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शिक्षक दिवस पर विशेष : खेल के जरिये पढ़ाई, नवाचार से स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाई

Sat, 05 Sep 2026 01:43 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:43 AM IST
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Special on Teacher's Day: Increasing the number of children in schools through learning via games and innovation
जौनपुर। सरकारी स्कूलों के प्रति अब लोगों की धारणाएं बदल रही हैं। परिषदीय स्कूलों के शिक्षक मेहनत और अनोखी सोच से मिसाल पेश कर रहे हैं। कई स्कूलों में खेल के जरिये पढ़ाई और नवाचार से स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी है। बीते कुछ साल पहले तक जिस स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घट रही थी, वहां अब दाखिले के लिए कतार लग रही है। शिक्षक दिवस पर हम पांच शिक्षकों की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को अपनाया है।
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खेल-खेल में सीखने, पढ़कर सीखें की पहल लाई रंग
मुंगराबादशाहपुर। कंपोजिट विद्यालय गरियांव के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय मिश्र ने खेल-खेल में सीखने और पढ़कर सीखें की पहल ने विद्यालय को नई पहचान दिलाई। साल 2015 में 36 बच्चों की संख्या से शुरू हुआ सफर अब 392 बच्चों तक पहुंच गया है। पढ़ाई को कभी बोझ नहीं, खेल गतिविधियों से जोड़ने के साथ ही नई पहल रंग लाई। संजय मिश्र की इसी लगन और मेहनत के कारण उनको राज्य पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। वे पांच सितंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किए जाएंगे।
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नवाचार से बदली सेहलमपुर की तस्वीर, पांच साल से हाउसफुल
सिरकोनी। परिषदीय स्कूलों में सफाई, शिक्षा की गुणवत्ता के साथ अनुशासन के कारण बीते पांच सालों में छात्रों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि स्कूल में नो एंट्री का बोर्ड लगाना पड़ा। प्रधानाध्यापक रईस खान की पहल से कंपोजिट विद्यालय सेहमलपुर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। सत्र 2026 -27 में 470 बच्चोें का प्रवेश हो चुका है। आईसीटी लैब के माध्यम से बच्चे प्रौद्योगिकी में नई-नई दक्षताओं को सीख रहे हैं। लर्निंग बॉय डूइंग लैब में बच्चे विज्ञान एवं गणित के कठिन बिंदुओं को व्यावहारिक तरीके से समझ रहे हैं। सेहमलपुर से रईस खान, खलीलपुर विद्यालय से पंकज शिक्षक दिवस पर सम्मानित किए जाएंगे।
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अनुशासन से बनी तरियारी स्कूल की पहचान
चंदवक। पूर्व माध्यमिक विद्यालय तरियारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक अखिलेश यादव ने नवाचार ने विद्यालय की सूरत बदल दी। बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता और अनुशासन ने ऐसा माहौल तैयार किया है कि बच्चों की संख्या बढ़कर 282 तक पहुंच गई है। बच्चे ड्रेस में आते हैं। विद्यालय परिसर में व्यवस्था और अनुशासन की अलग ही तस्वीर दिखाई देती है। मेहनत और बच्चों के प्रति उनके समर्पण का ही परिणाम है कि आज यह विद्यालय क्षेत्र के अन्य परिषदीय विद्यालयों के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है।
निजी स्कूल को मात दे रहा बदलापुर इंग्लिश मीडियम स्कूल
बदलापुर: अभिनव इंग्लिश मीडियम स्कूल पुरानी बाजार की राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित प्रधानाध्यापिका विभा शुक्ला की अनोखी पहल आओ करके सीखें के जरिए विद्यालय की अलग पहचान बनाया है। साल 2011 में नियुक्ति के समय इस विद्यालय में 175 छात्र थे। आज छात्रों की संख्या बढ़कर 356 पहुंच गई है। बच्चों के साथ खेल-खेल में सिखाने की प्रवृत्ति को लोग सराह रहे हैं। छात्र यहां नामांकन कराने के लिए खुद आते हैं। कविता, कहानी, कला, गीत से पढ़ाकर बच्चों को शिक्षा की तरफ मोड़ने के लिए अनोखी पहल करती है।

स्मार्ट क्लास से अभिभावकों का बढ़ा भरोसा
मड़ियाहूं। प्राथमिक विद्यालय सुगुलपुर में तैनात शिक्षक शिवलाल पटेल के नवाचार की पहल से विद्यालय बीते पांच साल में काफी तरक्की किया। साल 2019 में विद्यालय में नियुक्ति के समय यहां 93 बच्चे पढ़ते थे। शिक्षण व्यवस्था प्रतियोगिता, कविता व गीत से उन्होंने छात्रों को आकर्षित किया। विद्यालय परिसर को प्राकृतिक एवं आकर्षक रूप दिया। परिणाम स्वरूप अभिभावकों का भरोसा बढ़ा और वर्तमान में विद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़कर 140 पहुंच गई। स्मार्ट क्लास और प्रोजेक्टर से अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ा है।
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