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Jaunpur News: एसआईटी तीन राज्यों में कारोबारियों की संपत्तियों का जुटा रही ब्योरा
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जौनपुर। कोडीन युक्त कफ सिरप मामले के आरोपियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पुलिस की पकड़ से दूर आरोपियों की संपत्तियों का ब्योरा जांच अधिकारी खंगाल रहे हैं, ताकि गलत तरीके से अर्जित किए गए धन से बनाई गई संपत्तियों को जब्त किया जा सके। साथ ही मामले में प्रभावी कार्रवाई करने के लिए दस्तावेज जुटाने के सिलसिले में झारखंड, हिमांचल प्रदेश और हरियाणा में एक-एक टीम भेजी गई है।
कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में जनपद में अब तक तीन प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। यह प्राथमिकी जनपद के 16 फर्म समेत 20 लोगों पर दर्ज की गई है। इनमें केवल अब तक मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद जायसवाल की ही गिरफ्तारी हुई है। जबकि शेष अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। जांच में यह पता चला है कि झारखंड के रांची, हिमांचल प्रदेश के बढ़ी और हरियाणा के पानीपत में कोडीन युक्त कफ सिरप की फैक्टरी है, जहां से दस्तावेज जुटाने के लिए एसआईटी की एक-एक टीमें भेजी गई है। एसआईटी ने संबंधित आरोपी फर्म संचालकों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया, लेकिन अभी तक किसी ने अपना पक्ष नहीं रखा।
इनसेट
गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट से स्टे लेने पहुंचे फर्म संचालक
हालांकि गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्म संचालक कोर्ट से स्टे लेने के लिए याचिका दायर किए। जहां से अर्जी खारिज कर दी गई। इधर, दबिश दे रही एसआईटी और पुलिस आरोपियों पर और अधिक शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। कार्रवाई में लगे अधिकारियों के मुताबिक अब सभी आरोपी कारोबारियों की संपत्तियों का ब्योरा लिया जा रहा है, जिसे उन्होंने वर्ष 2023 से लेकर 2025 के बीच में बनाया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन संपत्तियों को जब्त किया जा सके। एसआईटी टीम का नेतृत्व कर रहे सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि तीन राज्यों में टीम गई है। टीम जरूरी दस्तावेज जुटा रही है।
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कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में जनपद में अब तक तीन प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। यह प्राथमिकी जनपद के 16 फर्म समेत 20 लोगों पर दर्ज की गई है। इनमें केवल अब तक मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद जायसवाल की ही गिरफ्तारी हुई है। जबकि शेष अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। जांच में यह पता चला है कि झारखंड के रांची, हिमांचल प्रदेश के बढ़ी और हरियाणा के पानीपत में कोडीन युक्त कफ सिरप की फैक्टरी है, जहां से दस्तावेज जुटाने के लिए एसआईटी की एक-एक टीमें भेजी गई है। एसआईटी ने संबंधित आरोपी फर्म संचालकों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया, लेकिन अभी तक किसी ने अपना पक्ष नहीं रखा।
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गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट से स्टे लेने पहुंचे फर्म संचालक
हालांकि गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्म संचालक कोर्ट से स्टे लेने के लिए याचिका दायर किए। जहां से अर्जी खारिज कर दी गई। इधर, दबिश दे रही एसआईटी और पुलिस आरोपियों पर और अधिक शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। कार्रवाई में लगे अधिकारियों के मुताबिक अब सभी आरोपी कारोबारियों की संपत्तियों का ब्योरा लिया जा रहा है, जिसे उन्होंने वर्ष 2023 से लेकर 2025 के बीच में बनाया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन संपत्तियों को जब्त किया जा सके। एसआईटी टीम का नेतृत्व कर रहे सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि तीन राज्यों में टीम गई है। टीम जरूरी दस्तावेज जुटा रही है।
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