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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Special on Teachers' Day: Khan sisters lighting the light of education in the lives of poor children

शिक्षक दिवस पर विशेषः गरीब बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी जला रहीं खान सिस्टर्स

Thu, 05 Sep 2019 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 Sep 2019 12:27 AM IST
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Special on Teachers' Day: Khan sisters lighting the light of education in the lives of poor children
जौनपर। बेसहारा और गरीब बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का काम तारापुर मालीपुर की खान सिस्टर्स कर रही हैं। यह करीब 160 से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षित कर रही हैं। नगर के कटघरा मोहल्ला निवासी 12 वर्षीय शबन एक साल पहले तक कूड़े के ढेर और नालियों से प्लास्टिक बटोरने का काम करती थी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह हम उम्र अन्य लड़कियों की तरह कभी स्कूल भी जाएगी। लेकिन अब न सिर्फ शबन की जिंदगी कूड़े से दूर हो गई बल्कि वह हिंदी और उर्दू की कोई भी किताब फर्राटे से पढ़ सकती है। उसे अंग्रेजी और गिनती का भी ज्ञान हो गया है। अब वह पढ़ लिखकर शिक्षक बनना चाहती है। सिर्फ शबनम ही नहीं मेराज, शेराज, सानिया, आसमा जैसे कई अन्य बच्चे हैं जो कूड़ा बीनने का काम छोड़कर अब तालीम हासिल कर रहे हैं।
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तारापुर मालीपुर निवासी नसीर खान की बेटियां रजिया सुल्तान, सीमा खान, फरहद खान, रुखसार खान और निगहत खान ने गरीबी के चलते खुद तो उतनी पढ़ाई नहीं कर सकीं जितना वो चाहती थीं। लेकिन अब इन बहनों ने यह ठान लिया है कि गरीबी के चलते वे किसी बच्चे को पढ़ाई से वंचित नहीं होनें देंगीं। जहरा फाउंडेशन के बैनर तले इन बहनों ने अपने छोटे से घर में निशुल्क कोचिंग सेंटर खोल रखा है। खुद का खर्च वे कपड़ों की सिलाई कर के चलाती है और समय निकाल कर गरीब, यतीम बच्चों को पढ़ाती हैं। मौजूदा समय में जेहरा कोचिंग सेंटर में 160 से अधिक बच्चे नियमित रूप से पढ़ने आते हैं। इनमें से तमाम बच्चों को वे घर पर खाना भी खिलाती हैं। उन्हें अपने पास से कापी, कलम, बैग और ड्रेस भी देती हैं। शहर के तारापुर मालीपुर मोहल्ले व आस पास को मोहल्लों में भी सरकारी स्कूल नहीं है। गरीब बच्चों को मां बाप प्राइवेट स्कूल में उन्हें नहीं भेज सकते। ऐसे में गरीब बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। तमाम बच्चे पूरे दिन कूड़ा बीनने का काम करते थे। जहरा फाउंडेशन की रजिया सुल्तान कहती हैं कि अब उन सभी बहनों की जिंदगी का एक ही मक्सद है कि गरीबी के चलते स्कूल न जाने वाले बच्चों को खोजकर उन्हें शिक्षा की मुख्य धार से जोड़ें। बच्चे शिक्षिक हो जाएंगे तो वे खुद से जिंदगी चलाने की राह ढूंढ़ लेंगे।
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