के चरण पड़े थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान रामचंद्र जी जब लंका से अत्याचारी रावण को मारकर वापस अयोध्या जा रहे थे तब इसी रास्ते गए थे। यहां सई-गोमती के संगम तट पर स्नातक किए और यहां से अयोध्या के लिए प्रस्थान किए थे। कुछ लोग इस चौपाई को भरत जी से जोड़कर देखते हैं।
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जौनपुर के पुरानी बाजार मोहल्ला स्थित गोकुल घाट पर 15 साल से देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। रविवार को यहां रंगोली प्रतियोगिता के बाद आदि गंगा गोमती पूजन, दीपदान और महाआरती और आखिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पूर्व सांसद धनंजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप मौजूद रहे। साथ ही देव दीपावली समिति के संस्थापक पंडित आनंद मिश्र, अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, महासचिव मनीष गुप्ता आदि लोग मौजूद थे। इसके अलावा गोपी घाट और विसर्जन घाट पर भी दीपदान हुआ। सद्भावन पुल समेत जगह-जगह आकर्षक लाइटों की भव्य सजावट की गई है। उधर, आदि गंगा गोमती के तट पर विसर्जन घाट, सूरज घाट पर सोमवार को दीप दान कर देव दीपावली मनायी जाएगी।
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पिलकिछा घाट पर लगेगी आस्था की डूबकी
खुटहन। कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोमती नदी के पिलकिछा घाट पर सोमवार को सैकड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा कर पुुण्य अर्जित करेंगे। घाट के बगल स्थित भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता व बजरंग बली के मंदिर में श्रद्धालु दर्शन पूजन भी करेंगे। यहां ऐतिहासिक साप्ताहिक मेला भी लगता है। यहां की मान्यता है कि प्रभु श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद वानर सेना के साथ पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौट रहे थे तो उनका विमान कुछ क्षणों के लिए इस घाट पर उतरा था। यहां स्वयं भगवान और उनकी सेना ने स्नान कर गोमती का पवित्र जल ग्रहण किया था। यहां का मेला कृषि औजारों, मिट्टी के बर्तन के लिए चर्चित है। मेले में दो से पांच किग्रा तक के गट्टे विशेष आकर्षण होते हैं।
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51 हजार दीपों से सजेगा शीतला चौकियां धाम
धर्मापुर। शीतला चौकियां धाम में सोमवार को देव दीपावली मनायी जाएगी। यहां सरोवर को 51 हजार दीपों से सजाया जाएगा। मंदिर की साफ-सफाई के साथ ही पूर्णिमा के दिन मां शीतला का शृंगार किया जाएगा। मंदिर को झालरों से सजाया जा रहा है।
सई गोमती के संगम तट पर लगेगा मेला
जफराबाद। सई उतरि गोमती नहाये, चौथे दिवस अवधपुर आए। श्री रामचरित मानस की इस चौपाई को जौनपुर के राजपुर त्रिमुहानी से जोड़कर देखा जाता है। यहां सई और गोमती नदी का संगम तट है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान राम के के चरण पड़े थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान रामचंद्र जी जब लंका से अत्याचारी रावण को मारकर वापस अयोध्या जा रहे थे तब इसी रास्ते गए थे। यहां सई-गोमती के संगम तट पर स्नातक किए और यहां से अयोध्या के लिए प्रस्थान किए थे। कुछ लोग इस चौपाई को भरत जी से जोड़कर देखते हैं।