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Jaunpur News: एकल शौचालय कहीं अधूरे कहीं क्षतिग्रस्त
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जौनपुर। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में निर्मित एकल शौचालय कहीं क्षतिग्रस्त तो कहीं अधूरे हैं। कुल मिलाकर कई शौचालय अनुपयोगी हैं। अब इनकी मरम्मत के लिए सत्यापन करते हुए रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इसके आधार पर शौचालयों की मरम्मत और उनके जीर्णोद्धार सहित अन्य कार्य कराए जाएंगे।
2014 में केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के लिए घर-घर शौचालय बनाने पर जोर दिया। लोगों को जागरूक कर अभियान से जोड़ते हुए शौचालय बनवाने की धनराशि भेजी गई। पहले शौचालय निर्माण का जिम्मा पंचायतों को था, बाद में सीधे लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जाने लगी। कई इलाकों में शौचालय निर्माण के नाम पर बड़ी अनियमितता सामने आई है तो कई जगहों पर धनराशि पूरी मिलने के बाद भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया।
सत्यापन शुरू होने से शौचालय निर्माण में हुई गड़बड़ियां भी पकड़ में आने की संभावना जताई जा रही है। पंचायती राज विभाग के मुताबिक वर्ष 2014 से वर्ष अब तक छह लाख 92 हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया है। सत्यापन के दौरान एक-एक शौचालय की वस्तु स्थिति देखी जाएगी।
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केस एक
डोभी क्षेत्र के खलिया खास में शौचालय की दीवार बनाकर सीट बैठाकर छोड़ दिया गया है। इसके लिए मात्र ढाई फीट ही गड्ढा खोदा गया है जिससे दुर्गंध आने से इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। लाभार्थी धर्मराज ने बताया है कि प्रधान ने इतना ही कार्य कराया था।
केस दो
रामनगर प्रथम गांव में शौचालय जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। ऐसे में लाभार्थी इसका उपयोग नहीं कर रहे है। प्रधान संजय गौतम ने बताया है कि पूर्व प्रधान द्वारा शौचालय का निर्माण कराया गया था हालांकि ऐसे शौचालयों को मरम्मत कराई जाएगी।
रेट्रोफिटिंग के लिए शौचालयों का सर्वे कराया जाना है। इसके लिए सभी एडीओ पंचायत सहित अन्य संबंधितों को निर्देशित किया गया है। इस दौरान जो भी मरम्मत योग्य शौचालय मिलेगा उसका 15वें वित्त योजना की धनराशि से मरम्मत कराई जाएगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। -नत्थू लाल, जिला पंचायत राज अधिकारी
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2014 में केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के लिए घर-घर शौचालय बनाने पर जोर दिया। लोगों को जागरूक कर अभियान से जोड़ते हुए शौचालय बनवाने की धनराशि भेजी गई। पहले शौचालय निर्माण का जिम्मा पंचायतों को था, बाद में सीधे लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जाने लगी। कई इलाकों में शौचालय निर्माण के नाम पर बड़ी अनियमितता सामने आई है तो कई जगहों पर धनराशि पूरी मिलने के बाद भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया।
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सत्यापन शुरू होने से शौचालय निर्माण में हुई गड़बड़ियां भी पकड़ में आने की संभावना जताई जा रही है। पंचायती राज विभाग के मुताबिक वर्ष 2014 से वर्ष अब तक छह लाख 92 हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया है। सत्यापन के दौरान एक-एक शौचालय की वस्तु स्थिति देखी जाएगी।
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केस एक
डोभी क्षेत्र के खलिया खास में शौचालय की दीवार बनाकर सीट बैठाकर छोड़ दिया गया है। इसके लिए मात्र ढाई फीट ही गड्ढा खोदा गया है जिससे दुर्गंध आने से इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। लाभार्थी धर्मराज ने बताया है कि प्रधान ने इतना ही कार्य कराया था।
केस दो
रामनगर प्रथम गांव में शौचालय जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। ऐसे में लाभार्थी इसका उपयोग नहीं कर रहे है। प्रधान संजय गौतम ने बताया है कि पूर्व प्रधान द्वारा शौचालय का निर्माण कराया गया था हालांकि ऐसे शौचालयों को मरम्मत कराई जाएगी।
रेट्रोफिटिंग के लिए शौचालयों का सर्वे कराया जाना है। इसके लिए सभी एडीओ पंचायत सहित अन्य संबंधितों को निर्देशित किया गया है। इस दौरान जो भी मरम्मत योग्य शौचालय मिलेगा उसका 15वें वित्त योजना की धनराशि से मरम्मत कराई जाएगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। -नत्थू लाल, जिला पंचायत राज अधिकारी