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सपा और भाजपा का नारा, नया अध्यक्ष हमारा
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जौनपुर। जिला पंचायत सदस्य के नतीजे सामने आने के बाद अध्यक्ष पद के लिए घमासान शुरू हो गया है। सत्ताधारी भाजपा जहां अगला अध्यक्ष अपना बनाने के लिए जोड़-तोड़ में जुट गई है तो सपा भी यह कुर्सी अपने पाले में बरकरार रखने की कोशिश में है। इसके लिए सपा ने ऐसे सभी विजेता प्रत्याशी को अपने खेमे में एकजुट करना शुरू कर दिया है, जो कभी न कभी पार्टी से जुड़े रहे हैं। उधर, निर्दलीय खेमा भी पूरे उत्साह में है। दलों के दलदल से निकलकर जिला पंचायत में अपनी सरकार बनाने के लिए उन्होंने हाथ-पांव मारने शुरू कर दिए हैं।
83 सदस्यों वाले जिला पंचायत में इस बार अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी महिला को ही आसीन होना है। लिहाजा सदस्य पद के चुनाव में भी सभी दिग्गजों ने अपने परिवार की महिलाओं की मैदान में उतारा था। इनमें से कइयों को मुंह की खानी पड़ी तो कुछ ने जीत का परचम भी लहराया है। अब वह अध्यक्ष की कुर्सी को साधने में जुटी हुई हैं। भाजपा यह दावा कर चुकी है कि अगला अध्यक्ष उनका ही होगा। हालांकि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम उनके अनुकूल नहीं रहे हैं। पहली बार पंचायत चुनाव में खुलकर हिस्सा लेने वाली भाजपा ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन मंगलवार की शाम तक घोषित परिणामों में करीब 12 सीटें ही भाजपा के हिस्से में आई थीं। वहीं बसपा के समर्थित नौ उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस, आप का खाता नहीं खुल सका, जबकि एक सीट एआईएमआईएम की भी झोली में गई है। खास बात यह कि सपा ने इस बार सभी सीटों पर कार्यकर्ताओं को खुला छोड़ दिया था। किसी को अधिकृत रूप से प्रत्याशी नहीं बनाया। अब चुनाव नतीजों के बाद पार्टी 41 सीटों पर अपनी विचारधारा से जुड़े लोगों की जीत का दावा कर रही है। इन विजेताओं को सहेजने के लिए पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सक्रियता भी बढ़ा दी है। संख्या बल में यह आंकड़ा भले ही बड़ा हो, लेकिन चुनाव के वक्त दामन छुड़ाने वाली पार्टी के व्हीप पर अध्यक्ष के चुनाव में कितने साथ खड़े होंगे, कोई भरोसा नहीं। राजनीतिक दलों की इस जोड़-तोड़ के बीच निर्दलीय भी किसी से कम नहीं है। बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने अपनी पत्नी श्रीकला सिंह को वार्ड नंबर 45 से सबसे बड़ी जीत दिलाकर अपने मंसूबे पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं। उनके खेमे के लोग अभी से जीते निर्दलीय उम्मीदवारों को साधने में लगे हैं। जोड़-तोड़ के इस खेल में ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर अब सबकी निगाहें टिक गई हैं।
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भाजपा से आगे निकला अपना दल
जौनपुर। पंचायत चुनाव में अपना दल-एस ने जिले में शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पप्पू माली के मुताबिक मछलीशहर जिला इकाई ने 12 वार्डों में प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। इसमें छह के हिस्से में जीत आई है। इसमें वार्ड नंबर 54 वसंत पटेल, वार्ड नंबर 55 से लल्लन सरोज, वार्ड नंबर 56 से सुनीता वर्मा, वार्ड 57 से वरुण दुबे, वार्ड नंबर 62 से सुनीता पटेल, वार्ड नंबर 59 से रीता पटेल शामिल हैं। जिलाध्यक्ष लाल बहादुर पटेल और विनायक पटेल ने विजेताओं को बधाई दी है। पप्पू माली ने बताया कि अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी की अहम भूमिका होगी। शीघ्र ही इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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पंचायत चुनाव के नतीजे बताते हैं कि जनता ने भाजपा को सिरे से नकार दिया है। समाजवादी विचारधारा के 41 लोग सदस्य का चुनाव जीतकर आए हैं। जौनपुर का जिला पंचायत अध्यक्ष सपा का था और आने वाले चुनाव में भी सपा का ही अध्यक्ष रहेगा। हमें भरोसा है कि आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी सभी नौ सीटों पर अपना परचम लहराएगी। -लालबहादुर यादव, जिलाध्यक्ष सपा।
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कई पदों के परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं। ऐसे में वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। सभी रिजल्ट आने के बाद परिणाम की समीक्षा की जाएगी। जहां तक अध्यक्ष पद का सवाल है तो इस पर शीर्ष नेतृत्व के निर्देश के आधार पर फैसला होगा। सबका साथ-सबका विकास के रूप में पार्टी पूरी दमदारी से अध्यक्ष का चुनाव लड़ेगी और जीतेगी भी। -पुष्पराज सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा।
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सत्ता के दुरुपयोग के बावजूद हमारे प्रत्याशियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रशासन पर सत्ता का दबाव न होता तो कई अन्य सीटों पर भी हमारी जीत होती। अध्यक्ष पद के लिए हमारे पास कई सुयोग्य उम्मीदवार हैं। पार्टी नेतृत्व जिसे कहेगी, उसे उम्मीदवार बनाकर मैदान में पूरी दमदारी से लड़ा जाएगा। -राजकुमार भारती, जिलाध्यक्ष बसपा।
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अध्यक्ष पद पर रहा है सपा-बसपा का दबदबा
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अब तक सपा-बसपा का ही दबदबा रहा है। पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद वर्ष 1995 में हुए पहले चुनाव में कमला सिंह अध्यक्ष चुनी गई थीं। इसके बाद वर्ष 2000 में बसपा की प्रभावती पाल निर्वाचित हुईं। वर्ष 2005 के चुनाव में सपा समर्थित कलावती यादव को अध्यक्ष की कुर्सी हासिल हुई। वर्ष 2010 के चुनाव में जब सूबे की सत्ता पर बसपा आसीन थी तो अध्यक्ष पद पर बसपा की अनीता सिद्धार्थ को बैठने का मौका मिला। सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष का भी तख्तापलट हुआ। कोर्ट के फैसले के बाद हुए चुनाव में सपा समर्थित शारदा चौधरी को कुर्सी हासिल हुई। वर्ष 2015 में सपा के ही राजबहादुर यादव जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।
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83 सदस्यों वाले जिला पंचायत में इस बार अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी महिला को ही आसीन होना है। लिहाजा सदस्य पद के चुनाव में भी सभी दिग्गजों ने अपने परिवार की महिलाओं की मैदान में उतारा था। इनमें से कइयों को मुंह की खानी पड़ी तो कुछ ने जीत का परचम भी लहराया है। अब वह अध्यक्ष की कुर्सी को साधने में जुटी हुई हैं। भाजपा यह दावा कर चुकी है कि अगला अध्यक्ष उनका ही होगा। हालांकि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम उनके अनुकूल नहीं रहे हैं। पहली बार पंचायत चुनाव में खुलकर हिस्सा लेने वाली भाजपा ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन मंगलवार की शाम तक घोषित परिणामों में करीब 12 सीटें ही भाजपा के हिस्से में आई थीं। वहीं बसपा के समर्थित नौ उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस, आप का खाता नहीं खुल सका, जबकि एक सीट एआईएमआईएम की भी झोली में गई है। खास बात यह कि सपा ने इस बार सभी सीटों पर कार्यकर्ताओं को खुला छोड़ दिया था। किसी को अधिकृत रूप से प्रत्याशी नहीं बनाया। अब चुनाव नतीजों के बाद पार्टी 41 सीटों पर अपनी विचारधारा से जुड़े लोगों की जीत का दावा कर रही है। इन विजेताओं को सहेजने के लिए पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सक्रियता भी बढ़ा दी है। संख्या बल में यह आंकड़ा भले ही बड़ा हो, लेकिन चुनाव के वक्त दामन छुड़ाने वाली पार्टी के व्हीप पर अध्यक्ष के चुनाव में कितने साथ खड़े होंगे, कोई भरोसा नहीं। राजनीतिक दलों की इस जोड़-तोड़ के बीच निर्दलीय भी किसी से कम नहीं है। बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने अपनी पत्नी श्रीकला सिंह को वार्ड नंबर 45 से सबसे बड़ी जीत दिलाकर अपने मंसूबे पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं। उनके खेमे के लोग अभी से जीते निर्दलीय उम्मीदवारों को साधने में लगे हैं। जोड़-तोड़ के इस खेल में ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर अब सबकी निगाहें टिक गई हैं।
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भाजपा से आगे निकला अपना दल
जौनपुर। पंचायत चुनाव में अपना दल-एस ने जिले में शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पप्पू माली के मुताबिक मछलीशहर जिला इकाई ने 12 वार्डों में प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। इसमें छह के हिस्से में जीत आई है। इसमें वार्ड नंबर 54 वसंत पटेल, वार्ड नंबर 55 से लल्लन सरोज, वार्ड नंबर 56 से सुनीता वर्मा, वार्ड 57 से वरुण दुबे, वार्ड नंबर 62 से सुनीता पटेल, वार्ड नंबर 59 से रीता पटेल शामिल हैं। जिलाध्यक्ष लाल बहादुर पटेल और विनायक पटेल ने विजेताओं को बधाई दी है। पप्पू माली ने बताया कि अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी की अहम भूमिका होगी। शीघ्र ही इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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पंचायत चुनाव के नतीजे बताते हैं कि जनता ने भाजपा को सिरे से नकार दिया है। समाजवादी विचारधारा के 41 लोग सदस्य का चुनाव जीतकर आए हैं। जौनपुर का जिला पंचायत अध्यक्ष सपा का था और आने वाले चुनाव में भी सपा का ही अध्यक्ष रहेगा। हमें भरोसा है कि आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी सभी नौ सीटों पर अपना परचम लहराएगी। -लालबहादुर यादव, जिलाध्यक्ष सपा।
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कई पदों के परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं। ऐसे में वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। सभी रिजल्ट आने के बाद परिणाम की समीक्षा की जाएगी। जहां तक अध्यक्ष पद का सवाल है तो इस पर शीर्ष नेतृत्व के निर्देश के आधार पर फैसला होगा। सबका साथ-सबका विकास के रूप में पार्टी पूरी दमदारी से अध्यक्ष का चुनाव लड़ेगी और जीतेगी भी। -पुष्पराज सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा।
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सत्ता के दुरुपयोग के बावजूद हमारे प्रत्याशियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रशासन पर सत्ता का दबाव न होता तो कई अन्य सीटों पर भी हमारी जीत होती। अध्यक्ष पद के लिए हमारे पास कई सुयोग्य उम्मीदवार हैं। पार्टी नेतृत्व जिसे कहेगी, उसे उम्मीदवार बनाकर मैदान में पूरी दमदारी से लड़ा जाएगा। -राजकुमार भारती, जिलाध्यक्ष बसपा।
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अध्यक्ष पद पर रहा है सपा-बसपा का दबदबा
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अब तक सपा-बसपा का ही दबदबा रहा है। पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद वर्ष 1995 में हुए पहले चुनाव में कमला सिंह अध्यक्ष चुनी गई थीं। इसके बाद वर्ष 2000 में बसपा की प्रभावती पाल निर्वाचित हुईं। वर्ष 2005 के चुनाव में सपा समर्थित कलावती यादव को अध्यक्ष की कुर्सी हासिल हुई। वर्ष 2010 के चुनाव में जब सूबे की सत्ता पर बसपा आसीन थी तो अध्यक्ष पद पर बसपा की अनीता सिद्धार्थ को बैठने का मौका मिला। सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष का भी तख्तापलट हुआ। कोर्ट के फैसले के बाद हुए चुनाव में सपा समर्थित शारदा चौधरी को कुर्सी हासिल हुई। वर्ष 2015 में सपा के ही राजबहादुर यादव जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।