सड़कें हुईं खूनी, सफर खतरनाक
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कब कहां, कौन सड़क पर खड़े वाहन से टकरा जाएगा, इसका कोई ठिकाना नहीं है। इसकी वजह से आए दिन लोग हादसे के शिकार हो रहे हैं और उनका परिवार बर्बाद हो रहा है। इतने हादसों के बावजूद पुलिस और परिवहन विभाग चुप्पी साधे हुए है,
जबकि परिवहन विभाग ने मई के 27 दिनों में पांच करोड़ पांच लाख का राजस्व वाहनों से वसूला है।परिवहन विभाग की मानें तो जिले में प्रतिदिन करीब तीन लाख वाहन फर्राटा भरते हैं। जिसमें रोडवेज की बसें और अन्य जिलों के वाहन भी शामिल हैं।
इसमें वाराणसी-लखनऊ, आजमगढ़-इलाहाबाद और वाराणसी-आजमगढ हाईवे शामिल हैं। लोग करोड़ों रुपए गाड़ियों का टैक्स देते हैं। बावजूद उनका सफर आसान बनाने के लिए कोई इंतजाम परिवहन और पुलिस एवं अन्य विभागों की ओर से नहीं है।
न तो सड़कें अच्छी हैं और न ही सफर आसान है। जाम में फंसकर घंटों लोग जूझते हैं और सड़क पर खड़े ट्रक जैसे वाहनों से भिड़कर हादसों के शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह से कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं।दुर्घटना बहुल इलाके का बोर्ड लगाकर लोक निर्माण भी बैठ गया है। सबसे खराब स्थिति सड़क पर खड़े वाहनों की है।
रात में ट्रक चालक हाईवे पर कहीं भी ट्रक खड़ाकर देते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि सामने से आ रहे वाहनों की लाइट की तेज रोशनी चालक की आंखों पर पड़ती है और सड़क पर खड़ा वाहन दिखाई नहीं देता। लिहाजा उसी रफ्तार में वाहन चालक खड़े वाहन से भिड़कर हादसे का शिकार हो जाते हैं।