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सस्ती और प्रदूषण रहित है सौर ऊर्जा
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करंजाकला। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में सोमवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला नई दिल्ली की वैज्ञानिक डा. रितु श्रीवास्तव ने सतत ऊर्जा के लिए फोटोनिक डिवाइस विषय पर विस्तार से समझाया। कहा कि फोटोनिक डिवाइस प्रकाश ऊर्जा का सतत और स्वच्छ स्रोत है। सोलर ऊर्जा का ही देश में भविष्य है जो कि देश को प्रदूषण मुक्त करने में सहायक होगा। इसमें अधिक उत्पादन और कम लागत भी आएगी।
कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के सम्मिलित प्रयास टिकाऊ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। सीवी रमन के जीवन पर भी प्रकाश डाला। कहा कि सिर्फ भारतीयों का पास ही सिद्धांत की अवधारणा स्पष्ट है। इस कारण विश्व के जिन भी देश में वे काम के लिए गए। वहां उन्होंने देश का नाम रोशन किया। इसरो लखनऊ के मिर्जा मोहम्मद जहीर ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। जहीर ने सेटेलाइट के कार्य प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। बताया कि इसरो ने नाविक नाम का नेविगेशन सिस्टम बनाया है, जिसे 2019 में मान्यता मिल चुकी है। नाविक की मदद से समुद्री क्षेत्र में मछुआरों को तथा युद्ध के समय में भारतीय सेना को बहुत मदद मिलेगी। इसरो लखनऊ के डा. दिनेश कुमार मिश्रा ने भारतीय अंतरिक्ष मिशन द्वारा अंतरिक्ष में किए गए अभियानों के बारे में चर्चा की। कहा कि भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंच गया और चंद्रयान-2 और मंगलयान-1 सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। सेमिनार के सह संयोजक प्रो. देवराज सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। संयोजक प्रो. बीबी तिवारी ने संगोष्ठी की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। संचालन रामांशु और धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डा. धीरेंद्र कुमार चौधरी ने किया।
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कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के सम्मिलित प्रयास टिकाऊ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। सीवी रमन के जीवन पर भी प्रकाश डाला। कहा कि सिर्फ भारतीयों का पास ही सिद्धांत की अवधारणा स्पष्ट है। इस कारण विश्व के जिन भी देश में वे काम के लिए गए। वहां उन्होंने देश का नाम रोशन किया। इसरो लखनऊ के मिर्जा मोहम्मद जहीर ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। जहीर ने सेटेलाइट के कार्य प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। बताया कि इसरो ने नाविक नाम का नेविगेशन सिस्टम बनाया है, जिसे 2019 में मान्यता मिल चुकी है। नाविक की मदद से समुद्री क्षेत्र में मछुआरों को तथा युद्ध के समय में भारतीय सेना को बहुत मदद मिलेगी। इसरो लखनऊ के डा. दिनेश कुमार मिश्रा ने भारतीय अंतरिक्ष मिशन द्वारा अंतरिक्ष में किए गए अभियानों के बारे में चर्चा की। कहा कि भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंच गया और चंद्रयान-2 और मंगलयान-1 सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। सेमिनार के सह संयोजक प्रो. देवराज सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। संयोजक प्रो. बीबी तिवारी ने संगोष्ठी की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। संचालन रामांशु और धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डा. धीरेंद्र कुमार चौधरी ने किया।
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